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परिसीमन विधेयक पर डीएमके की शर्तें, मोदी सरकार से समर्थन के बदले मांगे ये बदलाव

by admin@bebak24.com on | 2026-08-07 13:36:28

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परिसीमन विधेयक पर डीएमके की शर्तें, मोदी सरकार से समर्थन के बदले मांगे ये बदलाव

नई दिल्ली: लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार और दक्षिण भारतीय राज्यों के बीच राजनीतिक खींचतान जारी है। इसी बीच तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके ने संकेत दिया है कि कुछ अहम बदलाव किए जाने पर वह केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का समर्थन करने पर विचार कर सकती है।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। सरकार की कोशिश है कि विधेयक को संसद में पारित कराने के लिए विपक्षी दलों का समर्थन जुटाया जाए।

डीएमके ने रखीं तीन प्रमुख मांगें

रिपोर्टों के मुताबिक, डीएमके ने विधेयक के समर्थन के लिए कुछ शर्तें सामने रखी हैं। पार्टी की पहली मांग है कि लोकसभा में राज्यों की मौजूदा सीटों की संख्या में अगले 25 वर्षों तक कोई कमी या पुनर्वितरण न किया जाए।

इसके अलावा पार्टी चाहती है कि संविधान में संशोधन कर देश के सभी राज्यों को लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दी जाए। डीएमके का मानना है कि इस व्यवस्था से परिसीमन के कारण दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को संतुलित किया जा सकेगा।

पार्टी की एक और मांग है कि विधेयक में प्रत्येक राज्य के लिए प्रस्तावित लोकसभा सीटों की संख्या स्पष्ट रूप से दी जाए।

अप्रैल में पेश हुआ था विधेयक

परिसीमन से जुड़ा एक विधेयक अप्रैल में संसद में पेश किया गया था, लेकिन उसे पारित नहीं कराया जा सका। दक्षिण भारतीय राज्यों की ओर से लगातार यह चिंता जताई जाती रही है कि आबादी के आधार पर परिसीमन होने पर अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को लोकसभा में ज्यादा सीटें मिल सकती हैं।

इसका असर तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रभाव पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

फिलहाल लोकसभा में सीटों का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर है। मौजूदा व्यवस्था की सीमा 2027 की जनगणना के बाद समाप्त होने वाली है।

अंतिम फैसला विधेयक देखने के बाद

डीएमके की ओर से संकेत दिया गया है कि पार्टी अभी किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंची है। पार्टी प्रस्तावित विधेयक के अंतिम स्वरूप और उसमें शामिल प्रावधानों को देखने के बाद ही अपना रुख तय करेगी।

वहीं, रिपोर्ट के अनुसार डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया है कि केंद्र सरकार ने अभी तक पार्टी से इस मुद्दे पर औपचारिक संपर्क नहीं किया है।

परिसीमन का मुद्दा आने वाले समय में केंद्र और दक्षिणी राज्यों के बीच बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। ऐसे में संसद में विधेयक आने के बाद डीएमके समेत अन्य विपक्षी दलों का रुख बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बेबाक24 टेक

परिसीमन का मुद्दा सिर्फ लोकसभा सीटों के पुनर्विन्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है। खासकर दक्षिण भारतीय राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से संसद में उनका मौजूदा प्रभाव कम हो सकता है।

डीएमके की शर्तें इसी चिंता को केंद्र में रखती हैं। अब यह देखना अहम होगा कि केंद्र सरकार प्रस्तावित विधेयक में इन मांगों को किस हद तक शामिल करती है और डीएमके अंतिम रूप से अपना समर्थन देती है या नहीं।



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