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'हम राजनीतिक विरोधी हैं, दुश्मन नहीं'; राहुल गांधी से बातचीत पर बोले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू

by admin@bebak24.com on | 2026-08-06 20:30:03

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'हम राजनीतिक विरोधी हैं, दुश्मन नहीं'; राहुल गांधी से बातचीत पर बोले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू

नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र में जारी गहमागहमी और हंगामे के बीच एक सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण तस्वीर सामने आई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से हुई अपनी मुलाकात और बातचीत पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन देशहित में संवाद का मार्ग हमेशा खुला रहना चाहिए।

किरेन रिजिजू के बयान के प्रमुख बिंदु

संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से हुई मुलाकात का ब्योरा साझा किया:

  • सदन के संचालन पर चर्चा: "राहुल गांधी जी से मेरी बहुत अच्छी और सकारात्मक बातचीत हुई। हमने एक विशेष मुद्दे को लेकर उनसे सहयोग का अनुरोध किया और सदन के सुचारू संचालन समेत अन्य विषयों पर चर्चा की।"

  • "विरोधी हैं, दुश्मन नहीं": रिजिजू ने कहा, "हम राजनीतिक विरोधी हो सकते हैं, लेकिन हम दुश्मन नहीं हैं। लोकतंत्र में कांग्रेस और अन्य सभी विपक्षी दलों के साथ लगातार संवाद और समन्वय बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है ताकि देशहित के काम बिना रुकावट के आगे बढ़ सकें।"

गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी पर दी सफाई

विपक्ष द्वारा गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आने और छात्रों के मुद्दे पर बयान देने की लगातार उठाई जा रही मांग पर रिजिजू ने स्थिति साफ की:

  • विधायी प्रक्रियाओं का हवाला: रिजिजू ने बताया कि गृह मंत्री संसद में नियमित रूप से उपस्थित रहते हैं और सुबह से शाम तक काम करते हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश किए हैं।

  • विभागीय नियम: उन्होंने कहा कि नियमतः जिस मंत्री का विधेयक या विषय सदन के समक्ष विचाराधीन होता है, वे ही मंत्री सदन के पटल पर जवाब देने के लिए मौजूद रहते हैं।

बेबाक24 टेक

संसद में जारी तीखी राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शनों के बीच किरेन रिजिजू और राहुल गांधी की यह मुलाकात संसदीय लोकतंत्र के स्वस्थ रवैये को दर्शाती है। जहां एक ओर विपक्ष कई ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है, वहीं सरकार की ओर से संवाद का हाथ बढ़ाना यह संकेत देता है कि विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए आपसी सहमति की राह तलाशी जा रही है।



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