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'भारत के कानून और संविधान की जीत'; पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा की माफी के बाद बीजेपी का बड़ा बयान

by on | 2026-08-06 19:17:01

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'भारत के कानून और संविधान की जीत'; पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा की माफी के बाद बीजेपी का बड़ा बयान

नई दिल्ली : फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो को हटाए जाने के मामले में माफी मांगे जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। सूचना प्रौद्योगिकी और संचार संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष तथा बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इसे देश की संप्रभुता और कानून की बड़ी जीत करार दिया है।

निशिकांत दुबे और भाजपा के मुख्य बिंदु

मेटा के ग्लोबल अफेयर्स चीफ जोएल कपलान और मार्क जुकरबर्ग द्वारा सरकार और संसदीय समिति के समक्ष खेद व्यक्त किए जाने के बाद बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने मीडिया से बात करते हुए निम्नलिखित बातें कहीं:

  • "संविधान और संसद की जीत": निशिकांत दुबे ने कहा, "यह भारत के कानून, संविधान और संसद की जीत है। यह 140 करोड़ लोगों के नेता प्रधानमंत्री की ताकत है। इससे साफ है कि जिसे भी भारत में कारोबार करना है, उसे देश के कानून का पालन करना होगा।"

  • 'सेफ हार्बर' खत्म करने की चेतावनी: संसदीय समिति ने स्पष्ट किया था कि यदि मेटा भारतीय नियमों का उल्लंघन करती है या पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाती है, तो आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाले 'सेफ हार्बर' के अधिकार को वापस ले लिया जाएगा।

क्या था पूरा विवाद?

  • पेपर लीक पर पीएम का संदेश: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर देश के युवाओं और छात्रों को संबोधित करते हुए एक वीडियो मैसेज पोस्ट किया था।

  • 4-5 घंटे तक गायब रहा वीडियो: मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर यह वीडियो लगभग 5 घंटे तक तकनीकी गड़बड़ी/अल्गोरिदम एरर बताकर हटा दिया गया था।

  • संसदीय समिति का सख्त रुख: आईटी समिति ने मेटा के अधिकारियों को तलब कर कड़ी फटकार लगाई थी और स्पष्टीकरण तथा माफी की मांग की थी। इसके बाद मेटा के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्रियों व सचिवों से मिलकर आधिकारिक रूप से माफी मांगी।

बेबाक24 टेक

भारत में काम कर रहीं ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए यह घटना एक बड़ा संदेश है। किसी लोकतांत्रिक देश के शीर्ष प्रमुख के आधिकारिक संदेश को टेक प्लेटफॉर्म्स द्वारा अनपेक्षित रूप से हटाना केवल एक 'तकनीकी खामी' नहीं बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता और जवाबदेही का सवाल बन जाता है। बीजेपी का सख्त रुख यह दिखाता है कि भारत अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर देश के कानूनों और पारदर्शी एल्गोरिदम के पालन के लिए कोई समझौता नहीं करेगा।



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