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कौन हैं नंदन नीलेकणी? जिन्हें पीएम मोदी ने सौंपी परीक्षा सुधार की हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की कमान

by admin@bebak24.com on | 2026-07-27 10:47:53

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कौन हैं नंदन नीलेकणी? जिन्हें पीएम मोदी ने सौंपी परीक्षा सुधार की हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की कमान

नई दिल्ली : नीट-यूजी पेपर लीक मामले, 37 दिनों तक चले छात्र आंदोलन और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पीएम मोदी ने देश की परीक्षा पद्धति में आमूलचूल सुधार और भविष्य की परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की है।

नंदन नीलेकणी कौन हैं? पहचान और बैकग्राउंड

नंदन नीलेकणी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी और कॉर्पोरेट जगत के सबसे प्रमुख और सम्मानित चेहरों में से एक हैं:

  • इन्फोसिस के सह-संस्थापक: वे भारत की दिग्गज आईटी कंपनी 'इन्फोसिस' के सह-संस्थापक हैं और बेंगलुरु आईटी हब के बड़े प्रतीक माने जाते हैं।

  • 'आधार' परियोजना के वास्तुकार: मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार के दौरान साल 2009 में शुरू की गई भारत की पहचान प्रणाली 'आधार कार्ड' योजना के मुख्य शिल्पकार नंदन नीलेकणी ही थे।

  • राजनीतिक सफर: उन्होंने साल 2014 में कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु साउथ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था, हालांकि इसमें वे भाजपा नेता अनंत कुमार से पराजित हुए थे।

  • वर्तमान भूमिका: हाल के वर्षों में वे तकनीकी नवाचारों, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI) और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर काफी सक्रिय रहे हैं।

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                │          हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की टीम        │
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│ 1. नंदन नीलेकणी     │    │ 2. एस. सोमनाथ        │    │ 3. तपन डेका          │
│    (अध्यक्ष & IT विशेषज्ञ)│ │    (पूर्व अध्यक्ष, ISRO)│    │    (पूर्व निदेशक, IB) │
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        │                              │                              │
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│ 4. प्रो. वी. कामकोटी │    │ 5. अनीता करवाल       │    │ 6. अमृत लाल मीणा     │
│    (निदेशक, IIT मद्रास)│  │    (पूर्व शिक्षा सचिव)│    │    (लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ)│
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पीएम मोदी का संदेश: "टेक्नोलॉजी से बढ़ेगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया संदेश में कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई (फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट व सख्त कानून) कर रही है, लेकिन भविष्य के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाना प्राथमिकता है:

नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री):

"हमारी परीक्षा पद्धति भरोसेमंद हो, पारदर्शी हो और उसमें सबसे ज्यादा तकनीक (Technology) का इस्तेमाल हो। इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए विश्व प्रसिद्ध टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी जी के नेतृत्व में इस हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर जल्द से जल्द आगामी परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जाएगी।"

टास्क फोर्स पर विपक्ष का हमला: कांग्रेस बोली 'छवि सुधारने का प्रयास'

पीएम मोदी की घोषणा के तुरंत बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट कर सरकार की नीयत पर सवाल उठाए:

  • के. राधाकृष्णन समिति का हवाला: जयराम रमेश ने कहा कि जून 2024 में नीट गड़बड़ी के बाद भी डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी, लेकिन उसकी 101 सिफारिशों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया।

  • एनटीए महानिदेशक पद: उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 से 2026 के बीच दो वर्षों में सरकार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी  के लिए एक पूर्णकालिक महानिदेशक तक नियुक्त नहीं कर पाई। यह टास्क फोर्स केवल प्रधानमंत्री की प्रभावित छवि को सुधारने की कोशिश है।

जंतर-मंतर आंदोलन और पृष्ठभूमि

20 जून से जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी, सोनम वांगचुक और छात्र संगठनों  द्वारा शुरू किया गया आंदोलन देश भर में फैल गया था। संसद भवन मार्च, लाठीचार्ज और जनदबाव के बाद 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था, जिसके बाद सरकार ने नए कानून और इस नई तकनीकी समिति का ऐलान किया है।

बेबाक24 टेक

परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने और डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने के लिए नंदन नीलेकणी और इसरो के पूर्व चीफ एस. सोमनाथ जैसे तकनीकी व प्रशासनिक विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना एक रणनीतिक कदम है। हालांकि, देश के करोड़ों परीक्षार्थियों और अभिभावकों को अब कागजी घोषणाओं के बजाय धरातल पर एक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक-संचालित परीक्षा ढांचा देखने का इंतजार रहेगा।



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