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'क्या जंतर-मंतर का नीट आंदोलन अब CJP और सोनम वांगचुक से भी बड़ा हो चुका है?'

by on | 2026-07-25 13:14:25

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'क्या जंतर-मंतर का नीट आंदोलन अब CJP और सोनम वांगचुक से भी बड़ा हो चुका है?'

नई दिल्ली (जंतर-मंतर): प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक और प्रशासनिक धांधली के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ प्रदर्शन अब केवल एक संगठनात्मक विरोध नहीं रहा, बल्कि यह एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।

आम जनता बनी आंदोलन का 'सपोर्ट सिस्टम'

जंतर-मंतर पर बैरिकेड्स के पास का नजारा यह साफ बयां करता है कि आंदोलन का दायरा कितना फैल चुका है:

  • अभिभावकों की मौजूदगी: उत्तरी दिल्ली में मिठाई की दुकान चलाने वाले मीनू फोगाट और उनका परिवार अपनी दुकान कर्मचारियों के भरोसे छोड़कर पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर डटे हैं और प्रदर्शनकारियों को लस्सी व छाछ बांट रहे हैं। मीनू फोगाट का कहना है, "हमारा बेटा भले ही आईआईटी में है, लेकिन हम यहां सभी बच्चों की हक की लड़ाई में शामिल होने आए हैं। केवल फोन पर रील शेयर करने से काम नहीं चलेगा, हमें सड़कों पर निकलना होगा।"

  • घायलों का भी हौसला बुलंद: 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान पुलिस बल प्रयोग में घायल हुईं एम्स की डॉक्टर श्रुति वॉकर के सहारे प्रदर्शन स्थल पहुंचीं। उनका कहना है, "पुलिस की लाठी से पैर में चोट आई, लेकिन मैं उन सभी बच्चों के लिए यहां खड़ी हूं जो जीवन में ईमानदारी से आगे बढ़ना चाहते हैं।"

सोनम वांगचुक का अनशन और मांगों में विरोधाभास?

26 दिनों के कठिन उपवास के बाद सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात केंद्रीय मंत्रियों (जे.पी. नड्डा व डॉ. जितेंद्र सिंह) के हाथों अपना अनशन समाप्त किया।

सरकार द्वारा दी गई सैद्धांतिक सहमतियां:

  • शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और आंदोलनकारियों पर कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
  • नीट पेपर लीक और शिक्षा सुधारों पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाएगी।
  • पेपर लीक की वजह से आत्महत्या करने वाले परीक्षार्थियों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।

रणनीतिक अंतर व बुद्धिजीवियों की राय:

  • प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद (दिल्ली यूनिवर्सिटी): "सोनम वांगचुक के भूखे रहने के कष्ट को लोगों ने देखा, लेकिन सरकार से बातचीत के बाद उनकी मांगों से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की बात गायब दिखी। हालांकि जंतर-मंतर पर CJP अब भी इस्तीफे पर अड़ी है। यह समझना होगा कि यह आंदोलन अब वांगचुक या किसी एक चेहरे से कहीं ज्यादा बड़ा हो चुका है।"

  • योगेंद्र यादव (वरिष्ठ विश्लेषक): "CJP की युवा लीडरशिप में अनुभव की कमी जरूर है, लेकिन उनकी नीयत में कोई खोट नहीं है। अगर गंभीरता न होती तो वे पुलिस कार्रवाई के बाद दोबारा जंतर-मंतर पर नहीं लौटते। देश का युवा इस समय अपनी बात कहना चाहता है और वही इस आंदोलन की असली ताकत है।"

दूर-दराज से आए छात्रों के सामने 'वक्त और वित्तीय' चुनौती

लखनऊ से आए एसएससी अभ्यर्थी आलोक कुमार वर्मा और मेरठ से आईं वंदना का कहना है कि सरकार की ओर से देरी की रणनीति अपनाई जा रही है ताकि लोग थककर वापस लौट जाएं:

"ट्रेनें घंटों लेट चल रही हैं। रहने और खाने के खर्च से जेब पर भारी असर पड़ रहा है। अगर सरकार ऐसे ही वक्त लगाती रही, तो आम छात्रों के लिए लंबे समय तक रुकना मुश्किल होगा।"

बेबाक24 टेक

जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन अब केवल सोनम वांगचुक या कॉकरोच जनता पार्टी  तक सीमित नहीं रह गया है। यह देश की परीक्षा प्रणाली (NTA) में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग कर रहे लाखों युवाओं के आक्रोश का प्रतीक बन चुका है। हालांकि, सीजेपी और सरकार के बीच होने वाले अगले दौर की वार्ताओं से ही यह तय होगा कि यह आंदोलन किस अंजाम तक पहुंचता है।



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