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'उनका क्या अपराध था? पास में हथियार नहीं, बस किताबें और पेंसिलें थीं'— दक्षिणी ईरान के स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल हमले में 120 बच्चों समेत 156 की मौत पर बीबीसी की विशेष रिपोर्ट

by on | 2026-07-24 17:20:22

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'उनका क्या अपराध था? पास में हथियार नहीं, बस किताबें और पेंसिलें थीं'— दक्षिणी ईरान के स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल हमले में 120 बच्चों समेत 156 की मौत पर बीबीसी की विशेष रिपोर्ट

मिनाब (दक्षिणी ईरान): 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध छिड़ने के शुरुआती घंटों में दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर स्थित 'शाजेरह तैय्यबा प्राथमिक स्कूल' पर हुए भयानक मिसाइल हमले के निशान आज भी ताज़ा हैं। बीबीसी की सीनियर इंटरनेशनल कॉरस्पॉडेंट नवल अल-मग़ाफ़ी ने जमीनी स्तर पर पहुंचकर इस भयावह हादसे का जायजा लिया।

मिनाब प्रॉसिक्यूटर ऑफिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलों से हुए इस हमले में 120 बच्चों समेत कुल 156 निर्दोष लोगों की जान चली गई, जिनमें एक गर्भवती महिला और उसका अजन्मा बच्चा भी शामिल था।

"कक्षा से आ रही थी खून की गंध": शिक्षिका अमाइने नदेमी का दर्द

1st ग्रेड की 33 वर्षीया शिक्षिका अमाइने नदेमी ने हादसे के भयानक मंजर को याद करते हुए बताया कि रमज़ान का महीना होने के कारण बच्चे प्रार्थना कक्ष में कुरान पढ़ रहे थे। जैसे ही हमलों की खबर मिली, स्कूल बंद कर अभिभावकों को बुलाया गया।

  • एक के बाद एक धमाके: जब नदेमी आखिरी बचे पहली कक्षा के बच्चों को लेकर बाहर निकल रही थीं, तभी मिसाइल सीधे स्कूल पर आ गिरी।

  • अंधेरा और घुटन: "कक्षा में घना काला धुआं भर गया। मैं अपनी बांहों में पकड़े बच्चों को भी नहीं देख पा रही थी। चीख-पुकार के बीच पूरा स्कूल ताश के पत्तों की तरह ढह गया।"

  • अपनों को खोने का गम: हादसे में नदेमी की छात्रा अड्रीना (जो सीढ़ियों पर अपनी मां के साथ मारी गई), दूसरी कक्षा की फातिमा और स्कूल के हेडटीचर, डिप्टी हेड व कुरान टीचर समेत कई स्टाफ की मौत हो गई।

'किसी का हाथ मिला, तो किसी का पैर': रेस्क्यू का डरावना सच

ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के बचावकर्मी रज़ा बेशारती ने बताया कि जब वे मलबे के पास पहुंचे, तो चारों तरफ परिजनों का करुण क्रंदन था।

रज़ा बेशारती (बचावकर्मी):

"हम उम्मीद कर रहे थे कि कोई जिंदा मिले, लेकिन मलबे में किसी का पूरा शरीर नहीं बचा था—किसी का हाथ मिला, तो किसी का पैर। कई परिवारों ने बच्चों की पहचान उनके जूतों और कपड़ों से की।"

एक मासूम बच्ची सेतायश (9 वर्ष) की मां मसोमा मेहरन शेख़ाबादी ने बताया कि उनकी बेटी टीचर बनना चाहती थी। अगली सुबह क्रीम रंग के मोजों को देखकर उन्होंने अपनी बच्ची के शव की शिनाख्त की थी।

अमेरिकी खुफ़िया तंत्र की असफलता या चूक?

विशेषज्ञों और सैटेलाइट तस्वीरों की जांच में सामने आया है कि हमले में सटीक निशाना लगाने वाली टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था, जो केवल अमेरिकी सेना के पास है।

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               │         हमले से जुड़े 3 मुख्य तथ्य          │
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│ 1. IRGC परिसर का पास │    │ 2. 2016 से अलग थी    │    │ 3. US मीडिया का दावा │
│    होना (पुराना सैन्य│    │    दीवार और एंट्री   │    │    'पुराना डेटा बना  │
│    ठिकाना)           │    │    गेट               │    │     हादसे की वजह'    │
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  • अमेरिकी रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बिना सबूत के ईरान पर आरोप लगाया था, जबकि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने उच्च स्तरीय जांच की बात कही है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुरानी इंटेलिजेंस रिपोर्ट के कारण सेना ने गलती से स्कूल को सैन्य ठिकाना समझ लिया था।

  • वेबसाइट पर था पता: हालांकि रिकॉर्ड्स से साफ है कि 2016 से स्कूल की अपनी अलग दीवार और गेट था तथा इंटरनेट पर स्कूल का विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध था।

4. कूटनीतिक और राजनीतिक असर

इस त्रासदी ने ईरान को अमेरिकी अभियानों के खिलाफ वैश्विक मंचों पर आक्रामक रुख अपनाने का मौका दे दिया है। ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए जा रहे अपने वार्ताकारों के विमान का नाम भी "मिनाब-168" रखा है।

वहीं, मिनाब के कब्रिस्तान में हर शाम जुटने वाले पीड़ित परिवार केवल एक ही सवाल पूछ रहे हैं:

"इन बच्चों का अपराध क्या था? क्या उनके पास हथियार थे? उनके बैग में तो सिर्फ पेंसिलें, किताबें और कॉपियां थीं..."

बेबाक24 टेक

युद्ध और सैन्य अभियानों के दावों के बीच 'शाजेरह तैय्यबा स्कूल' का यह दर्दनाक हादसा इस बात का जीता-जागता सबूत है कि आधुनिक युद्धों में 'सटीक मिसाइल हमलों' (Precision Strikes) के दावों के बावजूद सबसे भारी कीमत मासूम नागरिकों और बच्चों को ही चुकानी पड़ती है।

बेबाक24 का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों को इस तरह की भारी चूक की स्वतंत्र निष्पक्ष जांच कराकर जवाबदेही तय करनी चाहिए, ताकि युद्ध की विभीषिका में मासूमों के जीवन को मोहरा न बनाया जाए।



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