ब्रेकिंग न्यूज़
पीएम मोदी ने छात्रों के लिए रोका अपना काफिला: नीट परीक्षा के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर 45 मिनट रुके
अंतरराष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय

डोनाल्ड ट्रंप का नया आर्थिक चाबुक: भारत समेत 60 देशों पर लागू किया 'जबरन मजदूरी' टैरिफ़

by admin@bebak24.com on | 2026-07-24 17:54:19

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3001


डोनाल्ड ट्रंप का नया आर्थिक चाबुक: भारत समेत 60 देशों पर लागू किया 'जबरन मजदूरी' टैरिफ़

न्यूज़ डेस्क, बेबाक24 (24 जुलाई 2026): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार युद्ध (Trade War) को आगे बढ़ाते हुए भारत, ब्रिटेन, चीन, यूरोपीय संघ (EU), कनाडा और जापान समेत दुनिया के करीब 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर नया आयात शुल्क (टैरिफ़) लागू करने का आधिकारिक ऐलान किया है।

वाशिंगटन का तर्क है कि ये देश अपनी वैश्विक सप्लाई चेन से 'जबरन मजदूरी'  को खत्म करने और रोकने के लिए सख्त कदम नहीं उठा रहे हैं। यह नया टैरिफ़ 10 प्रतिशत से लेकर 12.5 प्रतिशत तक तय किया गया है।

पुरानी मियाद खत्म, नए कानून के तहत एक्शन

इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा आपातकालीन शक्तियों (Emergency Powers) के जरिए लगाए गए कई वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक ठहराए जाने के बाद ट्रंप प्रशासन ने कानूनी रास्ता बदलते हुए व्यापार अधिनियम 1974 के 'सेक्शन 301' के तहत यह कार्रवाई की है।

यह नया टैरिफ उस अस्थायी 10% वैश्विक शुल्क की 150 दिनों की मियाद समाप्त होने के ठीक बाद 24 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गया है।


भारत को क्यों मिली 10% की राहत श्रेणी?

शुरुआती अमेरिकी प्रस्तावों में भारत पर 12.5% तक टैरिफ थोपने का अंदेशा जताया जा रहा था। हालांकि, यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की अंतिम रिपोर्ट के अनुसार, भारत द्वारा जबरन मजदूरी रोकने के लिए किए गए विधायी प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के आधार पर भारत को 10 प्रतिशत वाली निचली शुल्क दर श्रेणी में रखा गया है।

वैश्विक प्रतिक्रिया और कानूनी सवाल

  • एशिया व यूरोप में विरोध: चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने अमेरिकी फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। यूरोपीय संघ (EU) ने कहा कि वह पहले ही द्विपक्षीय समझौतों का पालन कर रहा है, ऐसे में यह कदम अनुचित है।

  • व्यापार विशेषज्ञों का मत: विशेषज्ञों का मानना है कि 'जबरन मजदूरी' का हवाला अमेरिकी प्रशासन के लिए अपने टैरिफ बैरियर को बनाए रखने का एक कानूनी ढाल (legal pretext) मात्र है।

बेबाक24 टेक

अमेरिकी राष्ट्रपति का यह नया दांव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला है। हालांकि, भारत का 10% वाली श्रेणी में रहना अन्य प्रतिस्पर्धियों (जैसे चीन या वियतनाम, जिन पर 12.5% लागू है) की तुलना में भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में मामूली बढ़त जरूर दे सकता है। फिर भी, बार-बार बदलते अमेरिकी टैरिफ नियमों से वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment