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बिहार पुलिस के ड्रोन ने खोला सिंडिकेट का राज: उमरपुर दियारे से गंगा पार शराब तस्करी का नेटवर्क उजागर, भू-माफिया का भी खौफ

by on | 2026-07-25 08:45:20

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बिहार पुलिस के ड्रोन ने खोला सिंडिकेट का राज: उमरपुर दियारे से गंगा पार शराब तस्करी का नेटवर्क उजागर, भू-माफिया का भी खौफ

​नरही पुलिस के संरक्षण पर सवाल, थाने के हिस्ट्रीशीटर का ट्रैक्टर और रिंकू राय की मास्टरमाइंड के रूप में चर्चा

​बेबाक 24 के सवालों पर नरही एसएचओ का टालमटोल रवैया—"साहब छुट्टी पर हैं, मामला संज्ञान में नहीं, पता कर रहे हैं"

​बलिया (नरही)। अंतरप्रांतीय सीमा पर शराब तस्करी और आपराधिक सिंडिकेट का खेल किस कदर फल-फूल रहा है, इसका ताजा उदाहरण नरही थाना क्षेत्र का उमरपुर दियारा इलाका है। उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा पर बसे इस इलाके में अवैध शराब की तस्करी का जो कारवां स्थानीय पुलिस की नजरों से ओझल रहता था, उसकी पोल अब बिहार पुलिस के हाईटेक ड्रोन कैमरों ने खोल दी है।

​आसमान से ली गई ड्रोन फुटेज में यह साफ दिख रहा है कि ट्रैक्टरों-ट्रॉलियों में भरकर शराब की खेप बेखौफ तरीके से गंगा नदी के किनारे तक पहुंचाई जाती है। इसके बाद नावों के सहारे इसे बिहार की सीमा में खपाया जा रहा है। रोजाना ट्रॉलियों में लदकर पार हो रही शराब की यह खेप सीधे तौर पर स्थानीय सीमा सुरक्षा और पुलिस की गश्त व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करती है।

​हिस्ट्रीशीटर का 'ट्रैक्टर' और 'मास्टरमाइंड' का नेटवर्क

​स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तस्करी के इस नेटवर्क में जिस ट्रैक्टर का इस्तेमाल हो रहा है, वह नरही थाने के ही पंजीकृत हिस्ट्रीशीटर राम गोविंद राय (पुत्र स्व. श्रीकृष्ण राय) का बताया जा रहा है। वहीं, इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार रिंकू राय (पुत्र राम गोविंद राय) के रूप में सामने आ रहा है।

​गौरतलब है कि ठीक एक साल पहले भी इसी तरह ट्रैक्टर से लदी शराब की खेप बरामद हुई थी, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता और कथित अंदरूनी सांठगांठ के कारण मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसी छूट का नतीजा है कि यह आपराधिक सिंडिकेट आज और अधिक सक्रिय हो चुका है।

​शराब तस्करी से लेकर 20 बीघा जमीन हड़पने का गंभीर आरोप

​हिस्ट्रीशीटर और उसके परिवार का आपराधिक इतिहास केवल तस्करी तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर भू-माफिया के रूप में भी इनका खौफ व्याप्त है:

  • ​पीड़ित परिवार का पलायन: दबंगई और आपराधिक रसूख के कारण गांव का एक पीड़ित श्रीवास्तव परिवार अपना घर-बार छोड़कर पलायन करने पर मजबूर हुआ।
  • ​20 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा: आरोप है कि छल-बल और फर्जीवाड़े के आधार पर श्रीवास्तव परिवार की लगभग 20 बीघा कीमती जमीन पर कब्जा कर दस्तावेजों में नाम दर्ज करा लिया गया।
  • ​संगीन मुकदमों की फेहरिस्त: इस परिवार के खिलाफ हत्या, गैंगस्टर एक्ट सहित दर्जनों संगीन धाराओं में मामले पहले से दर्ज बताए जा रहे हैं।

​'बेबाक 24' के तीखे सवाल पर पुलिस का गैर-जिम्मेदाराना जवाब

​जब इस पूरे प्रकरण, ड्रोन फुटेज और हिस्ट्रीशीटर की संलिप्तता को लेकर 'बेबाक 24' ने नरही थाना प्रभारी (SHO) से सीधी बातचीत की, तो प्रशासनिक संवेदनहीनता और टालमटोल की स्थिति साफ नजर आई।

​एसएचओ का बयान: "साहब छुट्टी पर हैं, मामला संज्ञान में नहीं है, पता करवा रहे हैं।"


​सीमा पार ड्रोन से पूरी तस्करी का नेटवर्क ट्रेस हो जाता है, लेकिन स्थानीय थाने की पुलिस को अपने ही क्षेत्र में चल रहे ट्रैक्टरों का कारवां नजर नहीं आता। क्या यह केवल लापरवाही है या फिर आपराधिक तत्वों को दिया जा रहा वरदहस्त? राज्य सरकार की अपराध के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति के बीच इस पूरे प्रकरण में उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की सख्त जरूरत है।



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