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बंद दरवाजों के पीछे 10 मिनट की मुलाकात, जेपी नड्डा की धरना खत्म करने की अपील; सीजेपी ने सौंपे 3 कड़े प्रस्ताव

by admin@bebak24.com on | 2026-07-20 20:12:44

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बंद दरवाजों के पीछे 10 मिनट की मुलाकात, जेपी नड्डा की धरना खत्म करने की अपील; सीजेपी ने सौंपे 3 कड़े प्रस्ताव

नई दिल्ली: जंतर-मंतर से लेकर संसद के मुहाने तक मचे भारी कोहराम और आंसू गैस के दंश के बीच, आखिरकार नीट धांधली को लेकर चल रहा यह महाआंदोलन देश की सत्ता के गलियारों के भीतर तक पहुंच गया है। सोमवार को एक तरफ जहां सड़कों पर लाठियां बरस रही थीं, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच पहले दौर की बड़ी वार्ता संपन्न हुई।

हालांकि, इस बातचीत को लेकर दोनों पक्षों के दावों में बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। जहां कॉकरोच जनता पार्टी का दावा है कि उन्हें खुद सरकार ने बैकफुट पर आकर बातचीत के लिए बुलाया था, वहीं जेपी नड्डा का कहना है कि पहला प्रस्ताव प्रदर्शनकारियों की तरफ से आया था।


2 घंटे का इंतजार और 10 मिनट की टेबल टॉक: दावों का टकराव

सोमवार दोपहर 11:52 बजे सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका जेपी नड्डा के आवास पहुंचे। करीब दो घंटे से अधिक समय तक चले इंतजार के बाद दोनों नेताओं की केंद्रीय मंत्री से लगभग 10 मिनट की आमने-सामने की मुलाकात हुई।

  • जेपी नड्डा का आधिकारिक स्टैंड: केंद्रीय मंत्री ने मुलाकात की तस्वीरें एक्स पर साझा करते हुए लिखा:

जेपी नड्डा का बयान: "आज सुबह पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव आया और सुबह 11:50 बजे से ही हमारी बातचीत जारी है। सौहार्दपूर्ण वातावरण में मुलाकात हुई। उनके डेलीगेशन के साथ विस्तार से पहले मौखिक चर्चा हुई और उनके द्वारा लगभग 4 बजे मुझे लिखित याचिका दी गई। मैंने सभी प्रदर्शनकारियों से अनुरोध किया कि वे अपने धरने को समाप्त करें और सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन की मदद करें।"

  • सीजेपी प्रवक्ताओं का पलटवार: इसके विपरीत सौरभ दास ने साफ किया कि वे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं। उन्होंने कहा कि मंत्री ने भरोसा दिया है कि वे इस पर 'सही स्तर' पर बात करेंगे, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक वादा नहीं किया गया है। हालांकि, नड्डा ने यह आश्वासन जरूर दिया है कि जंतर-मंतर और उसके आस-पास प्रदर्शनकारियों पर आगे कोई पुलिसिया कार्रवाई नहीं होगी।

नड्डा की टेबल पर सीजेपी का मांग पत्र: ये हैं वो 3 प्रमुख मांगें

वार्ता के दौरान सीजेपी प्रवक्ताओं ने जेपी नड्डा को एक लिखित याचिका सौंपी है, जिसमें सरकार के सामने 3 बेहद कड़े प्रस्ताव रखे गए हैं:

क्र.सं.सीजेपी की प्रमुख मांगें
1सोनम वांगचुक की रिहाई: सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को तुरंत अस्पताल से सम्मानजनक छुट्टी दी जाए और आंदोलन को लेकर उन पर या किसी अन्य छात्र पर कोई कानूनी कार्रवाई न की जाए।
2धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: नीट परीक्षा में हुई ऐतिहासिक धांधली की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें या प्रधानमंत्री उन्हें तत्काल बर्खास्त करें।
3पीड़ित परिवारों को मुआवजा: नीट 2026 पेपर लीक कांड और मानसिक तनाव के कारण देश भर में जिन छात्रों ने आत्महत्या की है, उनके पीड़ित परिजनों को सरकार आधिकारिक तौर पर 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दे।

बदसलूकी और मारपीट के दावों पर छिड़ा 'ट्विटर वॉर': पुलिस ने कहा— 'सब झूठ है'

एक तरफ जहां नड्डा के घर के भीतर कूटनीति चल रही थी, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर पुलिस और सीजेपी के बीच दावों और फैक्ट-चेक का एक नया युद्ध छिड़ गया:

  • सीजेपी का गंभीर आरोप: मार्च के दौरान मची भगदड़ के बाद सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो के बाल खींचे और उनके साथ बदसलूकी की। सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया गया कि पुलिसिया लाठीचार्ज में एक 12 वर्षीय बच्चे समेत 40-50 लोगों के सिर फूटे हैं।

  • दिल्ली पुलिस का सख्त फैक्ट-चेक: इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक तौर पर लिखा:

दिल्ली पुलिस का बयान: "गीतांजलि और 12 वर्षीय बच्ची के साथ मारपीट, सिर पर चोट और 40-50 लोगों के सिर फूटने से जुड़ीं गलत जानकारी वाली सोशल मीडिया पोस्ट्स प्रसारित हो रही हैं। यह जानकारी पूरी तरह झूठी है। कृपया गलत या गुमराह करने वाली जानकारी न फैलाएं।"

पुलिस के इस खंडन के बाद सौरभ दास ने अपने नए पोस्ट में 40-50 लोगों के सिर फूटने की बात तो हटा ली, लेकिन वे इस दावे पर अड़े रहे कि सोनम वांगचुक की पत्नी के साथ बदसलूकी और मारपीट की गई है।

बेबाक24 टेक

संसद सत्र के पहले ही दिन देश के गृह और राजनीतिक गलियारों में जो हलचल मची है, वह यह साफ बताती है कि यह आंदोलन अब किसी एक पार्टी या नेता का नहीं रह गया है, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के गुस्से का प्रतीक बन चुका है। जेपी नड्डा और सीजेपी प्रवक्ताओं के बीच हुई यह मुलाकात भले ही 10 मिनट की रही हो, लेकिन इसने सरकार की पेशानी पर बल ला दिए हैं।

बेबाक24 का रणनीतिक विश्लेषण कहता है कि सरकार इस समय 'डैमेज कंट्रोल' के मोड में है। जेपी नड्डा का प्रदर्शनकारियों से धरना खत्म करने की अपील करना यह दिखाता है कि सरकार संसद के भीतर इस मुद्दे पर घिरने से बचना चाहती है। हालांकि, सीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और 1 करोड़ रुपये के मुआवजे जैसी जो मांगें रखी हैं, उन्हें मानना सरकार के लिए आत्मसमर्पण जैसा होगा। लेकिन सोनम वांगचुक को अस्पताल से डिस्चार्ज करने और पुलिसिया कार्रवाई रोकने पर सहमति बनाकर सरकार आंदोलन की हवा निकालने की कोशिश जरूर कर सकती है। अब देखना यह है कि आंतरिक चर्चा के बाद पीएमओ से इस गतिरोध को तोड़ने के लिए क्या संदेश बाहर आता है।



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