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अभिजीत दीपके के अनशन का दूसरा दिन; बोले— 'अब पता चला भूख हड़ताल कितनी मुश्किल', कल 'चलो संसद' मार्च के लिए बचा रहे ऊर्जा

by on | 2026-07-19 20:01:45

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अभिजीत दीपके के अनशन का दूसरा दिन; बोले— 'अब पता चला भूख हड़ताल कितनी मुश्किल', कल 'चलो संसद' मार्च के लिए बचा रहे ऊर्जा

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षाओं में धांधली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब एक नए नेतृत्व के साथ आगे बढ़ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आज  दूसरे दिन भी जारी रही।

शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस द्वारा प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के तुरंत बाद अभिजीत दीपके मोर्चे पर डट गए थे। अनशन के दूसरे दिन उन्होंने आंदोलन की कठिनाइयों और सोमवार को होने वाले बड़े प्रदर्शन को लेकर अपनी बात रखी।

'बेबाक24' के ग्राउंड ब्यूरो की विशेष रिपोर्ट:

'सोनम सर और छात्रों को सलाम' — भूख हड़ताल पर बोले अभिजीत

जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे अभिजीत दीपके ने अनशन के अपने शुरुआती 24 से 48 घंटों के अनुभव को बेहद चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बाहर से देखने और खुद जमीन पर भूखे बैठने में जमीन-आसमान का अंतर है:

अभिजीत दीपके का बयान: "मेरी भूख हड़ताल का आज दूसरा दिन है। अब मुझे व्यक्तिगत रूप से यह एहसास हुआ है कि दिनों तक बिना अन्न के रहना कितना कठिन और दर्दनाक होता है। मैं सोनम सर (सोनम वांगचुक) और पिछले कई दिनों से यहाँ भूख हड़ताल पर बैठे छात्र संगठन के साथियों को सलाम करता हूँ। मैं फिलहाल बहुत ज्यादा बात नहीं कर रहा हूँ और कल होने वाले ऐतिहासिक संसद मार्च के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा बचा रहा हूँ।"

याद रहे कि जंतर-मंतर पर छात्र संगठन एआईएसए  के तीन छात्र— नेहा, मनीष और आमीन भी पिछले 22 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर हैं, और उनकी तबीयत पर भी डॉक्टरों की निगरानी बनी हुई है।

20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च; जंतर-मंतर पर सुरक्षा सख्त

सोनम वांगचुक को हटाए जाने के बाद सीजेपी और सहयोगी छात्र संगठनों ने आंदोलन को वापस लेने के बजाय और आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।

  • रणनीति पर अड़े प्रदर्शनकारी: सोमवार, 20 जुलाई को संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो रहा है। सीजेपी ने पहले से ही इस दिन 'चलो संसद' मार्च का एलान कर रखा है।

  • भारी भीड़ जुटने की अपील: सोशल मीडिया और जंतर-मंतर के मंच से लगातार देश भर के युवाओं, छात्रों और नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे सोमवार सुबह भारी संख्या में दिल्ली पहुंचें ताकि सरकार पर परीक्षाओं में पारदर्शिता (जैसे पेपर लीक रोधी कड़े कानून) और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का दबाव बनाया जा सके।

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के नए कमिश्नर की तैनाती के बाद जंतर-मंतर और संसद भवन के आसपास सुरक्षा घेरा बेहद सख्त कर दिया गया है। चप्पे-चप्पे पर बैरिकेडिंग की जा रही है और अतिरिक्त सुरक्षा बलों (पैरामिलिट्री फोर्सेज) को तैनात किया गया है ताकि प्रदर्शनकारियों को संसद की तरफ बढ़ने से रोका जा सके।

बेबाक24 टेक

सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने के पीछे दिल्ली पुलिस और सरकार की सोच शायद यह थी कि मुख्य चेहरे के हटने से आंदोलन बिखर जाएगा। लेकिन अभिजीत दीपके का तुरंत अनशन पर बैठ जाना और छात्रों का जमे रहना यह दिखाता है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति विशेष पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह युवाओं के भीतर के गहरे असंतोष और गुस्से की उपज है।

बेबाक24 का राजनीतिक विश्लेषण कहता है कि भूख हड़ताल के दूसरे दिन अभिजीत दीपके का यह बयान कि वे 'कल के मार्च के लिए ऊर्जा बचा रहे हैं', सरकार के लिए एक साफ चेतावनी है। सोमवार को जब संसद सत्र शुरू होगा, तो अंदर विपक्ष इस मुद्दे पर हंगामा करेगा और बाहर सड़कों पर युवा मार्च करेंगे। सरकार के लिए सबसे बड़ी परीक्षा यह होगी कि वे इस शांतिपूर्ण मार्च को लोकतांत्रिक तरीके से संभालने देते हैं या एक बार फिर बल प्रयोग कर जंतर-मंतर को छावनी में बदलते हैं। दमन जितना तेज होगा, अभिजीत दीपके और इन छात्रों के अनशन को उतनी ही जनसहानुभूति मिलेगी, जो सरकार के लिए आने वाले दिनों में बड़ी मुसीबत बन सकती है।



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