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दिल्ली की सड़कों पर महासंग्राम! सीजेपी के 'चलो संसद' मार्च पर पुलिस का भारी लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले, जेपी नड्डा से वार्ता के लिए पहुंचे प्रवक्ता

by on | 2026-07-20 14:54:05

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दिल्ली की सड़कों पर महासंग्राम! सीजेपी के 'चलो संसद' मार्च पर पुलिस का भारी लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले, जेपी नड्डा से वार्ता के लिए पहुंचे प्रवक्ता

नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन देश की राजधानी युद्ध का मैदान बन गई है। नीट परीक्षा में कथित धांधली, पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर बढ़ रहे हजारों प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं।

अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो और कॉकरोच जनता पार्टी  के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में जब हजारों युवाओं ने संसद की तरफ कूच किया, तो दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने उन्हें रोकने के लिए तगड़ा लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। इस बीच सरकार बैकफुट पर आती दिख रही है और सीजेपी के शीर्ष प्रवक्ताओं को बातचीत का न्योता मिला है।

बैरिकेड्स पर बवाल: लाठीचार्ज और भयंकर गर्मी से कई छात्र बेहोश

सोमवार सुबह करीब 9 बजे जंतर-मंतर पर माहौल बेहद गरमा गया। सीजेपी ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे हर हाल में शांतिपूर्ण संसद मार्च करेंगे। एक्स पर पार्टी ने लिखा— "जोरदार बारिश और भारी सुरक्षा... लेकिन आज कॉकरोच को कोई नहीं रोक पाएगा।"

  • आंसू गैस और भगदड़: जैसे ही प्रदर्शनकारियों का हुजूम संसद की ओर बढ़ा, पुलिस ने 7 फीट ऊंचे और 4 लेयर वाले मल्टी-लेवल बैरिकेड्स पर उन्हें रोक दिया। छात्रों के आगे बढ़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोलों की बौछार कर दी, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

  • बढ़ती मुस्तैदी: समाचार एजेंसी एएनआई के विजुअल्स के मुताबिक, आरएएफ के जवानों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियां भांजी। दिल्ली की भीषण गर्मी और उमस के कारण मार्च के दौरान कई छात्र बेहोश हो गए, जिन्हें एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया।

  • आइसा (AISA) का अनशन समाप्त: इसी बीच पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के तीन सदस्यों (नेहा, आमीन और मनीष) ने विपक्षी नेताओं और कलाकारों की अपील पर अपना अनशन वापस ले लिया है। हालांकि सोनम वांगचुक अभी भी सफदरजंग अस्पताल में अनशन पर अड़े हैं।

सियासी हलचल: जेपी नड्डा से मिलने पहुंचे सीजेपी के प्रवक्ता

सड़कों पर मचे इस कोहराम के बीच एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि सरकार ने सुबह खुद आंदोलनकारियों से संपर्क साधा है।

प्रवक्ता सौरभ दास का बयान: "मैं और आशुतोष रांका, सीजेपी की ओर से केंद्रीय मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने जा रहे हैं। सरकार ने सुबह बातचीत के लिए संपर्क किया था। हमारी मांगें बिल्कुल साफ हैं, और सड़कों पर युवाओं का यह हुजूम हमारे इरादों की गवाही दे रहा है।"

धारा 163 लागू; पुलिस ने कहा— 'यह मार्च पूरी तरह अवैध'

इस पूरे घटनाक्रम पर दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था और संसद सत्र की संप्रभुता को देखते हुए इस मार्च की कोई अनुमति नहीं दी गई थी।

  • अवैध जमावड़ा: पुलिस के अनुसार, नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पूर्ववर्ती IPC की धारा 144) लागू है। इसके तहत जंतर-मंतर के तय स्थान को छोड़कर 5 या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने या मार्च निकालने पर पूर्ण प्रतिबंध है।

  • सुरक्षा घेरा: बीबीसी संवाददाता जुगल पुरोहित की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, जंतर-मंतर की एग्जिट लेन को पूरी तरह सील कर दिया गया था ताकि प्रदर्शनकारी लुटियंस दिल्ली के मुख्य हिस्सों में प्रवेश न कर सकें।

विपक्ष का चौतरफा समर्थन: सिसोदिया, पवन खेड़ा और सपा सांसद मैदान में

शुरुआत में इस छात्र आंदोलन से दूरी बनाने वाली विपक्षी पार्टियां अब खुलकर समर्थन में उतर आई हैं:

  • मनीष सिसोदिया (AAP): दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया रविवार को खुद धरना स्थल पहुंचे और छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि यह मार्च किसी संगठन का नहीं, बल्कि देश के बच्चों को 'शिक्षा माफिया' से आजाद कराने की क्रांति है।

  • पवन खेड़ा (Congress): कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने भी जंतर-मंतर का दौरा किया। उन्होंने सरकार को 'राजधर्म' की याद दिलाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। हालांकि, कांग्रेस के किसी शीर्ष नेता ने मार्च में सीधे हिस्सा नहीं लिया।

  • समाजवादी पार्टी (SP): सपा सांसद प्रिया सरोज, राजीव राय और इकरा हसन ने भी मंच से प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और साफ किया कि अखिलेश यादव की पूरी पार्टी इस आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी है।

बेबाक24 टेक

संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन देश के भविष्य यानी छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़ना और लाठियां बरसाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के मुंह पर एक बड़ा तमाचा है। 23 दिनों से सोनम वांगचुक अस्पताल में लड़ रहे हैं, छात्र सड़कों पर बेहोश हो रहे हैं, लेकिन सरकार को जगाने के लिए इतने बड़े बवाल की जरूरत पड़ी।

बेबाक24 का राजनीतिक विश्लेषण कहता है कि सीजेपी प्रवक्ताओं को जेपी नड्डा द्वारा बातचीत के लिए बुलाना यह साफ संकेत देता है कि सरकार सड़कों पर छात्रों के इस भारी आक्रोश और संसद के भीतर विपक्ष के संभावित हंगामे से डरी हुई है। नीट पेपर लीक कोई छोटा मुद्दा नहीं है, इसने देश के करोड़ों परिवारों को प्रभावित किया है। अब देखना यह होगा कि जेपी नड्डा के साथ होने वाली इस बैठक में क्या सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या शिक्षा व्यवस्था में किसी बड़े अमूल-चूल परिवर्तन पर राजी होती है, या फिर यह बैठक भी महज एक 'टाइम-बायिंग' कूटनीति का हिस्सा बनकर रह जाएगी।



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