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अनशन के 23वें दिन अस्पताल के 'पहरे' से सोनम वांगचुक का बड़ा एलान! अनशन खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें, हाई कोर्ट से लगा झटका

by on | 2026-07-20 14:45:26

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अनशन के 23वें दिन अस्पताल के 'पहरे' से सोनम वांगचुक का बड़ा एलान! अनशन खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें, हाई कोर्ट से लगा झटका

नई दिल्ली | नीट पेपर लीक कांड और देश की चरमराती शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ जंतर-मंतर से लेकर सफदरजंग अस्पताल तक आमरण अनशन पर बैठे प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन का आज 23वां दिन है। अस्पताल के भीतर भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच 'अवैध हिरासत' का सामना कर रहे वांगचुक ने सोमवार सुबह अपने एक्स हैंडल से हाथ से लिखा एक बेहद भावुक और रणनीतिक संदेश जारी किया है।

इस संदेश में उन्होंने साफ कर दिया है कि वे किन परिस्थितियों और 3 शर्तों के पूरा होने पर अपना यह अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं। दूसरी तरफ, दिल्ली हाई कोर्ट से उन्हें तुरंत अस्पताल से छुट्टी मिलने के मामले में कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है।


अस्पताल के बेड से वांगचुक का खत: ये हैं वो 3 शर्तें

सफदरजंग अस्पताल के भीतर अपनी आवाजाही, अभिव्यक्ति और संचार (Communication) पर लगी पाबंदियों के बीच सोनम वांगचुक ने 19 जुलाई की तारीख वाला एक पत्र जारी किया। उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए लिखा:

सोनम वांगचुक की चिट्ठी के मुख्य अंश: "प्रिय मित्रों और समर्थकों, आप में से कई लोग पूछ रहे हैं कि मैं अपना अनशन कब समाप्त करूंगा? जैसा कि मैंने पहले भी कहा था, मैं 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर दूंगा, यदि..."

- सरकार जिम्मेदारी स्वीकार करे:शर्त नंबर 1.
केंद्र सरकार हाल के दिनों में देश की शिक्षा व्यवस्था में हुई ऐतिहासिक विफलताओं, विशेष रूप से नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक (Paper Leak) की घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी आधिकारिक रूप से स्वीकार करे।
- सांसदों और विपक्षी नेताओं का लिखित आश्वासन:शर्त नंबर 2.
यदि विभिन्न राजनीतिक दलों के संसद सदस्य और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता संसद पहुंचते हैं और यह ठोस आश्वासन देते हैं कि वे इस पूरे छात्र आंदोलन और पेपर लीक के मुद्दे को संसद के मॉनसून सत्र में प्रमुखता से उठाएंगे
- अस्पताल में आकर मिले आश्वासन:शर्त नंबर 3.
यदि लगातार गिरते स्वास्थ्य या अन्य अपरिहार्य कारणों से मेरे लिए अनशन जारी रखना संभव नहीं रहता है, तो भी मैं अनशन तभी तोडूंगा जब देश के विभिन्न दलों के सांसद और वरिष्ठ नेता अस्पताल आकर मुझे सदन के भीतर इस लड़ाई को लड़ने का भरोसा देंगे।

सड़क पर संग्राम: सीजेपी का 'संसद मार्च' और पुलिस का पहरा

सोनम वांगचुक के इस संदेश के बीच दिल्ली की सड़कों पर माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और देश में छात्रों की आत्महत्याओं के खिलाफ आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को 'संसद मार्च' का आह्वान किया है।

  • तनावपूर्ण हालात: सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने समर्थकों से पूरी रात जंतर-मंतर पर डटे रहने की अपील की थी, जिसके बाद वहां सैकड़ों छात्र और प्रदर्शनकारी जमा हैं।

  • पुलिस की पाबंदी: दिल्ली पुलिस ने इस संसद मार्च को सुरक्षा कारणों का हवाला देकर अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है, जिसके चलते जंतर-मंतर के चारों तरफ बैरिकेडिंग कर इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। हालांकि सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास का दावा है कि बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन्हें बातचीत के लिए आमंत्रित किया है।

हाई कोर्ट का रुख: 'हर जीवन मूल्यवान, पर अंतिम फैसला मेडिकल बोर्ड करेगा'

इससे पहले रविवार तड़के सुबह 4 बजे सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने सफदरजंग अस्पताल की बदइंतजामी और वांगचुक की अवैध नजरबंदी के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने रविवार को ही इस पर तुरंत सुनवाई की, लेकिन वांगचुक को तत्काल कोई राहत नहीं मिल सकी:

  • अदालत की टिप्पणी: दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि "देश के हर नागरिक का जीवन मूल्यवान है।"

  • अंतरिम आदेश से इनकार: कोर्ट ने साफ किया कि वह वांगचुक को अस्पताल से तुरंत छुट्टी देने या शिफ्ट करने का कोई अंतरिम आदेश (Interim Order) अभी जारी नहीं करेगा। इसका फैसला पूरी तरह सफदरजंग अस्पताल के 'मेडिकल बोर्ड' की आधिकारिक रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।

  • अगली सुनवाई 24 जुलाई: हाई कोर्ट ने प्रशासन को तीन दिनों के भीतर इस पूरे मामले पर अपनी 'स्टेटस रिपोर्ट' दाखिल करने का आदेश दिया है। इसका मतलब यह है कि कानूनी तौर पर वांगचुक को कम से कम अगले तीन दिनों तक सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों की निगरानी (और पुलिस के पहरे) में ही रहना होगा।

बेबाक24 टेक

23 दिनों से देश के युवाओं के भविष्य के लिए भूखे बैठे एक पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता को दिल्ली हाई कोर्ट से तत्काल राहत न मिलना निराशाजनक जरूर है, लेकिन कानूनी रूप से अदालत का मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर निर्भर रहना उसकी स्थापित प्रक्रिया का हिस्सा है। असली सवाल यह है कि सरकार और पुलिस आखिर सोनम वांगचुक के विचारों से इतनी डरी हुई क्यों है? जंतर-मंतर से उन्हें आधी रात को उठाना और फिर अस्पताल को ही एक 'अवैध जेल' में तब्दील कर देना यह दिखाता है कि सत्ता के पास छात्रों के जायज सवालों का कोई जवाब नहीं है।

बेबाक24 का राजनीतिक विश्लेषण कहता है कि आज (20 जुलाई) से संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो रहा है। वांगचुक ने बहुत ही चतुराई से गेंद अब देश के विपक्ष और सांसदों के पाले में डाल दी है। उनकी शर्तें बिल्कुल स्पष्ट हैं— वे अपनी जान की बाजी लगाने को तैयार हैं, बशर्ते संसद के भीतर देश के प्रतिनिधि पेपर लीक पर सरकार को घुटनों पर लाने का माद्दा दिखाएं। अब यह कांग्रेस, सपा, टीएमसी और सीजेपी जैसे दलों के सांसदों की जिम्मेदारी है कि वे सफदरजंग अस्पताल जाकर वांगचुक को आश्वस्त करें, ताकि एक सच्चे देशभक्त की जान भी बच सके और देश के करोड़ों छात्रों की आवाज देश की सबसे बड़ी पंचायत में गूंज सके।



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