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14 जून को दिल्ली में महामंथन: बागी TMC सांसदों से मिलेंगे CM शुभेंदु

by admin@bebak24.com on | 2026-06-12 20:49:21

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14 जून को दिल्ली में महामंथन: बागी TMC सांसदों से मिलेंगे CM शुभेंदु

नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर लगी बगावत की आग अब पूरी तरह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को अपनी लपेट में लेने जा रही है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी रविवार (14 जून) को दिल्ली आ रहे हैं। उनका यह दौरा बंगाल और देश की सियासत के लिए बेहद निर्णायक माना जा रहा है, क्योंकि दिल्ली पहुंचते ही वे टीएमसी के बागी लोकसभा सांसदों के साथ एक हाई-प्रोफाइल बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

इस महामंथन की पुष्टि खुद टीएमसी के बागी सांसद जगदीश बसुनिया ने की है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शुभेंदु अधिकारी से हरी झंडी मिलने के ठीक बाद यह बागी गुट लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला से मुलाकात कर अपनी ताकत का आधिकारिक प्रदर्शन करेगा।

बसुनिया की पुष्टि: "ममता दीदी का फोन नहीं आया, अब आर-पार की लड़ाई"

राजनीतिक गलियारों में मचे हड़कंप के बीच बागी सांसद जगदीश बसुनिया ने साफ कर दिया है कि सुलह-समझौते का वक्त अब निकल चुका है। बागी गुट के मुताबिक, इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बाद भी पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी की तरफ से नाराजगी दूर करने के लिए उनके पास कोई फोन या संदेश नहीं आया है। इस उपेक्षा से नाराज बागी धड़ा अब पीछे हटने को तैयार नहीं है। रविवार को शुभेंदु अधिकारी के साथ होने वाली बैठक में इस बात की अंतिम रूपरेखा (Blueprint) तैयार की जाएगी कि लोकसभा अध्यक्ष के सामने किस तरह अपना दावा पेश करना है।

क्या है बीजेपी की सोची-समझी कूटनीति?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के भीतर मचे इस घमासान के पीछे भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एक बहुत बड़ी और सधी हुई रणनीति काम कर रही है:

  • लोकसभा में ममता का रसूख खत्म करना: पश्चिम बंगाल में अपनी सरकार बनाने के बाद भाजपा का अगला लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर ममता बनर्जी के कूटनीतिक रसूख को जमींदोज करना है।

  • केंद्र की ताकत बढ़ाना: यदि टीएमसी के 20 बागी सांसद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पाले में आ जाते हैं, तो इससे लोकसभा में केंद्र सरकार का संख्या बल और मजबूत हो जाएगा।

  • शुभेंदु खुद संभाल रहे कमान: यही वजह है कि खुद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी दिल्ली आकर इन बागी सांसदों के साथ सीधे संवाद कर रहे हैं, ताकि किसी भी कानूनी अड़चन (जैसे दलबदल विरोधी कानून) से बचने का रास्ता साफ किया जा सके।

ढहते ताश के पत्तों जैसी हुई टीएमसी की हालत

ममता बनर्जी के 28 साल के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब पार्टी चारों तरफ से घिर चुकी है और नेतृत्व पूरी तरह बेबस नजर आ रहा है:

  1. राज्य में झटका: पश्चिम बंगाल विधानसभा में पहले ही करीब 60 विधायकों ने बगावत का झंडा बुलंद करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुन लिया है।

  2. केंद्र में संकट: अब दिल्ली में पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों के बागी हो जाने से संसद के भीतर भी टीएमसी आधिकारिक विभाजन (Split) की कगार पर है। सायोनी घोष, यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बड़े चेहरों की भूमिका को लेकर भी अटकलें तेज हैं।

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यह मुकाबला अब सिर्फ बगावत का नहीं, बल्कि अस्तित्व की जंग बन चुका है। 14 जून को दिल्ली में शुभेंदु अधिकारी और बागी सांसदों की यह मुलाकात वास्तव में टीएमसी के संसदीय दल के भविष्य का फैसला करेगी।

तकनीकी रूप से, यदि जगदीश बसुनिया समेत 20 सांसद एकजुट होकर लोकसभा अध्यक्ष के सामने परेड करते हैं, तो दलबदल विरोधी कानून के तहत दो-तिहाई की कानूनी सीमा पार हो जाएगी और ममता बनर्जी लोकसभा में अपने आधिकारिक दल का दर्जा खो देंगी। शुभेंदु अधिकारी की रणनीति साफ है— बंगाल जीतने के बाद अब दिल्ली के गलियारों से ममता बनर्जी के राष्ट्रीय और प्रादेशिक राजनीतिक प्रभाव को पूरी तरह उखाड़ फेंकना। रविवार का दिन भारतीय लोकतंत्र के संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय लिख सकता है।



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