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चुनाव आयोग के बाहर धरने पर बैठी कांग्रेस, जयराम रमेश का आरोप

by admin@bebak24.com on | 2026-06-09 20:47:35

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 चुनाव आयोग के बाहर धरने पर बैठी कांग्रेस, जयराम रमेश का आरोप

नई दिल्ली/भोपाल | मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद अब इस सियासी जंग का केंद्र भोपाल से बदलकर देश की राजधानी दिल्ली हो गया है। इस फैसले के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने निर्वाचन आयोग पहुंचे कांग्रेस के शीर्ष प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के भीतर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए दफ्तर के बाहर ही धरना शुरू कर दिया।

कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की अगुवाई में कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

"35 साल के संसदीय करियर में ऐसा कभी नहीं देखा" — जयराम रमेश

चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने आयोग पर पक्षपात और तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा:

  • अंदर जाने से रोका: कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल केवल अपनी कानूनी याचिका सौंपने आया था, लेकिन उन्हें मुख्य परिसर में जाने से रोक दिया गया।

  • वेटिंग रूम तक की अनुमति नहीं: जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेताओं को निर्वाचन आयोग के प्रतीक्षा कक्ष (Waiting Room) में बैठने तक की इजाजत नहीं दी गई।

  • अपमानजनक व्यवहार: उन्होंने कहा, "मैं पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से सांसद (MP) हूँ, लेकिन मुझे और हमारे डेलिगेशन को 10 मिनट से ज्यादा समय तक बाहर इंतजार कराया गया। अपने पूरे राजनीतिक जीवन में मैंने चुनाव आयोग का ऐसा अनुचित और तानाशाही व्यवहार पहले कभी नहीं देखा।"

समझिए क्या है वो हैदराबाद कोर्ट का मामला, जिस पर फंसा पेंच

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के पीछे हैदराबाद की एक अदालत में लंबित जिस मामले का जिक्र किया जा रहा था, उसका पूरा विवरण भी अब सामने आ गया है:

  • शिकायतकर्ता और आरोपी: हैदराबाद की 'फोर्थ एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट' अदालत में वहां की स्थानीय कॉरपोरेटर ए. श्रीलता ने एक परिवाद (निजी शिकायत) दायर कर रखा है। इसमें मुख्य आरोपी शिव कुमार रेड्डी नामक व्यक्ति है।

  • नटराजन पर आरोप: शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिव कुमार रेड्डी ने उनके साथ छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार किया था, और कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने उस आरोपी को राजनीतिक व व्यक्तिगत संरक्षण (Protection) दिया।

  • कानूनी धाराएं: इस शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 (मानहानि/महिला की गरिमा को ठेस), 61 (आपराधिक साजिश), 45, 46, 351(2), 3(5) और 79 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

इसी मामले में अदालत की तरफ से जारी नोटिस की जानकारी मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे (Affidavit) में नहीं दी थी, जिसे भाजपा ने मुख्य हथियार बनाकर उनका नामांकन खारिज करवा दिया।

Bebak24 टेक

मीनाक्षी नटराजन मामले ने अब एक बड़े राष्ट्रीय और संवैधानिक विवाद का रूप ले लिया है। कांग्रेस का चुनाव आयोग के दरवाजे पर धरने पर बैठना यह साफ करता है कि पार्टी इस मामले को इतनी आसानी से हाथ से जाने नहीं देना चाहती। तकनीकी रूप से देखें तो हलफनामे में जानकारी छिपाना एक गंभीर कानूनी चूक है, लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि आयोग विपक्ष की बात सुनने तक को तैयार नहीं है।

हैदराबाद कोर्ट के जिस मामले (छेड़छाड़ के आरोपी को संरक्षण देने) के कारण यह नामांकन रद्द हुआ है, वह राजनीतिक रूप से भी कांग्रेस के लिए असहज करने वाला है। दिल्ली में चुनाव आयोग के बाहर बैठी कांग्रेस और आक्रामक रुख अपना चुकी भाजपा के बीच की यह रार आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंच सकती है।



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