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पेपर लीक के नाम पर देश को ठगने वाला 'टेलीग्राम किंग' चढ़ा STF के हत्थे, बिहार से लखनऊ तक हड़कंप!

by on | 2026-06-07 09:09:17

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पेपर लीक के नाम पर देश को ठगने वाला 'टेलीग्राम किंग' चढ़ा STF के हत्थे, बिहार से लखनऊ तक हड़कंप!

लखनऊ। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले और 'पेपर लीक' का झूठा ढिंढोरा पीटकर देशभर के परीक्षार्थियों की जेब पर डाका डालने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक ऐसी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसने सोशल मीडिया पर चल रहे ठगी के एक बहुत बड़े मकड़जाल को नेस्तनाबूत कर दिया। STF ने इस पूरे फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड और गैंग के सरगना को धर दबोचा है।

​ पटना का 'शातिर ओम' और टेलीग्राम का मायाजाल

​गिरफ्तार किए गए इस ठग की पहचान ओम कुमार के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पंडारक, पटना (बिहार) का रहने वाला है। यह शातिर अपराधी कोई छोटा-मोटा चोर नहीं, बल्कि एक पूरा डिजिटल साम्राज्य चला रहा था।

ठगी का पूरा 'मोडस ऑपेरंडी' (काम करने का तरीका) समझिए:

  • फर्जी टेलीग्राम चैनल्स: आरोपी @Gauravsirofficials और @Youandmooon जैसे भारी-भरकम और विश्वसनीय दिखने वाले नामों से टेलीग्राम पर चैनल चलाता था।
  • अंधाधुंध शिकार: उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के मासूम और तनावग्रस्त परीक्षार्थी इसके निशाने पर होते थे।
  • 'एक रात पहले' वाला झांसा: परीक्षा से ठीक एक दिन पहले यह दावा करता था कि उसके पास असली प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका (आंसर की) मौजूद है।
  • QR कोड से वसूली: झांसे में आए छात्रों को QR कोड भेजकर 2 से 3 हजार रुपये की 'छोटी रकम' ऑनलाइन ट्रांसफर करवाई जाती थी।
  • काम खत्म, चैनल बंद: जैसे ही परीक्षा खत्म होती, यह शातिर उस टेलीग्राम चैनल को डिलीट कर देता और नए नाम से नया जाल बिछा लेता था।
  • चोरी की चालाकी: आरोपी बेहद शातिर था। वह जानबूझकर 2 से 3 हजार रुपये जैसी छोटी रकम मांगता था, ताकि अगर छात्र ठगा भी जाए, तो वह इतनी छोटी रकम के लिए बदनामी या कानूनी पचड़े के डर से पुलिस के पास न जाए। इसी बात का फायदा उठाकर यह गिरोह साल 2022 से करोड़ों की ठगी को अंजाम दे रहा था।


    ​ UP CNET परीक्षा से खुला पाप का घड़ा

    ​इस महाठग के बुरे दिन तब शुरू हुए जब अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित UP CNET परीक्षा के नाम पर ठगी की शिकायत STF तक पहुंची। इसके बाद STF की साइबर और टेक्निकल विंग ने जाल बिछाया। कड़ियों को जोड़ते हुए और डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा करते हुए STF ने आखिरकार आरोपी ओम कुमार को लखनऊ लाकर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

    ​ क्या-क्या हुआ बरामद?

    ​गिरफ्तारी के वक्त STF ने आरोपी के पास से डिजिटल ठगी के मुख्य हथियार यानी दो मोबाइल फोन और दो पहचान पत्र (दस्तावेज) बरामद किए हैं। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस नेटवर्क में बिहार और यूपी के और कौन-से सफेदपोश या अपराधी शामिल हैं।



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