by admin@bebak24.com on | 2026-06-04 20:23:23
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कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद सूबे के स्थानीय निकायों में मची भगदड़ थमने का नाम नहीं ले रही है। कोलकाता नगर निगम के मेयर फिरहाद हकीम के सनसनीखेज इस्तीफे के ठीक एक दिन बाद, गुरुवार को बिधाननगर नगर निगम की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
इस बैक-टू-बैक इस्तीफे के बाद तृणमूल कांग्रेस ने कोलकाता और साल्ट लेक (बिधाननगर) जैसे राज्य के दोनों सबसे महत्वपूर्ण और रसूखदार नगर निगमों से अपना नियंत्रण पूरी तरह खो दिया है।
इस्तीफे और प्रशासनिक संकट के मुख्य बिंदु
- प्रशासनिक गतिरोध: कृष्णा चक्रवर्ती ने बिधाननगर नगर निगम के कमिश्नर को अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप दिया। इसकी एक प्रति राज्य की नवनियुक्त शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल और विभाग के सचिव को भी भेजी गई है।
- इस्तीफे की वजह: मीडिया से बात करते हुए पूर्व मेयर का प्रशासनिक दर्द छलक आया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद बोर्ड की बैठकें नहीं हो रही थीं, पार्षद नहीं आ रहे थे और प्रशासनिक अधिकारी भी सहयोग नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा, "ऐसी स्थिति में बैठकर मैं जनता को धोखा नहीं दे सकती।"
- कार्यकाल और भविष्य: कृष्णा चक्रवर्ती का कार्यकाल अभी करीब आठ महीने का बचा हुआ था। वह 2019 से लगातार बिधाननगर की मेयर थीं, लेकिन अब उन्होंने केवल एक साधारण पार्षद के रूप में काम करने की बात कही है।
टीएमसी के हाथ से निकले प्रमुख नगर निकाय
राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही टीएमसी के जनप्रतिनिधियों और मेयरों के इस्तीफों की झड़ी लगी हुई है:
भाजपा का तीखा पलटवार
कृष्णा चक्रवर्ती के इस कदम के बाद बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है। बिधाननगर से भाजपा विधायक और राज्य सरकार में मंत्री शरद्वत मुखर्जी ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि वह भारी वित्तीय अनियमितताओं और पैसों की गद्दी पर बैठी थीं। भाजपा मंत्री ने दावा किया कि उन्हें बिधाननगर में मेयर की 18-19 अवैध संपत्तियों के बारे में पता चला है और इस बड़े खुलासे के डर से वह शर्म के मारे इस्तीफा देकर छिप रही हैं।
बेबाक टिप्पणी
पश्चिम बंगाल की शहरी राजनीति में फिरहाद हकीम और कृष्णा चक्रवर्ती जैसे कद्दावर मेयरों का इस्तीफा देना यह साफ संकेत देता है कि राज्य की सत्ता हाथ से जाने के बाद नगर निगमों के भीतर तृणमूल कांग्रेस का किला पूरी तरह ढह चुका है। स्थानीय निकायों में नौकरशाही (Bureaucracy) का रवैया हमेशा सत्ताधारी दल के अनुकूल होता है, और नई भाजपा सरकार के आते ही अधिकारियों का असहयोग यह दर्शाता है कि अब प्रशासनिक तंत्र पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की पकड़ मजबूत हो चुकी है।
टीएमसी के लिए यह बेहद आत्मघाती स्थिति है, क्योंकि जिन शहरी और पॉश इलाकों (जैसे कोलकाता और साल्ट लेक) को ममता बनर्जी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, वहां जांच के डर और आपसी अंतर्कलह के कारण उनके सबसे भरोसेमंद सिपहसालार मैदान छोड़कर भाग रहे हैं। आने वाले दिनों में इन निगमों पर भाजपा का प्रशासनिक कब्जा होना लगभग तय है।
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