by on | 2026-05-29 11:44:44
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वाराणसी। बनारस कमिश्नरेट पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, परिणामोन्मुख और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रशासनिक कदम उठाया गया है। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब जनपद के सभी थानों में तैनात उपनिरीक्षकों (दरोगाओं) के कार्यों की समीक्षा विशुद्ध रूप से एक सांख्यिकीय मार्किंग प्रणाली (मूल्यांकन मॉडल) के आधार पर की जाएगी। इस प्रणाली से तैयार होने वाली मेरिट और रैंकिंग के आधार पर ही योग्य अधिकारियों को चौकी प्रभारी के रूप में प्राथमिकता दी जाएगी।
यह निर्णय पुलिस आयुक्त द्वारा गुरुवार को थाना रोहनिया के निरीक्षण तथा सर्किल रोहनिया के अंतर्गत आने वाले थानों—लोहता और मंडुवाडीह—के अर्दली रूम के दौरान कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की गहन समीक्षा के बाद लिया गया है।
वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन: 100 अंकों की नई मार्किंग नीति
कार्यप्रणाली में व्यक्तिगत पूर्वाग्रह को समाप्त करने के उद्देश्य से एक स्पष्ट 100 अंकों का पैमाना निर्धारित किया गया है। अधिकारियों के प्रदर्शन का आकलन निम्नलिखित मानकों के आधार पर होगा:
25 अंक: कानूनी मुकदमों (विवेचनाओं) का 60 दिनों के भीतर वैधानिक निस्तारण करने पर।
25 अंक: आम जनता से प्राप्त प्रार्थना पत्रों का समयबद्ध और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करने पर।
10 अंक: गैर-जमानती वारंट (NBW) के निष्पादन और वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी पर।
10 अंक: बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के विरुद्ध सीज करने की दंडात्मक कार्रवाई पर।
10 अंक: यातायात नियमों का उल्लंघन कर गलत दिशा (रॉन्ग साइड) में वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई करने पर।
20 अंक: मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध खनन, जुआ, सट्टा और वेश्यावृत्ति जैसे संगठित अपराधों के समूल नाश हेतु की गई प्रभावी कार्रवाइयों पर।
गंभीर विश्लेषण: इस प्रकार का गणितीय मूल्यांकन पुलिस तंत्र में अकर्मण्यता को समाप्त करने और अधिकारियों के बीच स्वस्थ व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह प्रशासनिक व्यवस्था को 'सिफारिश' के बजाय 'योग्यता' की ओर अग्रसर करती है।
रणनीतिक पुलिसिंग: दृश्यता और सुरक्षा व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण
सड़कों पर पुलिस की दृश्यता (विजिबिलिटी) बढ़ाकर अपराध नियंत्रण और यातायात प्रबंधन को सुचारू करने के लिए जनशक्ति का पुनर्वितरण किया गया है:
दिवाकालीन गश्त: थानों में उपलब्ध कुल पुलिस बल का 50 प्रतिशत हिस्सा दिन के समय प्रमुख चौराहों, संवेदनशील और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से तैनात रहेगा।
रात्रिकालीन गश्त: रात्रि सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए ग्रामीण अंचलों में 25 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 20 प्रतिशत पुलिस बल निरंतर सक्रिय गश्त पर रहेगा। इन निर्देशों के अनुपालन की पुष्टि के लिए स्वयं पुलिस आयुक्त द्वारा आकस्मिक और औचक निरीक्षण किए जाएंगे।
आधुनिकीकरण और तकनीकी प्रशिक्षण पर विशेष बल
पारंपरिक पुलिसिंग से इतर, भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक आधारित दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जा रही है:
प्रत्येक आपराधिक मामले में शत-प्रतिशत यूनिक SID (स्टेट इन्वेस्टिगेशन डेटा) का सृजन अनिवार्य किया गया है ताकि डेटा प्रबंधन पारदर्शी रहे।
60 दिनों से अधिक समय तक किसी भी विवेचना को लंबित रखने पर पूर्णतः रोक लगा दी गई है।
विभाग में शामिल हुए नव-नियुक्त आरक्षियों को आधुनिक साक्ष्य संकलन विधियों जैसे—CCTNS, CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) एनालिसिस, सीसीटीवी फुटेज परीक्षण, डीवीआर संचालन, ई-साक्ष्य और ई-समन प्रणाली का गहन तकनीकी प्रशिक्षण दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
उच्च स्तरीय निरीक्षण और समीक्षा के दौरान अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) आलोक प्रियदर्शी, पुलिस उपायुक्त (वरुणा) प्रमोद कुमार सहित संबंधित सहायक पुलिस आयुक्त और थाना प्रभारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
निष्कर्ष:
वाराणसी कमिश्नरेट का यह कदम पुलिस सुधारों की दिशा में एक अनुकरणीय प्रयास है। किसी भी नीति की सफलता उसके क्रियान्वयन की शुद्धता पर निर्भर करती है। यदि इस 100 अंकों के मॉडल को बिना किसी प्रशासनिक शिथिलता और पूर्ण निष्पक्षता के साथ धरातल पर उतारा गया, तो यह न केवल अपराधियों में भय पैदा करेगा, बल्कि आम नागरिक का कानून के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ करेगा।
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