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अजय राय: पूर्वांचल की रक्तिम गलियों से निकलकर 'अजेय योद्धा' बनने की महागाथा!

by on | 2026-05-29 01:41:46

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अजय राय: पूर्वांचल की रक्तिम गलियों से निकलकर 'अजेय योद्धा' बनने की महागाथा!


सन्तोष राय
वाराणसी।

बनारस की सुबह जितनी आध्यात्मिक है, उसकी रातें उतनी ही सियासी और रक्तिम भी रही हैं। लेकिन इतिहास हमेशा विजेताओं का लिखा जाता है और वर्तमान गवाह है उस योद्धा का, जिसने वक्त के हर थपेड़े को सहा, अपनों को खोया, साजिशों के चक्रव्यूह झेले, मगर कभी घुटने नहीं टेके। आज बात उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय की, जिन्हें विरोधियों ने चौतरफा घेरने की कोशिश की, लेकिन वे हर घेरेबंदी को तोड़कर आज सूबे की सियासत में 'अजेय' बनकर खड़े हैं।

​गाजीपुर की माटी, काशी का लहू और भाई की शहादत का प्रतिशोध

​मूल रूप से गाजीपुर के मलसा गांव का वह परिवार जो कई पीढ़ियों से काशी के लहुराबीर में बसा हुआ है, उसकी कहानी केवल सत्ता की कहानी नहीं है, वह आत्मसम्मान और अस्तित्व की लड़ाई है।

​अजय राय की जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब उनके बड़े भाई अवधेश राय की उनके ही घर के गेट पर सरेआम निर्मम हत्या कर दी गई। नाम आया उस दौर के सबसे खूंखार और सत्ता संरक्षित 'मुख्तार अंसारी गैंग' का। भाई के खून से सनी बनारस की उस माटी ने अजय राय को 'लाइफलाइन' में ला खड़ा किया। एक तरफ भाई की मौत का गहरा सदमा था और दूसरी तरफ पूर्वांचल का सबसे बड़ा माफिया तंत्र। अजय राय डरे नहीं, वे पीछे नहीं हटे; उन्होंने मुख्तार अंसारी के उस खौफनाक साम्राज्य के खिलाफ अकेले जंग का ऐलान कर दिया और आखिरी दम तक अदालती लड़ाई लड़कर माफिया को अंजाम तक पहुंचाया।

​कम्युनिस्टों के 'लाल गढ़' में खिलाया कमल, सोनेलाल की भी नहीं गलने दी दाल

​सियासत की बिसात पर अजय राय ने जब कदम रखा, तो उन्होंने अपनी ताकत का लोहा मनवाया। वाराणसी का 'कोलसला' विधानसभा क्षेत्र, जिसे कम्युनिस्टों का अभेद्य लाल गढ़ माना जाता था और जहाँ उदल पटेल का लाल झंडा लहराता था, अजय राय ने भाजपा के बैनर तले उस गढ़ को उखाड़ फेंका।

​यही नहीं, अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल जैसे कद्दावर नेता लंबे समय तक अजय राय के सामने चुनाव लड़ते रहे, लेकिन अजय राय की जमीनी पकड़ के आगे उनकी एक न गली। डॉ. अवधेश सिंह भी 'मुहम्मद गोरी' की तरह बार-बार मैदान में लड़ते रहे, लेकिन जब तक अजय राय बीजेपी में रहे, विजय का सेहरा उन्हीं के सिर बंधा। बाद में परिस्थितियां बदलीं और अजय राय ने कांग्रेस का दामन थाम लिया।

​मोदी से तीन-तीन बार टकराने वाला 'बनारसी अक्खड़पन'

​अजय राय की शख्सियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहाँ बड़े-बड़े सूरमा मैदान छोड़ देते हैं, वहां यह नेता देश के सबसे ताकतवर शख्स और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक, दो नहीं बल्कि तीन-तीन बार लोकसभा चुनाव में ताल ठोक कर खड़ा रहा। यह हार-जीत से परे, बनारस के उसी अक्खड़पन और जीवटता का प्रमाण है जो अजय राय की रगों में दौड़ता है।

​बेबुनियाद आरोपों और 'टाडा' के चक्रव्यूह से बेदाग निकले अजय राय

​विरोधी अक्सर इतिहास के पन्ने पलटकर 1991 के उस दौर का जिक्र करते हैं, जब तत्कालीन डिप्टी मेयर अनिल सिंह पर हुए हमले में अजय राय का नाम घसीटा गया था। उन पर टाडा (TADA) जैसा कठोर कानून लगाया गया, महीनों सलाखों के पीछे रखा गया। लेकिन ' बेबाक 24' आपको सच बताता है— वह दौर पूर्वांचल में राजनीतिक वर्चस्व और गुटीय टकराव का था, जहाँ उभरते हुए कद्दावर युवा नेताओं को कुचलने के लिए मुकदमों का सहारा लिया जाता था।

​अदालतों ने, गवाहों ने और खुद वक्त ने यह साबित किया कि अजय राय पर लगाए गए वो आरोप बेबुनियाद थे। वे कोर्ट से पूरी तरह बरी (Acquit) हुए और उनके दामन पर लगा हर दाग धुलकर साफ हो गया।

​भूमिहार समाज के निर्विवाद नेता, अब यूपी में बीजेपी का खेल बिगाड़ने को आमादा!

"अजय राय केवल एक राजनेता नहीं हैं, वे भूमिहार-ब्राह्मण समाज के एक ऐसे चेहरे हैं जिनकी अपनी बिरादरी और सर्वसमाज में जबरदस्त 'फैन फॉलोइंग' है। बनारस से लेकर लखनऊ तक, उनकी एक आवाज पर कार्यकर्ता सड़कों पर उतरने को तैयार रहते हैं।"

​जब कांग्रेस आलाकमान ने उत्तर प्रदेश जैसे जटिल राज्य की कमान अजय राय को सौंपी, तो उन्होंने एयरकंडीशंड कमरों में बैठने के बजाय 'सड़क पर संघर्ष' का रास्ता चुना। आज वे यूपी के कोने-कोने में जाकर जनता की आवाज उठा रहे हैं।

​जिस तरह वे कभी माफियाओं के सामने नहीं झुके, उसी तेवर के साथ आज वे सत्ताधारी दल भाजपा की नीतियों के खिलाफ मजबूती से डटे हुए हैं। पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश के सियासी समीकरण गवाही दे रहे हैं कि अपनी जमीनी पकड़ और जुझारू तेवरों के दम पर अजय राय आगामी चुनावों में बीजेपी का खेल पूरी तरह खराब करने का माद्दा रखते हैं।

​घेराबंदी चाहे जितनी हुई हो, राहें चाहे जितनी रक्तिम रही हों, लेकिन गाजीपुर की माटी और काशी के संस्कार वाले इस नेता ने साबित कर दिया है कि वह पथ पर हमेशा अडिग रहेगा।



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