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सन्दहां में गरीबों पर चला चाबुक, लेकिन 'डुबूकिया' के बालू सिंडिकेट को छूने में कांप रहे हाथ?

by on | 2026-05-28 22:26:51

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सन्दहां में गरीबों पर चला चाबुक, लेकिन 'डुबूकिया' के बालू सिंडिकेट को छूने में कांप रहे हाथ?


वाराणसी। सन्दहां रिंग रोड पर बुधवार को जिला प्रशासन ने पूरे तामझाम के साथ 'बुलडोजर एक्शन' का ढिंढोरा तो पीट दिया, लेकिन इस तथाकथित बड़ी कार्रवाई के पीछे का सच कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के आदेश पर एसडीएम सदर नितिन सिंह, खनन अधिकारी प्रशांत शर्मा और भारी पुलिस बल ने मिलकर 68 गाड़ियां (46 ट्रैक्टर और 22 ट्रक) सीज तो कर दीं, लेकिन सवाल यह है कि प्रशासन की नजर हमेशा इन 'छुटभैयों' पर ही क्यों इनायत होती है?

​'बेबाक 24' की ग्राउंड रिपोर्ट में जो सच सामने आया है, वह इस पूरी कार्रवाई की टाइमिंग और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

​पेट पर लात: रोज कमाने-खाने वालों पर 'सिंघम' बने अफसर

​प्रशासन जिसे 'अवैध बालू मंडी' कहकर अपनी पीठ थपथपा रहा है, असल में वह सैकड़ों गरीब परिवारों के चूल्हे-चाकी का जरिया थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां रोज कुआं खोदकर रोज पानी पीने वाले मजदूर और छोटे ट्रैक्टर वाले अपनी रोजी-रोटी कमाते थे। प्रशासन ने इन पर कार्रवाई करके वाहवाही तो लूट ली, लेकिन इनके पेट पर जो लात पड़ी है, उसका हिसाब कौन देगा?

​डुबूकिया में गरज रहा असली माफिया, वहां जाने में क्यों फूलती है सांस?

​सन्दहां में कार्रवाई करने वाले अधिकारियों मे— अगर इतनी ही हिम्मत है, तो 'डुबूकिया' की तरफ रुख क्यों नहीं करते?

सूत्रों की मानें तो असली खेल 'डुबूकिया' में चल रहा है, जहां बालू माफियाओं का विशाल साम्राज्य फल-फूल रहा है। वहां बालू का ऐसा विशाल भंडार है जिसे देखकर किसी भी आम आदमी की आंखें फटी रह जाएं। लेकिन मजाल है कि किसी अधिकारी की गाड़ी उस तरफ घूम भी जाए! वहां जाने के नाम पर प्रशासनिक अमले के हाथ-पांव फूलने लगते हैं। आखिर इस सिंडिकेट को किसका वरदहस्त प्राप्त है?

​'शेर छाप' ट्रकों के आगे नतमस्तक सिस्टम, ओवरलोडिंग पर 'गांधारी' बने अधिकारी

​रिंग रोड का सच यह है कि यहां से रोजाना बिना परमिट के दबंगों की 'शेर छाप' ट्रकें सीना तानकर गुजरती हैं। इन गाड़ियों में ओवरलोडिंग की बात करना ही बेमानी है—ट्रकें गिट्टी से इस कदर लदी होती हैं कि सड़कों का सीना फट जाए।

​सूत्रों का दावा है कि जब ये 'वीआईपी' ट्रकें निकलती हैं, तो चेकिंग पॉइंट पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी 'गांधारी' की तरह अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर मुंह फेर लेते हैं। उनके लिए नियम-कानून सिर्फ उन गरीब ट्रैक्टर वालों के लिए हैं, जो दो वक्त की रोटी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।

​बेबाक सवाल: कब तक चलेगा यह दोहरा मापदंड?

​जनता सब देख रही है साहब! सन्दहां में दिखावटी कार्रवाई करके बड़े मगरमच्छों को अभयदान देने का यह खेल अब पुराना हो चुका है। 'बेबाक 24' जिला प्रशासन से सीधा सवाल पूछता है:

सन्दहां के छोटे दुकानदारों और ट्रैक्टरों पर तो डंडा चल गया, लेकिन 'डुबूकिया' के असली सिंडिकेट पर शिकंजा कब कसा जाएगा?


दबंगों की बिना परमिट वाली ओवरलोडेड गाड़ियों को देखकर आंखें मूंदने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?


​देखना दिलचस्प होगा कि इस बेबाक खुलासे के बाद प्रशासन के 'बुलडोजर' का रुख डुबूकिया के रसूखदारों की तरफ मुड़ता है या फिर यह 'जीरो टॉलरेंस' सिर्फ कागजी दावों तक ही सिमट कर रह जाएगा।



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