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वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट: गोमती जोन की हिरासत में युवक की बिगड़ी स्थिति, थाना प्रभारी सस्पेंड; निष्पक्षता और मानवाधिकारों पर उठे गंभीर सवाल

by on | 2026-05-24 21:37:22

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वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट: गोमती जोन की हिरासत में युवक की बिगड़ी स्थिति, थाना प्रभारी सस्पेंड; निष्पक्षता और मानवाधिकारों पर उठे गंभीर सवाल


वाराणसी:

वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के गोमती जोन अंतर्गत फूलपुर थाने से एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला प्रकाश में आया है। पुलिस कस्टडी में एक युवक की स्वास्थ्य स्थिति अत्यंत चिंताजनक होने के पश्चात प्रशासनिक महकमे में हड़कंप व्याप्त है। मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए पुलिस उपायुक्त (DCP) गोमती जोन, नीतू कादयान ने तत्काल प्रभाव से कड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए फूलपुर के थाना प्रभारी निरीक्षक अतुल कुमार सिंह को निलंबित कर दिया है।

​ घटनाक्रम और पृष्ठभूमि

​प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, फूलपुर थाने में पंजीकृत मुकदमा संख्या 134/2026 के अंतर्गत विवेचनात्मक कार्रवाई के तहत पुलिस ने खालिसपुर निवासी महेश राजभर (पुत्र रामलाल) को पूछताछ हेतु अभिरक्षा में लिया था। पुलिस सूत्रों का दावा है कि पूछताछ की प्रक्रिया के दौरान अचानक महेश राजभर की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने लगी।

​तत्पश्चात, उपस्थित पुलिसकर्मियों द्वारा उन्हें अविलंब 'न्यू लक्ष्मी हॉस्पिटल' में उपचार हेतु भर्ती कराया गया। चिकित्सकीय बुलेटिन और प्रशासनिक बयानों के अनुसार, वर्तमान में युवक की स्थिति नियंत्रण में और स्थिर बताई जा रही है।

​परिजनों के आरोप और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न

​इस घटना के समानांतर, पीड़ित पक्ष के परिजनों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर अत्यंत संगीन आरोप लगाए हैं। परिजनों का स्पष्ट रूप से कहना है कि:

  • ​पूछताछ की आड़ में महेश राजभर के साथ अभद्र व्यवहार किया गया तथा उन पर शारीरिक बल (थर्ड डिग्री) का प्रयोग किया गया।
  • ​हिरासत के दौरान किए गए इसी कथित उत्पीड़न और शारीरिक प्रताड़ना के फलस्वरूप युवक की स्थिति जीवन-संकट तक जा पहुंची।

​ प्रशासनिक कार्रवाई एवं विभागीय रुख

​मामले की संवेदनशीलता और मानवाधिकारों से जुड़े पहलुओं को देखते हुए डीसीपी गोमती जोन नीतू कादयान ने त्वरित संज्ञान लिया। कानून व्यवस्था और पुलिस की छवि को अक्षुण्ण रखने के उद्देश्य से उन्होंने इंस्पेक्टर फूलपुर को निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध विभागीय जांच संस्थित कर दी है।

आधिकारिक वक्तव्य: पुलिस उपायुक्त कार्यालय द्वारा जारी संदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस पूरे प्रकरण की विस्तृत और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा रही है।


​जांच के मुख्य बिंदु निम्नलिखित होंगे:

  1. परिस्थितियों का आकलन: किन परिस्थितियों में पूछताछ की जा रही थी और क्या तय विधिक प्रक्रियाओं का पालन हुआ?
  2. भूमिका का निर्धारण: घटना के समय थाने में तैनात और पूछताछ में शामिल पुलिसकर्मियों की व्यक्तिगत भूमिका की गहन पड़ताल।
  3. वैज्ञानिक साक्ष्य: युवक की विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों के परामर्श का तकनीकी विश्लेषण।

​प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अभिरक्षा में किसी भी प्रकार की शिथिलता, अधिकारों का दुरुपयोग अथवा अमानवीय कृत्य कतई स्वीकार्य नहीं होगा। यदि जांच में किसी भी स्तर पर पुलिसकर्मियों की संलिप्तता या लापरवाही सिद्ध होती है, तो उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक एवं कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

​यह घटना एक बार फिर कस्टोडियल सुरक्षा और पुलिस सुधारों की आवश्यकता पर एक गंभीर विमर्श को जन्म देती है।



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