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बीएचयू के ईएनटी विभाग में करोड़ों की लागत से खुलीं आधुनिक लैब्स; पूर्वांचल, बिहार और झारखंड के मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

by on | 2026-05-21 21:35:48

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बीएचयू के ईएनटी विभाग में करोड़ों की लागत से खुलीं आधुनिक लैब्स; पूर्वांचल, बिहार और झारखंड के मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

वाराणसी: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल से क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। अस्पताल के कान, नाक एवं गला (ENT) विभाग को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों और विशिष्ट लैब्स से लैस कर इसे एक उच्च-स्तरीय केंद्र के रूप में उन्नत किया गया है। बुधवार को आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान विभाग में कई नई डायग्नोस्टिक और सर्जिकल इकाइयों का लोकार्पण किया गया। चिकित्सा क्षेत्र में हुए इस तकनीकी विस्तार के बाद अब पूर्वांचल, बिहार और झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों से आने वाले मरीजों को जटिल ईएनटी विकारों के इलाज के लिए बड़े महानगरों या महंगे निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

कुलपति ने किया नई इकाइयों का गहन निरीक्षण

​इन विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं का विधिवत उद्घाटन बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी द्वारा किया गया। उद्घाटन प्रक्रिया के उपरांत कुलपति ने नव-स्थापित इकाइयों और आधुनिक चिकित्सा कार्यस्थलों (Workstations) का गहनता से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों, जूनियर रेजिडेंट्स और तकनीकी स्टाफ से मशीनों की कार्यप्रणाली, उनकी सटीकता और उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा की। साथ ही, उन्होंने वार्ड और ओपीडी में उपस्थित मरीजों से संवाद कर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में उनका फीडबैक भी लिया।

एक ही छत के नीचे सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा: तकनीकी विकास का विवरण

​ईएनटी विभाग में स्थापित की गई ये नई इकाइयां आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की अग्रणी तकनीकों पर आधारित हैं। अब मरीजों को एक ही छत के नीचे निम्नलिखित विशिष्ट सेवाएं प्राप्त हो सकेंगी:

  • ENT Workstation एवं B&K Laboratory: इस एकीकृत प्रणाली के माध्यम से बाह्य रोगी विभाग (OPD) में आने वाले गंभीर मरीजों की प्रारंभिक जांच अत्यंत तीव्र और त्रुटिहीन तरीके से की जा सकेगी, जिससे रोग के निदान में लगने वाले समय में भारी कमी आएगी।
  • Stroboscopy Unit: यह इकाई विशेष रूप से उन मरीजों के लिए अत्यंत प्रभावी सिद्ध होगी जो स्वर-तंत्र (Voice) की शिथिलता या गले के आंतरिक व गंभीर रोगों से ग्रसित हैं। हाई-रिजॉल्यूशन विजुअलाइजेशन तकनीक के जरिए अब गले के सूक्ष्म विकारों की सटीक मैपिंग संभव होगी।
  • Sialendoscopy Unit: लार ग्रंथियों (Salivary Glands) में होने वाली पथरी के पारंपरिक उपचार में पहले व्यापक शल्यक्रिया (बड़ी सर्जरी) की आवश्यकता होती थी। इस नई इकाई के सक्रिय होने से अब 'मिनिमल इनवेसिव तकनीक' (न्यूनतम चीरे वाली प्रक्रिया) के माध्यम से सुरक्षित और सुगम उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
  • Temporal Bone Laboratory: यह इकाई एक उन्नत व्यावहारिक प्रशिक्षण केंद्र (Advanced Practical Training Center) के रूप में कार्य करेगी। इसके माध्यम से संस्थान के युवा सर्जनों को मानव कान की सूक्ष्म और अत्यधिक जटिल सर्जरी का वास्तविक व व्यावहारिक अभ्यास कराया जाएगा, जो भविष्य के विशेषज्ञ चिकित्सक तैयार करने में सहायक होगा।

शिशु स्वास्थ्य में बड़ा कदम: OAE और ASSR लैब्स की स्थापना

​इस तकनीकी उन्नयन का सबसे संवेदनशील और सामाजिक रूप से प्रभावी पक्ष OAE (Otoacoustic Emissions) एवं ASSR (Auditory Steady-State Response) लैब्स का संचालन है। बाल चिकित्सा में प्रायः यह देखा गया है कि नवजात शिशुओं में जन्मजात बहरेपन अथवा श्रवण दोष (Hearing Loss) की पहचान समय पर नहीं हो पाती, जिसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव उनके भाषाई विकास पर पड़ता है। इन दोनों लैब्स की स्थापना के बाद अब जन्म के तुरंत बाद ही शिशुओं की श्रवण क्षमता की सटीक जांच की जा सकेगी, जिससे प्रारंभिक अवस्था में ही दोष का पता लगाकर शत-प्रतिशत सुधारात्मक उपचार आरंभ किया जाना संभव होगा।

संस्थान के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति

​इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक व चिकित्सकीय अवसर पर आईएमएस (IMS) के निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार और चिकित्सा संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता सहित ईएनटी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक, वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर्स तथा पैरामेडिकल स्टाफ मुख्य रूप से उपस्थित रहे। संस्थान के प्रशासनिक अधिकारियों ने इस विकास कार्य को न केवल बीएचयू अपितु संपूर्ण उत्तर भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक युगांतरकारी कदम बताया।

गंभीर विश्लेषण (Editorial Analysis)

तकनीकी संपन्नता की सार्थकता, सुलभ और संवेदनशील क्रियान्वयन पर निर्भर है।

​बीएचयू के ईएनटी विभाग का यह ढांचागत और तकनीकी आधुनिकीकरण निसंदेह सराहनीय है, जो सार्वजनिक क्षेत्र के इस अस्पताल को बड़े कॉर्पोरेट चिकित्सालयों के समकक्ष खड़ा करता है। परंतु, इस चिकित्सकीय उपलब्धि की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसका लाभ सामान्य और आर्थिक रूप से विपन्न मरीजों को कितनी सुगमता से मिल पाता है। सर सुंदरलाल अस्पताल पर प्रतिदिन हजारों अत्यंत निर्धन मरीजों का भार रहता है, जो दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों से केवल एक सुलभ चिकित्सा की आस में यहां आते हैं। करोड़ों रुपए की लागत से स्थापित इन परिष्कृत मशीनों और लैब्स का वास्तविक उद्देश्य तभी सिद्ध होगा, जब प्रशासनिक तंत्र यह सुनिश्चित करे कि कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति को भी बिना किसी अनुचित विलंब, जटिल कूटनीतिक प्रक्रियाओं या लंबी प्रतीक्षा सूची के, समय पर पारदर्शी इलाज मिल सके। स्वास्थ्य ढांचे का 'हाईटेक' होना जितना आवश्यक है, उसकी उपलब्धता का उतना ही 'संवेदनशील' और 'न्यायसंगत' होना भी अनिवार्य है।



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