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खूनी रविवार और एनकाउंटर वाली रात: चंदौली के उस 'साइको किलर' का अंत जिसने 24 घंटे में सिस्टम को हिला दिया!

by on | 2026-05-12 19:24:45

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खूनी रविवार और एनकाउंटर वाली रात: चंदौली के उस 'साइको किलर' का अंत जिसने 24 घंटे में सिस्टम को हिला दिया!


चंदौली/वाराणसी: उत्तर प्रदेश के चंदौली और वाराणसी में बीते 48 घंटे किसी हॉरर फिल्म की पटकथा जैसे रहे। एक पूर्व सैनिक, जिसके हाथ कभी सरहदों की हिफाजत के लिए बंदूक थामते थे, वही हाथ मासूमों के खून से सन गए। पंजाब के अमृतसर निवासी पूर्व फौजी गुरप्रीत सिंह ने 24 घंटे के भीतर तीन बेगुनाहों को मौत की नींद सुलाकर पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी। लेकिन इस खूनी खेल का अंत सोमवार रात एक पुलिस एनकाउंटर के साथ हुआ।

वारदात दर वारदात: जब मौत का तांडव शुरू हुआ

​गुरप्रीत सिंह ने रविवार सुबह से सोमवार सुबह तक मौत का ऐसा चक्रव्यूह रचा, जिसमें तीन जिंदगियां खत्म हो गईं:

सुबह 06:45 बजे (पहली हत्या): डीडीयू-ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन में सवार गाजीपुर के 34 वर्षीय मंगरू को गुरप्रीत ने बिना किसी वजह के सिर में गोली मार दी। जब तक लोग कुछ समझ पाते, कातिल गायब हो चुका था।


रात 01:30 बजे (दूसरी हत्या): दहशत अभी थमी नहीं थी कि जम्मू-तवी एक्सप्रेस में बिहार के दिनेश साहू की कनपटी पर पिस्टल सटाकर गुरप्रीत ने उसे मौत के घाट उतार दिया।


सोमवार सुबह (तीसरी हत्या): हद तो तब हो गई जब आरोपी अलीनगर के जीवक अस्पताल में घुसा और इलाज के बहाने वार्ड में जाकर वहां भर्ती लक्ष्मीना देवी (55 वर्ष) को बिस्तर पर ही गोली मार दी।


"वह मारता था और गायब हो जाता था। उसका कोई मकसद नहीं था, सिर्फ बेगुनाहों का खून बहाना ही उसका जुनून बन गया था।"स्थानीय चश्मदीद

एनकाउंटर की वो रात: पिस्टल छीनी और फिर...

​सोमवार सुबह अस्पताल में तीसरी हत्या के बाद ग्रामीणों की बहादुरी से गुरप्रीत पकड़ा गया। पुलिस पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूला, लेकिन कहानी का असली क्लाइमेक्स अभी बाकी था।

​सोमवार देर रात पुलिस उसे 'क्राइम सीन रीक्रिएट' कराने ले गई थी। इसी दौरान गुरप्रीत ने पुलिसकर्मी की सर्विस पिस्टल छीनकर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोलियां चलाईं और चंदौली का यह 'साइको किलर' ढेर हो गया। इस मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए हैं।

बेबाक 24 का कड़वा सवाल

​यह मामला सिर्फ एक एनकाउंटर के साथ खत्म नहीं हो जाता। गुरप्रीत 2021 में सेना से रिटायर हुआ था और बिहार में गार्ड की नौकरी कर रहा था। ऐसे में 'खबर दो बेबाक 24' कुछ गंभीर सवाल उठाता है:

मानसिक स्वास्थ्य का ऑडिट: क्या रिटायरमेंट के बाद पूर्व सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य की जांच की कोई पुख्ता व्यवस्था है?


लाइसेंसिंग प्रक्रिया: एक 'मानसिक रूप से अस्थिर' व्यक्ति के पास लाइसेंसी रिवॉल्वर कैसे मौजूद थी?


रेलवे सुरक्षा: चलती ट्रेनों में एक के बाद एक दो हत्याएं हो गईं, क्या हमारी सुरक्षा एजेंसियां सिर्फ घटना के बाद जागने के लिए हैं?




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