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भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय बने कैबिनेट मंत्री; वाराणसी के हंसराज विश्वकर्मा को भी जगह; दलित-ओबीसी कार्ड के जरिए विपक्ष की घेराबंदी

by on | 2026-05-10 21:33:52

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भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय बने कैबिनेट मंत्री; वाराणसी के हंसराज विश्वकर्मा को भी जगह; दलित-ओबीसी कार्ड के जरिए विपक्ष की घेराबंदी

लखनऊ | अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी 'चुनावी टीम' को अंतिम रूप दे दिया है। आज हुए विस्तार में न केवल जातिगत संतुलन साधा गया है, बल्कि बागी नेताओं को पुरस्कृत कर विपक्ष को मनोवैज्ञानिक चोट भी पहुँचाई गई है।

 कौन बने नए मंत्री? (पूरी लिस्ट)

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने निम्नलिखित नेताओं को शपथ दिलाई:

- कैबिनेट मंत्री: भूपेंद्र सिंह चौधरी (MLC, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष) और मनोज कुमार पांडेय (ऊंचाहार से सपा के बागी विधायक)।

- राज्य मंत्री: * कृष्णा पासवान: खागा (फतेहपुर) से विधायक – दलित चेहरा।

- सुरेंद्र दिलेर: खैर (अलीगढ़) से विधायक – दलित चेहरा।

- हंसराज विश्वकर्मा: वाराणसी के जिलाध्यक्ष और MLC – अति पिछड़ा समाज।

- कैलाश राजपूत: तिर्वा (कन्नौज) से विधायक – लोध समाज।

- प्रमोशन (राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार): डॉ. सोमेंद्र तोमर (गुर्जर) और अजित पाल सिंह।

 विस्तार के पीछे के 3 बड़े सियासी समीकरण

बागी को इनाम, विपक्ष को संदेश: सपा के बागी मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाकर भाजपा ने संदेश दिया है कि उनके साथ आने वालों का सम्मान सुरक्षित है। यह ऊंचाहार और आसपास के ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की कोशिश है।

वाराणसी पर विशेष फोकस: प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र के जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा को सरकार में शामिल करना वाराणसी और पूर्वांचल में पिछड़ी जातियों (विश्वकर्मा/बढ़ई समाज) को बड़ा संदेश है।

दलित और पिछड़ा वर्ग का दबदबा: 60 सदस्यीय कैबिनेट में अब 25 ओबीसी और 10 दलित चेहरे हैं। भाजपा ने 'सोशल इंजीनियरिंग' के जरिए अखिलेश यादव के 'PDA' कार्ड की काट ढूंढने की कोशिश की है।

योगी कैबिनेट 2.0 का नया स्वरूप (पद एवं संख्या)

मुख्यमंत्री + उप-मुख्यमंत्री: 1 + 2 (कुल 3)

कैबिनेट मंत्री: 20

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार): 16

राज्यमंत्री: 21

कुल योग: 60 (मंत्रिमंडल का अधिकतम कोटा अब पूरा हो गया है)

क्या यह विस्तार 'नैया' पार लगाएगा?

चुनाव से मात्र 9-10 महीने पहले किया गया यह विस्तार स्पष्ट करता है कि भाजपा का पूरा ध्यान जातिगत संतुलन और क्षेत्रीय समीकरणों पर है। जहाँ भूपेंद्र चौधरी के जरिए पश्चिम को साधा गया है, वहीं हंसराज विश्वकर्मा के जरिए पूर्वांचल और मनोज पांडेय के जरिए मध्य यूपी की बिसात बिछाई गई है। अब देखना यह है कि ये नए मंत्री 9 महीनों में जनता के बीच कितनी पैठ बना पाते हैं।



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