by on | 2026-04-17 09:38:56
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विजिलेंस की जांच में खुली 'दया' बाबू की पोल: कमाई चवन्नी, खर्चा रुपया; 69 खातों में खपाई काली कमाई
बलिया/वाराणसी : बलिया के स्वास्थ्य विभाग में तैनात एक मामूली लिपिक (क्लर्क) ने भ्रष्टाचार की ऐसी पटकथा लिखी है, जिसने बड़े-बड़े सूरमाओं को पीछे छोड़ दिया है। विजिलेंस वाराणसी की जांच में खुलासा हुआ है कि लिपिक दयाशंकर वर्मा सिर्फ फाइलों का बाबू नहीं, बल्कि शहर से लेकर हाईवे तक फैले एक विशाल बेनामी साम्राज्य का 'डॉन' है। जांच के जैसे-जैसे पन्ने पलट रहे हैं, सफेदपोशों और विभाग के रसूखदारों के चेहरों से नकाब उतरने लगा है।
शिक्षा के नाम पर 'काली कमाई' का निवेश
सूत्रों की मानें तो विजिलेंस जिस ₹1.48 करोड़ के लेनदेन की जांच कर रही है, वह तो महज एक ट्रेलर है। दयाशंकर की असली संपत्ति सरकारी आंकड़ों से कोसों दूर है।
स्कूल-कॉलेजों का जाल: गड़हा परगना से लेकर बलिया शहर तक कई नामी और बेनामी स्कूलों के पीछे 'दया' की माया काम कर रही है।
डिग्री कॉलेजों में हिस्सा: चर्चा है कि आरोपी क्लर्क ने अवैध रूप से अर्जित धन का बड़ा हिस्सा इंटर और डिग्री कॉलेजों के निर्माण में खपाया है।
हाईवे पर रसूख: नरही-भरौली नेशनल हाईवे के किनारे बेनामी बेशकीमती जमीनों पर भी दया का काला धन लगा है, जिन्हें उसके खास का संरक्षण प्राप्त है।
69 खातों का 'लॉन्ड्री' कनेक्शन
विजिलेंस की जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य बैंक ट्रांजैक्शन को लेकर आया है। मई 2013 से जून 2017 के बीच दयाशंकर के व्यक्तिगत खाते को एक 'मनी लॉन्ड्रिंग मशीन' की तरह इस्तेमाल किया गया। करीब ₹1.48 करोड़ की रकम को 69 'खास' लोगों के खातों में बांटा गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या इन 69 लोगों में विभाग के बड़े अधिकारियों और जिले के 'माननीयों' के नाम भी शामिल हैं?
साहब थे 'रबड़ स्टैंप', क्लर्क के पास था रिमोट कंट्रोल
विभागीय गलियारों में चर्चा है कि सत्ता और मंत्री बदलते रहे, लेकिन दयाशंकर की हैसियत टस से मस नहीं हुई। सीएमओ स्तर के अधिकारी उसके सामने महज़ 'हस्ताक्षरकर्ता' बनकर रह गए थे। विभाग का असली रिमोट कंट्रोल दयाशंकर के पास था। आलम यह था कि उसकी मेहरबानी से ऐसे लोग भी सरकारी वेतन डकार रहे थे, जिन्होंने कभी अस्पताल की चौखट तक नहीं लांघी।
विजिलेंस का गणित: आय बनाम निवेश
वैध आय: ₹43.56 लाख (अनुमानित)
रिकॉर्ड पर खर्च/निवेश: ₹1.80 करोड़ (सैलरी से 4 गुना अधिक)
जांच का बिंदु: एक क्लर्क अपनी आय से चार गुना अधिक खर्च कैसे कर सकता है?
ठीकरा फोड़ने की कोशिश, अधिकारी मौन
मामला गहराते देख दयाशंकर ने अब अपनी गर्दन बचाने के लिए तत्कालीन अधिकारियों पर आरोप मढ़ना शुरू कर दिया है। उसका तर्क है कि तत्कालीन डीडीओ (DDO) उसके खाते का इस्तेमाल वेतन बांटने के लिए करते थे, जिसे जांच एजेंसियां गले नहीं उतार पा रही हैं। वहीं, प्रभारी सीएमओ डॉ. आनंद सिंह ने जांच का हवाला देते हुए कुछ भी कहने से पल्ला झाड़ लिया है।
अगला कदम: विजिलेंस अब उन 69 खाताधारकों को नोटिस भेजने की तैयारी में है, जिसके बाद बलिया के प्रशासनिक अमले में बड़ा हड़कंप मचना तय है।
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