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डाला-बिल्ली खनन क्षेत्र: रोज़गार बनाम सुरक्षा का संकट

by admin@bebak24.com on | 2025-12-06 10:22:21

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डाला-बिल्ली खनन क्षेत्र: रोज़गार बनाम सुरक्षा का संकट


37 खदानों के बंद होने से 20 हज़ार मजदूर भुखमरी के कगार पर; क्रशर एसोसिएशन की मांग, 'खदानें चालू करो'


दूसरी ओर, मानक उल्लंघन और हादसों के मद्देनजर प्रशासन सख्त, कहा- 'सुरक्षा से समझौता नहीं'

अजय सिंह

सोनभद्र (संवाददाता)। प्रदेश के राजस्व में बड़ा योगदान देने वाले डाला-बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में 37 पत्थर खदानों पर प्रतिबंध लगने के बाद रोज़गार और सुरक्षा के बीच एक बड़ा टकराव पैदा हो गया है। एक तरफ हज़ारों मज़दूरों के परिवार भुखमरी और पलायन की कगार पर हैं, तो दूसरी तरफ खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) ने सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन और लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया है।


 मजदूरों का दर्द: "रोज़ी-रोटी का संकट, पलायन को मजबूर"


डाला-बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र की खदानें कई दिनों से बंद होने के कारण, यहां कार्यरत 20 हज़ार से अधिक मज़दूरों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। श्रमिकों का कहना है कि खदानें बंद होने से उन्हें तुरंत रोज़गार से हाथ धोना पड़ रहा है और उनके परिवार अब भुखमरी के शिकार हो रहे हैं।

 * भुखमरी और पलायन: बेबाक24 टीम को मज़दूरों ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे पीढ़ियों से इस उद्योग से जुड़े हैं और अब उन्हें अपने बच्चों का पेट पालना मुश्किल हो गया है।


क्रशर एसोसिएशन ने उठाई खदानें चालू करने की मांग


बंद पड़ी 37 खदानों को तत्काल चालू कराने की मांग को लेकर क्रशर एसोसिएशन ने बुधवार को एक आवश्यक बैठक बुलाई।

 * बैठक का निर्णय: एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सभी खनन मालिकों ने एकजुटता दिखाते हुए, ज़िलाधिकारी से मिलकर खदानों को चालू कराने की अपील करने का प्रस्ताव पास किया।

 * मांग: एसोसिएशन ने कहा कि बंद खदानों से जुड़े 11 क्रशर और हज़ारों मज़दूरों के हितों की रक्षा होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से इस मामले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।


 सुरक्षा का पहलू: DGMS ने लगाया प्रतिबंध


इस पूरे मामले का दूसरा पहलू खदानों में व्याप्त गंभीर अनियमितताएं और दुर्घटनाओं से हो रही मौतें हैं।

 * प्रतिबंध का कारण: जनपद सोनभद्र के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र की 71 पत्थर खदानों में से 37 को खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) ने सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है।

 * अनियमितताएं: इन बंद खदानों में भारी अनियमितताएँ पाई गईं, जो लगातार हो रहे हादसों को दावत दे रही थीं।

 * स्थानीय लोगों का मत: स्थापित लोगों का कहना है कि ये अनियमित खदानें 'नरभक्षी खदानों' की तरह थीं, जहां मानक के विपरीत खनन होता था। उनका मत है कि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों पर सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि मज़दूरों का "नरसंहार" बंद हो सके।

 * अवैध खनन पर सवाल: मज़दूरों ने भी अतिक्रमण और अवैध खनन पर सख़्त कार्रवाई न होने पर सवाल उठाया, जिससे प्रदेश को राजस्व का नुकसान हो रहा है और अवैध खनन करने वाले उद्योगों के सामने भी संकट पैदा हो गया है।



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