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पूर्वांचल की बिसात पर 'शह' और 'मात', दोस्ती की राख के नीचे सुलगती रंजिश!

by on | 2026-04-16 00:20:26

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पूर्वांचल की बिसात पर 'शह' और 'मात', दोस्ती की राख के नीचे सुलगती रंजिश!

संतोष राय
​लखनऊ/जौनपुर: पूर्वांचल की सियासत और जरायम की दुनिया के बीच की लकीर हमेशा से धुंधली रही है। यहाँ शतरंज की बिसात पर राजा और प्यादे एक ही डाल पर लटके नजर आते हैं, जो सत्ता का कवच ओढ़कर एक-दूसरे के लिए जाल बिछा रहे हैं। ऊपर से समंदर जैसा शांत दिखने वाला ये इलाका दरअसल अपराध के उस ज्वालामुखी पर बैठा है, जिसके फटने का इंतजार हर कोई कर रहा है। ताजा अदालती फैसला इसी बिगड़ते और बनते समीकरण का वो नतीजा है, जिसने 'बाहुबली' धनंजय सिंह को न्याय की वेदी पर करारी शिकस्त दी है।
​गैंगवार की पुरानी विरासत: राय, अंसारी और अब 'दो फाड़'
​यह जंग नई नहीं है। अवधेश राय के जमाने से शुरू हुआ यह खूनी खेल मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय के बीच की अदावत से होता हुआ आज के दौर तक पहुँचा है। सैकड़ों जानें गईं, कई खानदान उजड़े, लेकिन आज वो खाई 'नोटों' और 'समझौतों' से भर दी गई है। वजीर और घोड़े पाला बदल चुके हैं। सत्ता का वरदहस्त ऐसा है कि खौफ के मारे ज्वालामुखी शांत है, पर याद रहे—यह शांति तूफान से पहले की है।
​विनीत की 'नरमी' और अभय के 'तेवर': क्या घिर गए धनंजय?
​अदालत से बरी होने के बाद की तस्वीर सबसे ज्यादा चौंकाने वाली है। एक तरफ MLC विनीत सिंह हैं, जिन्होंने कभी धनंजय के खिलाफ मोर्चा खोला था, लेकिन अब वो 'गहबलिया' (मदद) करते नजर आ रहे हैं। मीडिया के सामने विनीत ने धनंजय को अपना बताकर खेद जता दिया, जिसे जानकार एक सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं।
​वहीं दूसरी तरफ, अभय सिंह के तेवर आज भी वही पुराने और तल्ख हैं। उन्होंने साफ शब्दों में धनंजय सिंह को 'अपराधजीवी' करार दे दिया। अभय सिंह का सीधा हमला था— "वो बिना अपराध किए रह ही नहीं सकते।"
​बेबाक सवाल: क्या विनीत सिंह का अचानक नरम पड़ना धनंजय सिंह के लिए किसी बड़ी घेराबंदी का हिस्सा है? क्या इस कानूनी हार के पीछे कोई 'अपनों' का ही हाथ है?
​बेबाक विश्लेषण: बादसाहत पर मंडराते बादल
​भले ही रसूखदार लोग आज भी कानून और सियासत के बीच अपनी राह निकाल रहे हों, लेकिन धनंजय सिंह के लिए यह दौर चुनौतीपूर्ण है। पूर्वांचल की जमीन पर अब समीकरण बदल रहे हैं। राजा को घेरा जा रहा है, प्यादे वजीर बन रहे हैं, और सत्ता की छांव में बैठी सरकार की टेढ़ी नजरें इस शांति को किसी भी वक्त भंग कर सकती हैं।
​कानूनी फाइलें बंद हुई हैं, लेकिन जुबानी जंग और जमीनी रंजिश ने ये साफ कर दिया है कि पूर्वांचल के 'सुल्तान' बनने की चाह अभी खत्म नहीं हुई है।



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