by admin@bebak24.com on | 2026-04-05 15:46:42
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नई दिल्ली| अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भारत ने एक बहुत बड़ा और साहसिक कदम उठाया है। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में सप्लाई चेन बाधित होने के बीच, भारत ने 7 साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से ईरान से कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की हालिया जानकारी के अनुसार, मई 2019 के बाद पहली बार ईरानी बंदरगाहों से तेल की खेप भारतीय तटों की ओर रवाना हुई है।
1. अमेरिकी दबाव को दरकिनार कर 'रणनीतिक स्वायत्तता'
गौरतलब है कि 2019 में तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन के कड़े प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव के कारण भारत ने ईरान से तेल लेना बंद कर दिया था। लेकिन वर्तमान में जारी वैश्विक ऊर्जा संकट, रेड सी (Red Sea) में जहाजों पर हमले और आसमान छूती कीमतों को देखते हुए भारत ने अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) को सर्वोपरि रखा है।
2. क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला? (विशेषज्ञों की राय)
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत का यह कदम कई मायनों में 'गेम-चेंजर' साबित होगा:
कीमतों पर लगाम: ईरान से सस्ता तेल मिलने पर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर करने में बड़ी मदद मिलेगी।
सप्लाई का संतुलन: यह रूस और अमेरिका जैसे पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं पर भारत की अत्यधिक निर्भरता को कम करेगा और एक बेहतर संतुलन बनाएगा।
संकट का समाधान: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच तेल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जीवनदान जैसा है।
3. 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' और भारत की चुनौती
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश होने के नाते भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ईरान के साथ व्यापार फिर से शुरू करना अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी एक कड़ा संदेश है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता नहीं करेगा।
क्या कहते हैं समीकरण?
वैश्विक तनाव के इस दौर में भारत का यह 'ईरान कार्ड' न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की छाप को और गहरा करेगा। भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी रसोई और बाज़ार का फैसला किसी बाहरी दबाव में नहीं, बल्कि देश की जरूरत के आधार पर होगा।
"7 साल बाद ईरानी तेल की वापसी यह दर्शाती है कि भारत अब वैश्विक दबावों के आगे झुकने के बजाय अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए नए और स्वतंत्र रास्ते चुनने के लिए तैयार है।"
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