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'सिस्टम' का डिजिटल चाबुक या वसूली का नया खेल? DM की सख्ती के बीच मुख्तार गैंग के 'किंगपिन' की ब्लैक मार्केटिंग जारी!

by on | 2026-03-13 23:46:50

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'सिस्टम' का डिजिटल चाबुक या वसूली का नया खेल? DM की सख्ती के बीच मुख्तार गैंग के 'किंगपिन' की ब्लैक मार्केटिंग जारी!

गाजीपुर। प्रशासन के कागजों पर नियम 'टाइट' हैं, लेकिन जमीन पर अंसारी गैंग के 'सिंडिकेट' के आगे सब 'फ्लॉप' नजर आ रहे हैं। एक तरफ जिला पूर्ति अधिकारी राइफल क्लब में बैठकर पारदर्शिता का पाठ पढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्तार अंसारी के खास गुर्गों द्वारा संचालित गैस एजेंसियों पर सरेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

DM का फरमान: अब मोबाइल से बुकिंग, अराजकता पर जेल

​जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला पूर्ति अधिकारी अनन्त प्रताप सिंह ने साफ कर दिया है कि गैस एजेंसियों पर भीड़ या उपद्रव बर्दाश्त नहीं होगा। अब उपभोक्ताओं को डिजिटल रास्ते (WhatsApp/मिस्ड कॉल) से ही बुकिंग करनी होगी।

  • नियम सख्त: शहरी क्षेत्र में 25 और ग्रामीण में 45 दिन का गैप अनिवार्य।
  • चेतावनी: बिना OTP के सिलेंडर न लें और एजेंसी पर हंगामा किया तो सीधे विधिक कार्रवाई होगी।

बेबाक खुलासा: 'अंसारी सिंडिकेट' का गैस कनेक्शन; 3000 में बिक रहा सिलेंडर!

​एक तरफ प्रशासन सर्वर और ओटीपी का ज्ञान दे रहा है, दूसरी तरफ मुख्तार अंसारी के खास अखंड प्रताप राय (पूर्व टावर गार्ड से उद्योगपति बने) की पत्नी के नाम संचालित इण्डेन गैस एजेंसी से 'अवाथहीं' में बड़ा खेल चल रहा है।

सनसनीखेज खबर: विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, यहाँ एक-एक सिलेंडर 2000 से 3000 रुपये में ब्लैक किया जा रहा है। आम जनता लाइन में लगी है और माफिया का सिंडिकेट ब्लैक मार्केटिंग से जेबें भर रहा है।


नाम 'बेनामी' लेकिन मालिक वही: कौन डालेगा माफिया के हाथ पर हाथ?

​अखंड प्रताप राय, अंसारी गैंग की 'महरबानी' से सैदपुर के अमरीश जायसवाल के साथ मिलकर कई नामी और बेनामी गैस एजेंसियां और पेट्रोल पंप चला रहा है। हद तो यह है कि मुख्तार के शार्प शूटर अंगद राय के ड्राइवर जितेन्द्र कनौजिया के नाम पर भांवरकोल के पास जो पेट्रोल पंप है, उसका असली सूत्रधार भी अखंड राय ही बताया जाता है।

​जनपद के आला अधिकारियों की नाक के नीचे माफिया का यह 'खजांची' अपना साम्राज्य फैलाए बैठा है, लेकिन हैरानी की बात है कि आज तक किसी ने इन 'किंगपिन' पर हाथ डालने की हिमाकत नहीं की।

बेबाक टिप्पणी:

साहब! राइफल क्लब की बैठकों और प्रेस विज्ञप्तियों से जनता का चूल्हा नहीं जलता। जब तक मुख्तार गैंग के इन सफ़ेदपोश गुर्गों की एजेंसियों पर छापेमारी नहीं होगी, तब तक 45 दिन का नियम सिर्फ गरीब जनता को सताने का जरिया बना रहेगा। क्या जिला प्रशासन इन 'नामचीन' माफिया पार्टनर पर कार्रवाई कर पाएगा या फिर 'साहबों' की खामोशी इस ब्लैक मार्केटिंग को मूक सहमति देती रहेगी? सवाल कड़वा है, लेकिन जरूरी है।



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