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मोहम्मदाबाद-सेमरा-शेरपुर मार्ग: 'विकास' का आइना या 'नर्किस्तान' की दास्तान? जिम्मेदार कौन?

by admin@bebak24.com on | 2025-12-16 08:54:09

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मोहम्मदाबाद-सेमरा-शेरपुर मार्ग: 'विकास' का आइना या 'नर्किस्तान' की दास्तान? जिम्मेदार कौन?


​गाजीपुर। मोहम्मदाबाद से शेरपुर कलां को जोड़ने वाला अति-महत्वपूर्ण मार्ग आज अपनी बदहाली की चीखती हुई दास्तान खुद बयां कर रहा है। यह सड़क केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता स्मारक बन चुकी है। इस मार्ग पर यात्रा करना उत्तर प्रदेश में 'आधुनिक भारत' की झलक देखने जैसा नहीं, बल्कि 'नर्किस्तान' की यात्रा जैसा प्रतीत होता है।
​50,000 आबादी की 'लाइफ लाइन' बनी मौत का गड्ढा
​यह मार्ग मोहम्मदाबाद नगर के मठिया मुहल्ला, बसाऊकापुरा, बच्छलकापुरा से होते हुए सेमरा, शिवराय का पुरा, और शेरपुर कलां तक पहुँचता है। अनुमानित पचास हजार से अधिक आबादी की यह 'लाइफ लाइन' है, जिसके सहारे इन गाँवों के लोग हर रोज़ मोहम्मदाबाद के मुख्य बाज़ार तक पहुँचने के लिए विवश हैं।
​सड़क की स्थिति ऐसी है कि यहाँ गड्ढे, सड़क पर बहती नाली का पानी, अतिक्रमण, और कुंठाग्रस्त भैंसों व आदमियों से बचते-बचाते चलना पड़ता है। राहगीरों को हर पल यही महसूस होता है कि कहीं वे फिसलकर खाई में न गिर जाएँ। विशेष रूप से सेमरा जैसे बड़े गाँव (आबादी 6000+) की घोर उपेक्षा समझ से परे है।
​विधायक-सांसद को 'नर्क' क्यों नहीं दिखता?
​सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह 'नर्क'नुमा सड़क मोहम्मदाबाद विधानसभा के विधायक शोएब अंसारी  के आवास से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद, विधायक जी को इसकी सुध नहीं है, न ही स्थानीय सांसद सनातन पांडेय को इस जन-समस्या की कोई चिंता है।
​स्थानीय लोगों में यह आक्रोश है कि जब वोट दल के नाम पर मिलता है, तो फिर उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए क्यों तरसना पड़ रहा है? इतनी बड़ी आबादी को रोज़ाना इसी उपेक्षित मार्ग से गुज़रना पड़ता है, लेकिन कोई भी जनप्रतिनिधि इसकी ओर देखने को तैयार नहीं है।
​"वोट तो यहां जाति व दल पर मिलता है," एक स्थानीय नागरिक ने आक्रोशित होकर कहा। "तो क्या हमें विकास नहीं, सिर्फ गड्ढे मिलेंगे? यह सड़क विकास का ऐसा आइना है जिसे देखकर आप सोचेंगे कि यह उत्तर प्रदेश है या नर्किस्तान।"
स्थायी समाधान की माँग
​इन गाँव के लोग अब किसी तात्कालिक लीपापोती की नहीं, बल्कि सड़क के चौड़ीकरण, पक्की नाली निर्माण, और अतिक्रमण हटाने जैसे स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को यह समझना होगा कि यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि हज़ारों लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और रोज़गार से जुड़ा हुआ एक गंभीर मसला है।
​अब देखना यह है कि क्या चुनाव से पहले इस बदहाल 'लाइफ लाइन' की बदहाली को दूर करने के लिए कोई 'सुधि' ली जाती है, या यह सड़क यूं ही चीखती रहेगी और जनप्रतिनिधि मौन साधेंगे।



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