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गैस की किल्लत या अफवाहों का 'सिलिंडर'? एजेंसियों पर हाहाकार, जनता बेहाल!

by on | 2026-03-12 20:09:59

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गैस की किल्लत या अफवाहों का 'सिलिंडर'? एजेंसियों पर हाहाकार, जनता बेहाल!

वाराणसी। क्या महादेव की नगरी में रसोई का चूल्हा बुझने वाला है? या फिर कुछ 'अफवाहबाजों' ने शहर से लेकर गांव तक डर का ऐसा गुब्बारा फुला दिया है जो अब फटने को तैयार है? वाराणसी की गैस एजेंसियों पर जो मंजर दिख रहा है, वह किसी आपातकाल से कम नहीं है। सुबह की पहली किरण के साथ ही लोग खाली सिलिंडर लेकर लंबी कतारों में ऐसे खड़े हैं, मानो आज ही आखिरी बार गैस मिलनी हो।

अफवाहों का बाज़ार गर्म, कतारों में जनता पस्त

लोहता क्षेत्र की शिरडी, अंतरा और गंगा गैस एजेंसियों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहाँ करीब 100 गांवों की सप्लाई का जिम्मा है, लेकिन आज वहां सिलिंडरों की नहीं, बल्कि लोगों की बेतहाशा भीड़ दिख रही है। एजेंसी प्रबंधकों का माथा ठनका हुआ है; उनका कहना है कि सप्लाई तो रोज़ की तरह ही हो रही है, लेकिन डर का आलम ये है कि जिसका सिलिंडर अभी आधा भरा है, वो भी 'बैकअप' के चक्कर में लाइन में लगा है।

पाइपलाइन है फिर भी सिलिंडर का मोह?

हैरानी की बात तो ये है कि जिन ग्रामीण इलाकों में गैस पाइपलाइन पहुंच चुकी है, वहां भी लोग अफवाहों के झांसे में आकर एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। जनता को लग रहा है कि आने वाले दिनों में किल्लत इतनी बढ़ेगी कि चूल्हा जलना दूभर हो जाएगा। इसी 'फोबिया' का नतीजा है कि शादी-समारोह, भंडारा और स्कूलों में मिड-डे मील जैसी व्यवस्थाएं भी डगमगाने लगी हैं।

किल्लत के बीच 'कालाबाजारी' का खेल?

जब भीड़ बढ़ती है, तो गिद्ध भी सक्रिय हो जाते हैं। खबरें आ रही हैं कि कुछ क्षेत्रों में इस भगदड़ का फायदा उठाकर सिलिंडर महंगे दामों पर बेचे जा रहे हैं। जनता की जेब ढीली हो रही है और मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है।

> प्रशासन का पक्ष: सब चंगा है!

> जिला पूर्ति अधिकारी केबी सिंह ने मोर्चा संभालते हुए साफ कर दिया है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी है: "अगर किसी भी एजेंसी ने कालाबाजारी की या तय दाम से एक रुपया भी ज्यादा लिया, तो खैर नहीं!"

बेबाक टिप्पणी

अफवाह आग से भी तेज फैलती है, और जब बात रसोई की हो तो पैनिक होना स्वाभाविक है। लेकिन क्या हम खुद इस भीड़ का हिस्सा बनकर समस्या को बढ़ा नहीं रहे? जब सप्लाई सामान्य है, तो पैनिक बुकिंग क्यों? प्रशासन को चाहिए कि सिर्फ बयान न दे, बल्कि उन अफवाहबाजों को भी दबोचे जो शहर का माहौल बिगाड़ रहे हैं।

सावधान रहें, अफवाहों पर कान न धरें और जरूरत होने पर ही बुकिंग कराएं। वरना ये लंबी लाइनें आपकी जेब और सुकून दोनों छीन लेंगी।



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