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स्थानांतरण के बाद भी ओबरा ईओ की कुर्सी से 'ममता', भ्रष्टाचार की फाइलें ठिकाने लगाने का आरोप!

by on | 2026-01-08 19:47:03

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स्थानांतरण के बाद भी ओबरा ईओ की कुर्सी से 'ममता', भ्रष्टाचार की फाइलें ठिकाने लगाने का आरोप!


​अजय सिंह

ओबरा (सोनभद्र): उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार और कार्यप्रणाली में 'जीरो टॉलरेंस' नीति का डंका पीट रही है, लेकिन सोनभद्र के ओबरा में तैनात एक अधिकारी शासन के आदेशों को ही खुली चुनौती दे रहे हैं। नगर पंचायत ओबरा के अधिशासी अधिकारी (EO) मधुसूदन जायसवाल का स्थानांतरण 48 घंटे पहले एटा जिले के लिए हो चुका है, लेकिन उन्होंने अब तक कार्यभार नहीं छोड़ा है। चर्चा है कि वे जाने से पहले भ्रष्टाचार की फाइलों को 'मैनेज' करने में जुटे हैं।

तत्काल कार्यमुक्त होने का था निर्देश

​नगर विकास अनुभाग-1, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 6 जनवरी 2026 को जारी पत्र संख्या- 51/9-1-2026-09सा/25/टी0सी0 के तहत मधुसूदन जायसवाल का तबादला नगर पंचायत निधौली कला (एटा) कर दिया गया था। शासन के आदेश में स्पष्ट उल्लेख था कि संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से कार्यभार त्यागना होगा। आदेश के पैरा-2 में यहाँ तक चेतावनी दी गई थी कि अवहेलना की स्थिति में अनुशासन एवं अपील नियमावली 1999 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी, परंतु ओबरा में आदेश बेअसर साबित हो रहे हैं।

फाइलें समेटने में जुटे EO, जिलाधिकारी के पत्र का बहाना

​प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि ईओ द्वारा मौखिक रूप से जिलाधिकारी कार्यालय से पत्र प्राप्त न होने का तर्क दिया जा रहा है। हालांकि, सेवा नियमों के अनुसार शासन का आदेश अपने आप में प्रभावी होता है। स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों का गंभीर आरोप है कि ईओ नगर पंचायत में व्याप्त वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़ी फाइलों को समेटने और सबूतों को मिटाने के प्रयास में कुर्सी नहीं छोड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री से की गई शिकायत

​इस मनमानी को लेकर राकेश केशरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि शासन की प्रतिष्ठा को ताक पर रखकर एक अधिकारी का पद पर बने रहना कई संदेह पैदा करता है। अब देखना यह है कि लखनऊ से जारी आदेश की अवहेलना करने वाले इस अधिकारी पर शासन का हंटर कब चलता है।



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