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बड़ागांव कांड: 14 दिन बाद भी समीर के हत्यारे पुलिस की पहुंच से दूर, थाने पर पेट्रोल लेकर पहुंची महिलाएं

by on | 2026-01-08 18:54:07

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बड़ागांव कांड: 14 दिन बाद भी समीर के हत्यारे पुलिस की पहुंच से दूर, थाने पर पेट्रोल लेकर पहुंची महिलाएं


वाराणसी। 25 दिसंबर की शाम दयालपुर बगीचे में हुई 14 वर्षीय किशोर समीर सिंह की सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज परिजनों का धैर्य गुरुवार को जवाब दे गया। इंसाफ की मांग को लेकर मृतक की मां और भारी संख्या में क्षेत्र की महिलाओं ने बड़ागांव थाने का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई जब कुछ महिलाएं अपने साथ पेट्रोल की बोतल लेकर पहुंचीं और आत्मदाह की चेतावनी देने लगीं।

डीसीपी के पैरों में गिरकर मां ने मांगा इंसाफ

​प्रदर्शन की सूचना मिलते ही डीसीपी गोमती जोन आकाश पटेल और एसीपी पिंडरा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। थाने के गेट पर ही मृतक समीर की मां अधिकारियों के सामने फूट-फूटकर रोने लगी और आरोपियों की गिरफ्तारी की गुहार लगाने लगी। महिलाओं का आरोप है कि घटना के 14 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं, जबकि परिजनों ने नामजद और संदिग्धों की जानकारी पहले ही दे दी थी।

थाने में तीखी नोकझोंक, पुलिस को अल्टीमेटम

​प्रदर्शनकारियों और थानाध्यक्ष प्रवीण सिंह के बीच कई बार तीखी झड़प हुई। महिलाओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए साफ किया कि अब आश्वासन नहीं, बल्कि गिरफ्तारी चाहिए। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए फूलपुर थानाध्यक्ष भी मौके पर बुला लिए गए। पुलिस अधिकारियों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद महिलाओं को समझा-बुझाकर शांत कराया।

36 घंटे की मोहलत: डीसीपी का भरोसा

​जनाक्रोश को देखते हुए डीसीपी आकाश पटेल ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से आश्वासन दिया कि "अगले 24 से 36 घंटों के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।" इस भरोसे के बाद ही महिलाओं ने धरना समाप्त किया, हालांकि चेतावनी दी कि यदि समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र होगा।

फ्लैशबैक: क्या था मामला?

​बीते 25 दिसंबर की शाम रसूलपुर–बड़ागांव मार्ग पर दयालपुर बगीचे के पास कुछ बदमाश रामू यादव नामक युवक से उलझ रहे थे। इसी दौरान वहां से गुजर रहे समीर सिंह को बदमाशों ने गोली मार दी थी। इलाज के दौरान समीर की मौत हो गई, जबकि रामू घायल हो गया था। तब से पुलिस केवल जांच की बात कह रही है, जिससे स्थानीय लोगों में पुलिसिया सुस्ती को लेकर भारी गुस्सा है।



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