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एक युग का अवसान: वनवासी आश्रम से विधानसभा तक, थम गई आदिवासियों की बुलंद आवाज

by on | 2026-01-08 18:43:00

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एक युग का अवसान: वनवासी आश्रम से विधानसभा तक, थम गई आदिवासियों की बुलंद आवाज

विशेष रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश की आदिवासी राजनीति के 'पितामह' कहे जाने वाले विजय सिंह गोंड के निधन के साथ ही सोनभद्र के संघर्षशील राजनीतिक युग का अंत हो गया है। वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ने वाले एक योद्धा थे।

राजनीतिक उपलब्धियां एक नजर में:

  • 8 बार विधायक: 1980 से लेकर अब तक विभिन्न दलों से होते हुए कुल 8 बार विधानसभा पहुंचे।
  • ऐतिहासिक संघर्ष: दुद्धी और ओबरा को ST सीट का दर्जा दिलाने में निर्णायक भूमिका।
  • सरल व्यक्तित्व: सत्ता के शिखर पर रहकर भी 'आदिवासी अस्मिता' के प्रहरी बने रहे।

​उनके निधन पर राजनीतिक गलियारों में शोक व्याप्त है। समर्थकों का कहना है कि विजय सिंह गोंड का जाना आदिवासी समाज के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई निकट भविष्य में असंभव है। वे अपने पीछे संघर्षों की एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जो आने वाली पीढ़ियों को हक की लड़ाई लड़ना सिखाती रहेगी।



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