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मनरेगा बहाली व नेताओं की रिहाई को लेकर वामदलों का कलेक्ट्रेट पर हल्ला बोल

by on | 2026-01-06 23:11:42

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मनरेगा बहाली व नेताओं की रिहाई को लेकर वामदलों का कलेक्ट्रेट पर हल्ला बोल

सोनभद्र/वाराणसी: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट (मनरेगा) के पुराने स्वरूप को बहाल करने और गिरफ्तार नेताओं की रिहाई सहित विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को वामपंथी दलों व मजदूर यूनियनों ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। भाकपा, माकपा और माले सहित उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन के कार्यकर्ताओं ने वाराणसी-शक्तिनगर मुख्यमार्ग पर जुलूस निकालकर केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

नए एक्ट को बताया 'रोजगार खत्म करने की साजिश'

​धरने को संबोधित करते हुए कम्युनिस्ट नेताओं ने कहा कि तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा वामदलों की पहल पर लाया गया मनरेगा एक्ट ग्रामीण मजदूरों के लिए जीवनदान था। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा भाजपा सरकार ने इसे 'विकसित भारत - रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)' (VB-GRAM G) बिल से बदलकर मजदूरों के हितों पर कुठाराघात किया है।

​नेताओं ने तर्क दिया कि पुराने एक्ट में केंद्र 90 प्रतिशत बजट देता था, जबकि नए नियम में राज्यों पर 40 प्रतिशत का बोझ डाल दिया गया है। कर्ज में डूबी राज्य सरकारें इतना धन नहीं जुटा पाएंगी, जिससे योजना स्वतः दम तोड़ देगी। साथ ही, 60 प्रतिशत काम कृषि क्षेत्र में देने की शर्त को भी अव्यावहारिक बताया गया।

प्रमुख मांगें: मजदूरी व पेंशन पर जोर

​प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति व मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें उठाई गईं:

  • 200 दिन काम और 600 रुपये मजदूरी: ग्रामीण मजदूरों को वर्ष में न्यूनतम 200 दिन का काम और 600 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी दी जाए।
  • पेंशन व आवास: 55 वर्ष से अधिक आयु के मजदूरों को 10,000 रुपये मासिक पेंशन और आवास के लिए 15 डिसमिल जमीन व 5 लाख रुपये की सहायता दी जाए।
  • नेताओं की रिहाई: मिर्जापुर में गिरफ्तार भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव और जीरा भारती को बिना शर्त रिहा किया जाए।
  • बिजली राहत: स्मार्ट मीटर व बिजली निजीकरण पर रोक लगाकर मजदूरों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए।

जल, जंगल, जमीन की वापसी की अपील

​यूनियन नेताओं ने दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मांगते हुए कहा कि उनके प्राकृतिक संसाधनों (जल, जंगल, जमीन) को तत्काल वापस किया जाए। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस अवसर पर भारी संख्या में मजदूर व वामपंथी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



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