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खनन क्षेत्र में सुरक्षा सर्वोपरि, बिना ट्रेनिंग काम करने पर होगी सख्ती: जिलाधिकारी

by on | 2026-01-05 22:36:51

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खनन क्षेत्र में सुरक्षा सर्वोपरि, बिना ट्रेनिंग काम करने पर होगी सख्ती: जिलाधिकारी


सोनभद्र : जिले के खनन क्षेत्रों में आए दिन होने वाले हादसों को रोकने और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने अब कमर कस ली है। जिलाधिकारी बी.एन. सिंह ने सोमवार को डाला-ओबरा स्थित 'ग्रुप वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर गणेशाय' का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि खनन क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रत्येक श्रमिक के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य है।

निरीक्षण में सुरक्षा मानकों पर जोर

जिलाधिकारी ने प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी और ट्रेनिंग ऑफिसर आर.पी. सिंह से सेंटर की कार्यप्रणाली की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि फरवरी 2024 से संचालित इस केंद्र को महानिदेशालय खान सुरक्षा (DGMS) वाराणसी से मान्यता प्राप्त है। अब तक यहाँ लगभग 200 श्रमिकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि कोई भी श्रमिक बिना ट्रेनिंग के खदानों में न उतरे।

हादसे के बाद जागी व्यवस्था, उठ रहे सवाल

भले ही प्रशासन अब ट्रेनिंग पर जोर दे रहा है, लेकिन हकीकत की परतें कुछ और ही बयां कर रही हैं। दो माह पूर्व हुए खदान हादसे में 7 मजदूरों की मौत ने सुरक्षा दावों की पोल खोल दी थी। जिले में जहाँ लाखों अकुशल श्रमिक जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं, वहीं अब तक केवल 200 श्रमिकों का प्रशिक्षित होना प्रशासन की सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। चर्चा यह भी है कि यदि प्रशासन समय रहते चेत जाता, तो सात परिवारों के चिराग नहीं बुझते। विपक्ष की चुप्पी और स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली भी अब जनता के निशाने पर है।

प्रशिक्षण की रूपरेखा और लाभ

ट्रेनिंग ऑफिसर ने बताया कि:

 * नये श्रमिकों के लिए: 12 से 20 दिनों का विशेष सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाता है।

 * अनुभवी श्रमिकों के लिए: 5 वर्ष का अनुभव रखने वाले श्रमिकों को स्पेशल रिफ्रेशर ट्रेनिंग दी जाती है।

 * निरक्षर श्रमिकों को भी सुविधा: जो मजदूर पढ़ना-लिखना नहीं जानते, उनके लिए भी विशेष ट्रेनिंग मॉड्यूल उपलब्ध है।

 * नया भवन: फरवरी या मार्च 2026 तक केंद्र का अपना बड़ा भवन तैयार हो जाएगा, जिससे प्रशिक्षण क्षमता बढ़ेगी।

"खनन क्षेत्र में दुर्घटनाओं को शून्य पर लाने के लिए प्रशिक्षण एकमात्र रास्ता है। जो भी साधन आवश्यक होंगे, प्रशासन सहयोग करेगा। अकुशल श्रमिकों से काम कराने वालों और लापरवाही बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।"

 बी.एन. सिंह, जिलाधिकारी, सोनभद्र


मौके पर रही अधिकारियों की मौजूदगी:

निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी ओबरा विवेक कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी हेमंत कुमार सिंह, अपर जिला सूचना अधिकारी विनय कुमार सिंह, असिस्टेंट ट्रेनिंग ऑफिसर आर.पी. सिंह व अन्य विभागीय कर्मचारी उपस्थित रहे।

मुख्य बिंदु:

 * खनन सुरक्षा के लिए 12 से 20 दिन की ट्रेनिंग अनिवार्य।

 * सोनभद्र में लाखों अकुशल श्रमिक, लेकिन ट्रेनिंग का आंकड़ा बेहद कम।

 * मार्च 2026 तक तैयार होगा सेंटर का अपना नया भवन।




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