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सोनभद्र की प्राचीन चट्टानों में छिपा है 'सफेद सोना', म्योरपुर में लिथियम मिलने के प्रबल संकेत

by on | 2026-01-03 20:41:24

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सोनभद्र की प्राचीन चट्टानों में छिपा है 'सफेद सोना', म्योरपुर में लिथियम मिलने के प्रबल संकेत


​सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में स्थित म्योरपुर ब्लॉक की पहाड़ियाँ अब देश की आर्थिक किस्मत बदल सकती हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध छात्रों के एक हालिया अध्ययन ने म्योरपुर की लगभग ढाई अरब वर्ष पुरानी रूपांतरित (Metamorphic) चट्टानों में लिथियम होने की संभावना जताई है।
​शोध के अनुसार, म्योरपुर के रनटोला स्थित जमतिहवा नाला, मुर्धवा और खांड पत्थर नाला से एकत्र किए गए नमूनों की खनिज संरचना दुनिया के अन्य लिथियम संपन्न क्षेत्रों से मेल खाती है। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि इन चट्टानों का भूवैज्ञानिक इतिहास और खनिजीय लक्षण दुर्लभ धातुओं की उपस्थिति की ओर इशारा करते हैं। वहीं, चोपन ब्लॉक के झिरगाडंडी में पाई जाने वाली ग्रेनाइटिक चट्टानें, जो सोन वैली की प्राचीनतम संरचनाओं में से हैं, इस पूरे क्षेत्र को खनिज अन्वेषण की दृष्टि से 'हॉटस्पॉट' बनाती हैं।
​1. लिथियम क्या है? (सफेद सोना)
​लिथियम (Lithium - Li) आवर्त सारणी (Periodic Table) का तीसरा तत्व है। इसकी कुछ खास विशेषताएं इसे अनमोल बनाती हैं:
​सबसे हल्का ठोस: यह दुनिया की सबसे हल्की धातु है। यह इतनी मुलायम होती है कि इसे चाकू से काटा जा सकता है।
​अत्यधिक प्रतिक्रियाशील: यह हवा और पानी के साथ बहुत तेजी से क्रिया करता है, इसलिए इसे तेल में डुबोकर रखा जाता है।
​ऊर्जा का भंडार: इसमें बिजली को स्टोर करने (Energy Density) की गजब की क्षमता होती है।
​2. इसका उपयोग कहाँ होता है?
​आज की डिजिटल और हरित दुनिया लिथियम के बिना अधूरी है:
​इलेक्ट्रिक वाहन (EV): कार, बस और स्कूटर की बैटरी बनाने में इसका सबसे मुख्य उपयोग होता है।
​गैजेट्स: आपके हाथ में मौजूद स्मार्टफोन, लैपटॉप, और स्मार्टवॉच की रिचार्जेबल बैटरी लिथियम से ही बनी होती है।
​सौर ऊर्जा: सोलर पैनल से बनने वाली बिजली को स्टोर करने के लिए बड़ी लिथियम बैटरियों का इस्तेमाल होता है।
​मेडिकल: बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी मानसिक बीमारियों के इलाज में भी लिथियम का उपयोग दवाओं के रूप में किया जाता है।
​3. सोनभद्र के लिए इसका क्या महत्व है?
​सोनभद्र के म्योरपुर में ढाई अरब वर्ष पुरानी चट्टानों में लिथियम मिलने की संभावना का मतलब है:
​आर्थिक विकास: भारत वर्तमान में अपनी लिथियम जरूरतों के लिए चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों पर निर्भर है। यहाँ भंडार मिलने से अरबों रुपयों की विदेशी मुद्रा बचेगी।
​ग्रीन एनर्जी का केंद्र: सोनभद्र पहले से ही बिजली उत्पादन का केंद्र है, अब यह भविष्य की 'क्लीन एनर्जी' का भी हब बन सकता है।
​लिथियम आयन बैटरी की कार्यप्रणाली:
एक साधारण लिथियम बैटरी में आयन एनोड (Anode) और कैथोड (Cathode) के बीच घूमते हैं। जब आप फोन चार्ज करते हैं, तो आयन एक तरफ जाते हैं और उपयोग के समय दूसरी तरफ, जिससे बिजली पैदा होती है।



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