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सियासत के 'अजेय' योद्धा के आंगन में टूटा दुखों का पहाड़: ओमप्रकाश के भतीजे के निधन पर उमड़ा हिंदुस्तान

by on | 2025-12-31 13:23:53

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सियासत के 'अजेय' योद्धा के आंगन में टूटा दुखों का पहाड़: ओमप्रकाश के भतीजे के निधन पर उमड़ा हिंदुस्तान

सियासत के 'अजेय' योद्धा के आंगन में टूटा दुखों का पहाड़: ओमप्रकाश सिंह के भतीजे के निधन पर उमड़ा हिंदुस्तान
​गाजीपुर/वाराणसी: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसी शख्सियत जो हार हो या जीत, हमेशा एक समान ऊर्जा और मुस्कान के साथ जनता के बीच खड़ी रही—सपा महासचिव व पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह। दशकों से दूसरों के दुख-सुख में साझीदार बनने वाले इस जननेता पर तब दुखों का वज्रपात हुआ जब उनके छोटे भाई शैलेश सिंह के इकलौते पुत्र रघुराज सिंह का आकस्मिक निधन हो गया।


​टूट गईं दलों की सीमाएं, धुर विरोधी भी पहुंचे ओपी के घर 
जब ओमप्रकाश सिंह अपने पैतृक आवास पर शोकाकुल परिवार के साथ बैठे, तो वहां का दृश्य भारतीय राजनीति की एक विरल तस्वीर पेश कर रहा था। उन्हें सांत्वना देने के लिए देश भर से लोगों का तांता लग गया। इस शोक सभा में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता पूरी तरह गौण दिखी। एक तरफ मुख्तार अंसारी के पुत्र अब्बास व उमर अंसारी मौजूद थे, तो दूसरी ओर बृजेश सिंह और सुशील सिंह की मौजूदगी ने सबको चौंका दिया। बाहुबली और रसूखदार कहे जाने वाले चेहरों—अभय सिंह, अजय खलनायक, सुधीर सिंह और धनंजय राय 'गुड्डू' ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
​दिग्गजों का जमावड़ा
शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में सपा के कद्दावर नेता शिवपाल सिंह यादव, माता प्रसाद पांडेय, सांसद वीरेंद्र सिंह, सनातन पांडेय, राजीव राय और शामिल रहे। वहीं सत्ता पक्ष से परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह , पूर्व मंत्री नारद राय ,सपना सिंह और विजय मिश्रा सहित लाखों समर्थकों ने ओमप्रकाश सिंह के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई। यह भीड़ गवाह थी कि जो नेता दशकों तक जनता के लिए एक पैर पर खड़ा रहा, आज पूरा देश उसके आंसू पोंछने के लिए खड़ा है।

​जनसेवा का तपस्वी आज अपनों के लिए मौन है... 💔
​वो चेहरा जो कभी हार से नहीं डिगा, जिसकी रफ्तार कभी कम नहीं हुई, आज अपने भतीजे रघुराज सिंह के असामयिक जाने से गहरे दुख में है। सपा महासचिव ओमप्रकाश सिंह ने अपना पूरा जीवन समाज के लिए खपा दिया, और आज जब उनके परिवार पर पहाड़ टूटा, तो पूरा देश उनके आंगन में उमड़ पड़ा।
​आज गाजीपुर के उस घर में कोई 'दुश्मन' नहीं था, कोई 'पार्टी' नहीं थी। वहां शिवपाल यादव थे तो दयाशंकर सिंह भी थे, वहां अंसारी परिवार था तो बृजेश सिंह भी थे। यह ओमप्रकाश सिंह जी के व्यक्तित्व की ताकत है कि आज धुर विरोधी भी एक कतार में खड़े होकर सांत्वना दे रहे हैं।



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