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जननेता का संघर्ष: सोनभद्र के अन्नदाताओं के लिए डॉ. धर्मवीर तिवारी ने बुलंद की आवाज, भ्रष्टाचार के खिलाफ खोला मोर्चा

by admin@bebak24.com on | 2025-12-23 20:39:27

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जननेता का संघर्ष: सोनभद्र के अन्नदाताओं के लिए डॉ. धर्मवीर तिवारी ने बुलंद की आवाज, भ्रष्टाचार के खिलाफ खोला मोर्चा


अजय सिंह
सोनभद्र । जनपद की राजनीति में डॉ. धर्मवीर तिवारी एक ऐसे जननेता के रूप में पहचाने जाते हैं, जिनका मुख्य सरोकार आम लोगों की आवाज बनना रहा है। पीड़ितों की पीड़ा सुनना और उनके हक के लिए संघर्ष करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है। विपक्षी सरकारों के समय अपने तीखे तेवरों से प्रशासन के दांत खट्टे करने वाले डॉ. तिवारी ने पूरे जनपद में कार्यकर्ताओं का एक मजबूत कैडर खड़ा किया है। हालांकि चुनावी राजनीति के समीकरणों ने उन्हें सदन तक पहुँचने का अवसर नहीं दिया, लेकिन आज भी जनपद के लोग अपनी अपेक्षाओं को लेकर उन्हीं के पास पहुँचते हैं। इसी कड़ी में, अब उन्होंने किसानों के साथ हो रहे अन्याय को लेकर मोर्चा खोल दिया है।
धान खरीद में 'सोनभद्र बनाम चंदौली': दोहरा मापदंड क्यों? पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. धर्मवीर तिवारी ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को प्रेषित एक कड़े पत्र में स्थानीय प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है। उन्होंने साक्ष्यों के साथ यह सवाल उठाया है कि आखिर सोनभद्र के किसानों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
​पत्र में उल्लेख है कि पड़ोसी जनपद चंदौली में प्रशासन किसानों से प्रति बीघा 15 कुंतल धान की खरीद कर रहा है।
​इसके विपरीत, सोनभद्र में यह सीमा मात्र 10 कुंतल प्रति बीघा तय की गई है।
​इस भेदभावपूर्ण नीति के कारण जिले का किसान अपनी मेहनत की उपज को कम दामों पर बेचने के लिए विवश है।

डॉ. तिवारी ने एआर कोऑपरेटिव और डिप्टी आरएमओ पर शासन को गुमराह करने और गलत रिपोर्ट भेजने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भ्रष्ट अधिकारी अपनी जेब भरने के चक्कर में सरकार की छवि को धूमिल कर रहे हैं। पत्र के माध्यम से निम्नलिखित प्रमुख मांगें की गई हैं:
​धान खरीद शुरू होने से पहले और बाद में मिलरों के स्टॉक की सघन जांच हो ताकि बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो सके।
​बिना स्थलीय निरीक्षण के कागजी रिपोर्ट तैयार करने वाली सर्वे एजेंसी पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
​किसानों के मोटे और हाइब्रिड अनाज की भी सरकारी स्तर पर खरीद सुनिश्चित हो।
​हवा-हवाई सर्वे से किसान बेहाल जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि सर्वे एजेंसियों ने जमीन पर उतरे बिना ही रिपोर्ट तैयार कर दी, जिससे ऑनलाइन पंजीकरण में भारी विसंगतियां पैदा हो गई हैं। जमीन के वास्तविक रकबे के स्थान पर केवल बेचे गए अंश को मान्य करने की तकनीकी गड़बड़ी के कारण किसान तहसीलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
​"हमारी सरकार किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन अधिकारियों और मिलरों का गठजोड़ इसे पटरी से उतार रहा है। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी ही चाहिए।"
— डॉ. धर्मवीर तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष (भाजपा)
​इस अभियान में अरविंद पांडेय, जयशंकर, देवराम, नारायण और सुरेश कुमार सहित भारी संख्या में किसान प्रतिनिधियों ने डॉ. तिवारी के नेतृत्व में अपनी एकजुटता प्रदर्शित की है।



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