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बिहार में बड़ा फैसला: अब जमीन के दस्तावेजों में लिखा जाएगा 'भूमिहार ब्राह्मण', डिप्टी सीएम का ऐतिहासिक एलान

by admin@bebak24.com on | 2025-12-22 21:14:35

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बिहार में बड़ा फैसला: अब जमीन के दस्तावेजों में लिखा जाएगा 'भूमिहार ब्राह्मण', डिप्टी सीएम का ऐतिहासिक एलान

मुजफ्फरपुर/पटना | बिहार में पिछले कई महीनों से 'भूमिहार' बनाम 'भूमिहार ब्राह्मण' को लेकर चल रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मुजफ्फरपुर में एक जनसंवाद के दौरान बड़ा एलान करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जमीन के सरकारी दस्तावेजों में अब केवल भूमिहार नहीं, बल्कि 'भूमिहार ब्राह्मण' लिखा जाएगा।


जनता दरबार में गूँजी 'पहचान' की लड़ाई

मुजफ्फरपुर के बाबा साहब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय में आयोजित 'भूमि सुधार जनसंवाद' कार्यक्रम में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब एक व्यक्ति ने अपनी व्यथा सुनाई। फरियादी ने शिकायत की कि:

- उनके पुराने खतियान में जाति 'भूमिहार ब्राह्मण' दर्ज थी।

- लेकिन नए दस्तावेजों और सर्वे की प्रक्रियाओं में इसे बदलकर केवल 'भूमिहार' कर दिया गया है।

- समाज के बड़े वर्ग की मांग है कि उनकी मूल पहचान को दस्तावेजों में न बदला जाए।


डिप्टी सीएम का 'ऑन द स्पॉट' फैसला

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विजय कुमार सिन्हा ने मंच से ही अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा:

"सरकार के जमीन संबंधित दस्तावेजों में कहीं सिर्फ भूमिहार नहीं लिखें, जहाँ भी लिखें भूमिहार ब्राह्मण ही लिखें। जो खतियान में पहले लिखा गया था, वही सही होगा। इसमें कोई गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

उन्होंने मौके पर मौजूद सभी अंचल अधिकारियों (CO) और भूमि सुधार विभाग के आला अफसरों को निर्देश दिया कि खतियान और रजिस्टर-2 में सुधार की प्रक्रिया को तत्काल सुनिश्चित किया जाए।


विवाद की जड़: जातीय जनगणना और सवर्ण आयोग

- बिहार में यह मुद्दा तब से गरमाया हुआ है जब जातीय जनगणना के दौरान कई जातियों को उप-जातियों में बाँटने की कोशिश हुई थी।

- भूमिहार समाज का विरोध: समाज ने 'बाभन' या अन्य नामों की जगह एक गौरवशाली पहचान की मांग की थी।

- सवर्ण आयोग में फूट: इस मुद्दे पर सवर्ण आयोग के सदस्य भी दो गुटों में बंट गए थे।

- सरकार की उलझन: मामला सरकार के पाले में था, लेकिन विजय सिन्हा के इस ताजा आदेश ने अब सरकार के रुख को साफ कर दिया है।


अधिकारियों को सख्त हिदायत

डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि यह किसी एक जाति विशेष की बैठक नहीं, बल्कि बिहारियों के कल्याण का मंच है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आम आदमी की समस्या का समाधान ही सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को ताकीद की कि जो पुरानी व्यवस्था (भूमिहार ब्राह्मण) पहले से चलती आ रही थी, उसमें कोई अनावश्यक बदलाव कर जनता को परेशान न किया जाए।



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