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जल जीवन मिशन की खुली पोल: बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण, 'कोन' में फूटा गुस्सा

by admin@bebak24.com on | 2025-12-22 20:07:38

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जल जीवन मिशन की खुली पोल: बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण, 'कोन' में फूटा गुस्सा


फ्लोराइडयुक्त गंदा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण; कार्यदायी संस्था पर भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप

कोन (सोनभद्र)। जनपद के नवसृजित विकास खंड कोन में 'हर घर नल योजना' दम तोड़ती नजर आ रही है। जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों की लागत से बनी हर्रा-कदरा ग्राम समूह पेयजल योजना धरातल पर पूरी तरह विफल साबित हो रही है। महीनों से नलों में पानी न आने से आक्रोशित ग्रामीणों ने सोमवार को मझिगवां में जोरदार प्रदर्शन किया और कार्यदायी संस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

​कागजों में 'फुल' सप्लाई, हकीकत में नल 'ड्राई'

​ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था विष्णु प्रकाश आर. पुंगलिया लिमिटेड ने कागजों पर कार्य पूर्ण दिखाकर शासन को गुमराह किया है। कई गांवों में आधार कार्ड लेकर कनेक्शन तो दे दिए गए, लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद भी एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ। आरोप है कि संस्था ने ग्राम प्रधानों और जल समितियों से साठगांठ कर 'पूर्ण जलापूर्ति' का फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लिया है, जबकि धरातल पर पाइपलाइन चोक है और सप्लाई ठप पड़ी है।

​फ्लोरोसिस का दंश: बीमार हो रही नई पीढ़ी

​क्षेत्र के कचनरवा, असनाबांध और कुड़वा जैसे फ्लोरोसिस प्रभावित इलाकों में स्थिति भयावह है। शुद्ध पानी न मिलने के कारण ग्रामीण नदी-नालों और चुआंड का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। जिला पंचायत सदस्य छविंद्र नाथ चेरो और समाजसेवी बिहारी प्रसाद यादव ने बताया कि फ्लोराइडयुक्त पानी से बच्चों के दांत पीले पड़ रहे हैं और लोगों की रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो रही है। उन्होंने मांग की है कि ऐसी लापरवाह संस्था को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए।

​मुख्यमंत्री पोर्टल की शिकायतें भी बेअसर

​प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि कचनरवा के असनाबांध वार्ड संख्या-3 सहित कई इलाकों में महीनों से आपूर्ति बाधित है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और पोर्टल पर कई बार की गई, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। सोन नदी में बने 'इंटेक वेल' का जलस्तर गिरने और तकनीकी खामियों के कारण बागेसोती, बड़ाप और सिंगा जैसे गांवों में हाहाकार मचा है।

​क्या कहते हैं जिम्मेदार?

​मामले की गंभीरता को देखते हुए जल निगम के अधिशासी अभियंता अरुण सिंह ने कहा कि समस्याओं का संज्ञान लिया गया है और शीघ्र समाधान का प्रयास किया जाएगा। वहीं, दूसरी ओर कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। अब बड़ा सवाल यह है कि प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना आखिर कब तक भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेगी?



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