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रेणुका नदी में ओबरा तापीय परियोजना की राखड़ गिरने से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

by admin@bebak24.com on | 2025-12-21 20:54:27

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रेणुका नदी में ओबरा तापीय परियोजना की राखड़ गिरने से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा


• जल सत्याग्रह: ग्रामीणों ने नदी के बीच खड़े होकर जताया विरोध, ठोस कार्रवाई की मांग

• संकट: खेती चौपट, पशुओं की मौत और गंभीर बीमारियों की चपेट में आए कई गांव

सोनभद्र (ब्यूरो)। ओबरा तहसील क्षेत्र के पनारी ग्राम पंचायत स्थित चकाड़ी और गुडूर के बीच रेणुका नदी में तापीय परियोजना की राखड़ गिरने से रविवार को स्थिति तनावपूर्ण हो गई। राखड़ के प्रदूषण से आक्रोशित ग्रामीणों ने 'सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी' के बैनर तले नदी के पानी में उतरकर जल सत्याग्रह किया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि अब कोरे आश्वासनों का समय बीत चुका है, उन्हें धरातल पर ठोस कार्रवाई चाहिए।

जहरीला हो रहा पानी, बढ़ रही बीमारियां

सत्याग्रह में शामिल ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तापीय परियोजना से निकलने वाली राखड़ (ऐश) खेतों को बर्बाद करती हुई सीधे रेणुका नदी में मिल रही है। इससे न केवल उपजाऊ भूमि बंजर हो रही है, बल्कि मवेशी भी असमय काल के गाल में समा रहे हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, प्रदूषित पानी और उड़ती राखड़ के कारण क्षेत्र में कैंसर, मानसिक विकार, महिलाओं में त्वचा रोग, अस्थमा और टाइफाइड जैसी बीमारियां महामारी की तरह फैल रही हैं। नदी का पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो गया है और जलीय जीव विलुप्त हो रहे हैं।

नियमों की अनदेखी का आरोप

सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी के संयोजक रामेश्वर प्रसाद ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राखड़ का बहाव तत्काल नहीं रोका गया, तो आने वाले दिनों में हजारों की संख्या में ग्रामीण बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

प्रबंधन ने स्वीकार की चूक

जनाक्रोश की सूचना पर मौके पर पहुंचे ओबरा तापीय परियोजना के उप महाप्रबंधक ए.के. राय ने स्वीकार किया कि ओवरफ्लो होने के कारण राखड़ नदी तक पहुंची है। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है और भविष्य में नदी में राखड़ नहीं जाने दी जाएगी। साथ ही, गर्मी के दिनों में राखड़ उड़ने से रोकने के लिए वाटर स्प्रिंकलर व अन्य पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।

 ग्रामीणों ने भरी हुंकार

प्रशासनिक वादों के बावजूद ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। सत्याग्रह में मुख्य रूप से अजय भारती, अखिलेश कन्नौजिया, रामविलास साहनी, हरीचंद, रामजानकी, रामनिहोर सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्रदूषण पूरी तरह बंद नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।



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