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भागवत का बयान: फ्रांस-अल्बानिया जैसे प्रयास भारत में भी, बोले- आंदोलन का उद्देश्य समाधान हो

by on | 2026-10-20 15:32:48

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भागवत का बयान: फ्रांस-अल्बानिया जैसे प्रयास भारत में भी, बोले- आंदोलन का उद्देश्य समाधान हो

नागपुर | बेबाक24 न्यूज़

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी के अवसर पर कहा कि आपसी विभाजन ने भारत को कमजोर किया है और राष्ट्रीय एकता ही देश की शक्ति है। नागपुर में शस्त्र पूजन और संबोधन के दौरान उन्होंने फ्रांस और अल्बानिया में हो रही घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में भी ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समाधान निकालना होना चाहिए, न कि राजनीतिक स्वार्थ या सस्ती लोकप्रियता हासिल करना।

बंटवारे से कमजोर हुआ समाज

भागवत ने कहा कि जब भाषा, जाति, संप्रदाय और समुदाय की पहचान राष्ट्रीय एकता से ऊपर हो जाती है, तो समाज में विभाजन बढ़ता है। उनके अनुसार, भारत ने जब भावनात्मक एकता और राष्ट्रीयता को प्राथमिकता दी, तब उसकी स्थिति मजबूत रही। लेकिन आपसी जुड़ाव और अपनत्व की भावना कमजोर पड़ने पर समाज में भय और असुरक्षा बढ़ी।

उन्होंने संत रविदास की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता, भक्ति और स्वधर्म के प्रति निष्ठा को महत्वपूर्ण बताया। इस वर्ष संत रविदास की 650वीं जयंती के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उनके संदेश ने कठिन परिस्थितियों में भी समाज का मनोबल बनाए रखने में भूमिका निभाई।

फ्रांस और अल्बानिया का जिक्र

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि दुनिया फ्रांस और अल्बानिया में हो रही घटनाओं पर नजर रख रही है और भारत में भी ऐसे प्रयास दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करना स्वाभाविक है, लेकिन आंदोलन से समाज को समाधान का रास्ता मिलना चाहिए।

भागवत ने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक महत्वाकांक्षा और निजी स्वार्थों के लिए आंदोलनों को प्रभावित करते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत, हिंदू समाज और संघ को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं। ये उनके संबोधन में व्यक्त विचार और आरोप हैं।

दुनिया भारत की ओर देख रही है

भागवत ने कहा कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के कारण दुनिया का ध्यान उसकी ओर गया है। उन्होंने तर्क दिया कि भौतिक समृद्धि और अत्यधिक उपभोग पर आधारित जीवनशैली के बावजूद कई समाज पारिवारिक जीवन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संबंधों से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

उनके अनुसार, भारत की विविधता के बीच एकता बनाए रखने और विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन स्थापित करने की क्षमता दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

राष्ट्रीय एकता और आपसी सम्मान पर जोर

भागवत ने कहा कि भारतीयों की एकता किसी लेन-देन या शर्त पर आधारित नहीं है। उन्होंने संगठित और सशक्त हिंदू समाज की बात करते हुए कहा कि उनके अनुसार इसका उद्देश्य अन्य धर्मों के प्रति सम्मान या राष्ट्रीय एकता का विरोध करना नहीं, बल्कि भावनात्मक एकता, सद्भाव और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है।

कैप्टन स्मित मच्छार के साहस का उल्लेख

अपने संबोधन में भागवत ने कैप्टन स्मित मच्छार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थिति में स्मित ने जो किया, वह उनके संस्कारों और परंपराओं से प्रेरित था। भागवत के अनुसार, ऐसे निर्णायक क्षणों में व्यक्ति के भीतर विकसित मूल्य और संस्कार सामने आते हैं।

बेबाक24 टेक

विजयादशमी पर भागवत के संबोधन में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और आंदोलनों की भूमिका प्रमुख विषय रहे। उन्होंने राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित गतिविधियों को लेकर चिंता जताई और कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों का लक्ष्य समाधान होना चाहिए। फ्रांस, अल्बानिया और भारत में कथित समान प्रयासों को लेकर उनके दावों का स्वतंत्र संदर्भ और प्रमाण अलग से देखना महत्वपूर्ण है।



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