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भारत-कनाडा व्यापार समझौते की तैयारी तेज, 2026 में डील संभव

by on | 2026-10-15 14:03:05

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भारत-कनाडा व्यापार समझौते की तैयारी तेज, 2026 में डील संभव

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को लेकर बातचीत तेज हो गई है। दोनों देशों ने 2026 के अंत तक समझौता पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अमेरिका की ओर से कनाडा पर लगाए गए आयात शुल्क के बाद कनाडा अपने व्यापारिक साझेदारों का दायरा बढ़ाने में जुटा है। इसी बीच 30 साल से अधिक समय बाद कनाडा ने भारत में अपना बड़ा व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजा है, जिसमें करीब 300 कारोबारी और अधिकारी शामिल हैं।

इस समझौते का उद्देश्य केवल आयात शुल्क कम करना नहीं, बल्कि वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना भी है। हालांकि, कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर सहमति बनाना दोनों देशों के लिए चुनौती रह सकता है।

8 अरब डॉलर के करीब पहुंचा द्विपक्षीय व्यापार

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और कनाडा के बीच करीब 7.95 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। इसमें भारत ने कनाडा को 4.67 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि कनाडा से 3.28 अरब डॉलर का आयात हुआ।

दोनों देशों के बीच 2021 से 2024 तक व्यापार में बढ़ोतरी हुई, लेकिन इसके बाद गिरावट दर्ज की गई। इसकी एक वजह हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के संबंधों में आया तनाव रहा। तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस मामले में भारत पर आरोप लगाए थे, जिन्हें भारत ने खारिज किया था।

मार्च 2025 में मार्क कार्नी के कनाडा का प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों ने संबंध सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाए। अब व्यापार समझौते के जरिए आर्थिक सहयोग को नई गति देने की कोशिश हो रही है।

2030 तक 50 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

भारत और कनाडा ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए दोनों देश ऊर्जा, खनिज, विनिर्माण, तकनीक और सेवा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहते हैं।

कनाडा को संभावित लाभ: भारत कनाडा के लिए बड़ा उपभोक्ता बाजार बन सकता है। कनाडा भारत को तरलीकृत प्राकृतिक गैस, यूरेनियम, उर्वरक और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति बढ़ाने के अवसर तलाश रहा है। इससे कनाडा के निर्यात को विस्तार मिल सकता है और भारत के साथ उसका व्यापार घाटा कम करने में मदद मिल सकती है।

भारत को संभावित लाभ: भारतीय कंपनियों को कनाडा के बाजार में दवाओं, कपड़ों, इंजीनियरिंग उत्पादों, रसायनों और इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्यात में बेहतर अवसर मिल सकते हैं। भारत को कनाडा से ऊर्जा और कच्चे माल की आपूर्ति के नए विकल्प भी मिल सकते हैं।

सेवा और तकनीक के क्षेत्र में भी अवसर

समझौते के तहत सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल सेवाओं और पेशेवर सेवाओं में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं हैं। भारतीय कंपनियों और कुशल पेशेवरों को कनाडा में काम करने के अधिक अवसर मिल सकते हैं, जबकि कनाडा के प्रौद्योगिकी और संसाधन उद्योगों को भारतीय कंपनियों की विशेषज्ञता का लाभ मिल सकता है।

दोनों देश एयरोस्पेस, स्वच्छ तकनीक, अनुसंधान और विकास, साइबर सुरक्षा तथा आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ा सकते हैं। हालांकि, इन संभावित लाभों का वास्तविक स्तर समझौते की अंतिम शर्तों पर निर्भर करेगा।

क्या 2026 में पूरी हो जाएगी डील?

दोनों देशों ने 2026 के अंत तक समझौता पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वार्ता के 5 दौर पूरे हो चुके हैं और कई तकनीकी अध्यायों पर सहमति बनी है। कनाडाई प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान बाकी मुद्दों पर आगे बातचीत की उम्मीद है।

हालांकि, तय समयसीमा में समझौता पूरा होना अभी निश्चित नहीं है। दोनों देशों को आयात शुल्क में छूट, उत्पादन के मूल स्थान से जुड़े नियम और गैर-शुल्क बाधाओं जैसे मुद्दों पर सहमति बनानी होगी।

कृषि और डेयरी क्षेत्र बन सकते हैं बड़ी चुनौती

समझौते की राह में सबसे बड़ी मुश्किल संवेदनशील क्षेत्रों को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोलने को लेकर आ सकती है। भारत के लिए कृषि और डेयरी क्षेत्र में व्यापक रियायतें देना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इसके अलावा, दोनों पक्षों को यह तय करना होगा कि किन वस्तुओं पर शुल्क घटाया जाए, किन सेवाओं को अधिक पहुंच मिले और निवेश के लिए क्या नियम हों। इन मुद्दों पर सहमति बनने की गति ही समझौते की समयसीमा को प्रभावित करेगी।

बेबाक24 टेक

भारत-कनाडा व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए नए बाजार, निवेश और तकनीकी सहयोग के अवसर खोल सकता है। 2026 के अंत तक डील पूरी करने का लक्ष्य है, लेकिन कृषि, डेयरी और शुल्क संबंधी मतभेदों पर सहमति जरूरी होगी। समझौते का वास्तविक लाभ उसकी अंतिम शर्तों और उन्हें लागू करने के तरीके पर निर्भर करेगा।



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