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नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान-साहिल को मृत्युदंड, 590 दिन में 126 सुनवाइयों के बाद फैसला

by on | 2026-10-15 13:24:12

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नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान-साहिल को मृत्युदंड, 590 दिन में 126 सुनवाइयों के बाद फैसला

मेरठ | बेबाक24 न्यूज़

मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। हत्या के 590 दिन बाद आए इस फैसले तक पहुंचने के लिए अदालत में 126 तारीखें लगीं और 22 गवाहों के बयान दर्ज हुए। पुलिस ने जांच के 54 दिनों के भीतर करीब 1,000 पन्नों का आरोप-पत्र दाखिल किया था।

54 दिन में आरोप-पत्र, 22 गवाहों की गवाही

सौरभ की हत्या 3 मार्च 2025 को की गई थी। पुलिस ने मामले में जांच के बाद 12 मई 2025 को अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य और गवाहों के बयान पेश किए। 30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।

बचाव पक्ष ने मांगी नरमी

सजा पर सुनवाई के दौरान मुस्कान ने अपनी दोनों बेटियों के भविष्य का हवाला देते हुए अदालत से रहम की अपील की। बचाव पक्ष ने उसके माता-पिता का भी उल्लेख किया। अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों के बीच करीब 45 मिनट तक बहस हुई।

जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने मृत्युदंड की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय के कई फैसलों का हवाला दिया। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि अपराध की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए इससे कम सजा देना उचित नहीं होगा।

3 मार्च को हत्या, नीले ड्रम में छिपाया शव

सौरभ हत्याकांड की प्रमुख तारीखें

  • 24 फरवरी 2025: सौरभ लंदन से मेरठ लौटा।

  • 3 मार्च 2025: सौरभ की हत्या की गई।

  • 4 मार्च 2025: शव को नीले ड्रम में छिपाकर सीमेंट से ढकने की बात सामने आई। इसके बाद दोनों आरोपी शिमला-मनाली घूमने गए।

  • 18 मार्च 2025: सौरभ के भाई की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज हुई और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

  • 19 मार्च 2025: घर से नीला ड्रम काटकर शव बरामद किया गया।

  • 12 मई 2025: अदालत में आरोप-पत्र दाखिल हुआ।

  • 30 सितंबर 2026: अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया।

  • 14 अक्टूबर 2026: दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।

फैसले के बाद भावुक हुआ परिवार

फैसला सुनाए जाने के दौरान सौरभ की मां रेनू देवी, भाई बबलू और परिवार के अन्य सदस्य अदालत में मौजूद थे। सजा का ऐलान होते ही परिवार की महिलाओं की आंखों में आंसू छलक पड़े।

रेनू देवी ने कहा कि जिस अपराध के लिए दोनों को दोषी ठहराया गया है, उसके लिए मृत्युदंड ही उचित सजा है। उन्होंने बताया कि सौरभ परिवार को बेहतर जीवन देने के लिए लंदन में काम करता था और हर महीने घर के खर्च के लिए 50,000 रुपये भेजता था। वह 24 फरवरी 2025 को अपनी पत्नी और बेटी का जन्मदिन मनाने भारत लौटा था।

सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ने की बात

सौरभ के भाई बबलू ने कहा कि इस हत्याकांड ने परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है। उनके मुताबिक, पिता मुन्ना लाल अब भी मानसिक रूप से परेशान हैं और मां को भी इस दुख से उबरने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि दोषी सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करते हैं, तो परिवार उच्चतम न्यायालय तक कानूनी लड़ाई लड़ेगा।

बड़ी बेटी को अपनाने के लिए तैयार दादी

सौरभ की 7 वर्षीय बड़ी बेटी पीहू फिलहाल अपने नाना-नानी के पास रह रही है। रेनू देवी ने कहा कि यदि बच्ची के नाना-नानी उसे सौंपने का फैसला करते हैं, तो सौरभ का परिवार उसकी जिम्मेदारी उठाने और उसे अपनाने के लिए तैयार है।

परिवार ने मुस्कान की छोटी बेटी को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। रेनू देवी का दावा है कि बच्ची साहिल की है। परिवार ने कहा कि वह बच्ची का डीएनए परीक्षण कराने की मांग नहीं करेगा।

बेबाक24 टेक

सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला अदालत के मृत्युदंड के फैसले के साथ मुकदमे का एक अहम चरण पूरा हुआ है। हालांकि, दोषियों के पास ऊपरी अदालत में अपील का कानूनी विकल्प है। ऐसे में अंतिम कानूनी स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।



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