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राज्यसभा-MLC में फिर दरकिनार? पूर्वांचल से लेकर पश्चिम तक 'भूमिहार-त्यागी' समाज का गुस्सा बेकाबू!

by on | 2026-10-05 23:29:32

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राज्यसभा-MLC में फिर दरकिनार? पूर्वांचल से लेकर पश्चिम तक 'भूमिहार-त्यागी' समाज का गुस्सा बेकाबू!

​लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्यसभा 2026 के लिए 8 महारथियों को मैदान में उतारकर भले ही सोशल इंजीनियरिंग का बड़ा ढोल पीटा हो, लेकिन इस पूरी पटकथा में एक बहुत बड़ा पेंच फंस गया है!

​पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक भाजपा का कोर और कैडर वोटर माना जाने वाला 'भूमिहार-त्यागी-ब्राह्मण' समाज एक बार फिर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। लोकसभा चुनावों के बाद अब राज्यसभा और MLC चयन में भी इस समाज को किनारे किए जाने से जमीनी कार्यकर्ताओं में अंदर ही अंदर भारी आक्रोश सुलग रहा है।

​लोकसभा 2024 का जख्म: गाजीपुर में 'कमजोर मोहरा' और मोदी के खट्टे दांत!

​सियासी पंडितों का साफ कहना है कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2024 में भी भूमिहार समाज को तरजीह न देकर भारी राजनीतिक भूल की थी।

​गाजीपुर का सबक: गाजीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर स्थानीय जनाधार और सामाजिक समीकरणों को नजरअंदाज कर बेहद कमजोर प्रत्याशी (पारसनाथ राय) को उतारा गया। नतीजा? सपा के अफजाल अंसारी ने भाजपा को करारी शिकस्त दी।


​पूर्वांचल में नुकसान: गाजीपुर से उठी इस उपेक्षा की आग ने आसपास की कई सीटों पर भाजपा के गणित को बिगाड़ दिया।


​पश्चिमी यूपी में त्यागी समाज की बेरुखी: श्रीकांत त्यागी प्रकरण और राजनीतिक नुमाइंदगी न मिलने से पश्चिमी यूपी (मेरठ, मुजफ्फरनगर, नोएडा, गाजियाबाद) का त्यागी समाज पहले से ही भाजपा से छिटकता दिख रहा है।


​2027 में 'सुपड़ा साफ' होने की आहट? बेबाक सवाल!

​क्या बंधुआ मजदूर है कोर वोटर? भाजपा जिस समाज को अपना 'सदाबहार और पक्का' वोट बैंक मानकर चलती है, क्या उसे हर बार टिकट बंटवारे के समय भूल जाना जायज है?


​संगठन और उच्च सदन में शून्य भागीदारी: लोकसभा में किनारे करने के बाद उम्मीद थी कि राज्यसभा या विधान परिषद (MLC) के रास्ते भूमिहार-त्यागी समाज के बड़े चेहरों को राष्ट्रीय और प्रांतीय राजनीति में जगह मिलेगी, लेकिन इस बार की 8 उम्मीदवारों की सूची ने उस उम्मीद पर पानी फेर दिया।


​2027 का खतरा: अगर यही उपेक्षा जारी रही, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में यह नाराज कोर वोटर या तो घर बैठ जाएगा या फिर नोटा/विपक्ष की तरफ रुख करेगा—जिससे कई सीटों पर भाजपा का 'सुपड़ा साफ' होना तय माना जा रहा है!


​बेबाक टेक

​सोशल इंजीनियरिंग के नाम पर सिर्फ OBC, दलित और नए समीकरणों को साधने की होड़ में अगर भाजपा अपने पुराने 'स्तंभ' (भूमिहार-त्यागी समाज) को ढहा देगी, तो 2027 में लखनऊ के सिंहासन की राह बेहद कठिन हो जाएगी।

​अगर समय रहते इस अंदरूनी असंतोष और सुलगती आग पर काबू नहीं पाया गया, तो राज्यसभा की 8 सीटें जीतने की खुशी 2027 के विधानसभा चुनावों में मायूसी में बदलते देर नहीं लगेगी!



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