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भारत में जनसंख्या नियंत्रण नीति पर पुनर्विचार की जरूरत, ईएसी की रिपोर्ट में चीन का उदाहरण

by admin@bebak24.com on | 2026-09-19 18:21:24

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भारत में जनसंख्या नियंत्रण नीति पर पुनर्विचार की जरूरत, ईएसी की रिपोर्ट में चीन का उदाहरण

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की एक रिपोर्ट में भारत की बदलती जनसांख्यिकीय स्थिति के बीच जनसंख्या नियंत्रण को सरकारी नीति के प्रमुख लक्ष्य के रूप में जारी रखने पर पुनर्विचार की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, देश की कुल प्रजनन दर घटकर 1.9 रह गई है, जबकि जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए 2.1 की प्रजनन दर को प्रतिस्थापन स्तर माना जाता है।

यूपी-बिहार को छोड़कर दर और कम

‘द घोस्ट ऑफ पॉपुलेशन पास्ट’ नाम से जारी रिपोर्ट ईएसी-पीएम के सदस्य संजीव सान्याल की टीम ने तैयार की है। इसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में कुल प्रजनन दर 2.6 और बिहार में 2.9 है। इन दोनों राज्यों को अलग रखने पर राष्ट्रीय प्रजनन दर करीब 1.6 रह जाती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि परिवार नियोजन का उद्देश्य स्वास्थ्य, बच्चों के बीच उचित अंतर या व्यक्तिगत पसंद से जुड़ा हो सकता है, लेकिन बदलती जनसांख्यिकीय परिस्थितियों में सरकारी नीति का लक्ष्य केवल जनसंख्या को नियंत्रित करना नहीं होना चाहिए।

सालाना जन्म में करीब 20 प्रतिशत गिरावट

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सालाना जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या 2001 में 2.93 करोड़ तक पहुंच गई थी। वर्ष 2023 में यह घटकर 2.32 करोड़ रह गई। यानी इस अवधि में सालाना जन्म की संख्या में करीब 20 प्रतिशत कमी आई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में देश में हर साल पैदा होने वाले बच्चों की संख्या करीब 1974 के स्तर पर पहुंच गई है। ईएसी ने कम प्रजनन दर वाले राज्यों में नसबंदी के लिए लाभार्थियों और प्रोत्साहन देने वालों को दी जाने वाली नकद प्रोत्साहन योजनाओं को बंद करने की सिफारिश भी की है।

चीन की जनसंख्या नीति का दिया उदाहरण

रिपोर्ट में चीन के अनुभव को भी भारत के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। इसके अनुसार, चीन में प्रजनन दर 1991 में ही प्रतिस्थापन स्तर से नीचे आ गई थी, लेकिन इसके बाद भी वहां एक बच्चे की नीति और उससे जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था दो दशकों से अधिक समय तक जारी रही।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन में अब कुल प्रजनन दर 1 से भी नीचे पहुंच चुकी है। ईएसी ने इसी अनुभव के आधार पर भारत में कम होती प्रजनन दर और भविष्य की जनसंख्या संरचना को ध्यान में रखते हुए नीतियों की समीक्षा की जरूरत बताई है।

बेबाक24 की राय: रिपोर्ट का मुख्य फोकस भारत में बदलती प्रजनन दर और उसके संभावित जनसांख्यिकीय प्रभावों पर है। इसके आंकड़े संकेत देते हैं कि देश के अलग-अलग राज्यों की स्थिति एक जैसी नहीं है। ऐसे में भविष्य की जनसंख्या नीति में क्षेत्रीय अंतर, परिवारों की व्यक्तिगत पसंद और बदलती आयु संरचना को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।



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