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एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर शुल्क एक साल और, भारतीयों पर बढ़ सकती है मुश्किल

by admin@bebak24.com on | 2026-09-19 18:01:08

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एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर शुल्क एक साल और, भारतीयों पर बढ़ सकती है मुश्किल

वाशिंगटन | बेबाक24 न्यूज़

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा के तहत विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने वाले नियोक्ताओं पर लगाया गया 1 लाख डॉलर का शुल्क एक और साल जारी रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही नए आवेदनों की जांच भी सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं। एच-1बी वीजा पाने वालों में भारतीय नागरिकों की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण इस फैसले का असर भारत से अमेरिका जाने वाले कुशल पेशेवरों पर पड़ सकता है।

किन आवेदकों पर लागू होगा शुल्क?

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार 1 लाख डॉलर का शुल्क मुख्य रूप से नए एच-1बी वीजा के लिए लागू व्यवस्था से जुड़ा है। पहले से छात्र वीजा पर अमेरिका में मौजूद लोगों के नए एच-1बी वीजा मामलों तथा मौजूदा वीजा के नवीनीकरण पर यह शुल्क लागू नहीं था।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस शुल्क का उद्देश्य एच-1बी कार्यक्रम के इस्तेमाल को अधिक लक्षित करना और नियोक्ताओं को अत्यधिक कुशल तथा जरूरी विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति तक सीमित करना है।

राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार 2025 में शुल्क लागू किए जाने के बाद बड़ी सूचना-प्रौद्योगिकी आउटसोर्सिंग कंपनियों के एच-1बी पंजीकरण में 92 प्रतिशत की कमी आई।

आवेदनों की जांच होगी और कड़ी

अमेरिकी प्रशासन ने एच-1बी आवेदनों की जांच को भी सख्त करने का फैसला किया है। विदेश, श्रम और गृह सुरक्षा विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

अधिकारियों को यह भी देखने को कहा गया है कि एच-1बी कर्मचारी के लिए आवेदन करने वाले नियोक्ता ने हाल में इसी तरह के अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से हटाया है या नहीं। इसके अलावा भविष्य में ऐसी छंटनी की योजना की भी जांच की जा सकती है।

श्रम विभाग को पहले जमा किए गए श्रम स्थिति आवेदनों के आंकड़ों की समीक्षा शुरू करने के लिए 30 दिन की समय सीमा दी गई है। समीक्षा के आधार पर कुछ नियोक्ताओं के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जरूरत तय की जाएगी।

ट्रंप प्रशासन का तर्क क्या है?

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि एच-1बी कार्यक्रम विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों की अस्थायी नियुक्ति के लिए बनाया गया था। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि कुछ नियोक्ता, तीसरे पक्ष की नियुक्ति एजेंसियां और आउटसोर्सिंग कंपनियां इस व्यवस्था का गलत इस्तेमाल कर अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार अवसरों को प्रभावित कर रही हैं।

इसी आधार पर प्रशासन ने अमेरिकी कर्मचारियों और स्नातकों के लिए रोजगार के अवसरों की सुरक्षा तथा एच-1बी व्यवस्था को अधिक लक्षित बनाने को फैसले का प्रमुख उद्देश्य बताया है।

हालांकि 1 लाख डॉलर शुल्क लागू करने के फैसले को कानूनी चुनौती भी मिली है और मामला दो संघीय अदालतों में चल रहा है।

भारतीयों पर क्यों पड़ेगा असर?

एच-1बी व्यवस्था में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी काफी बड़ी है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा के 2024 के आंकड़ों के अनुसार मंजूर की गई 3,99,402 एच-1बी याचिकाओं में भारतीय मूल के लाभार्थियों की हिस्सेदारी 71 प्रतिशत थी।

इस वजह से नए शुल्क और कड़ी जांच का असर भारतीय सूचना-प्रौद्योगिकी पेशेवरों और अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे अन्य कुशल कर्मचारियों पर पड़ सकता है। खासतौर पर वे कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं जो बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारियों को एच-1बी के जरिए नियुक्त करती हैं।

असर केवल सूचना-प्रौद्योगिकी तक सीमित नहीं

एच-1बी व्यवस्था का इस्तेमाल केवल सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नहीं होता। स्वास्थ्य सेवाओं, डॉक्टरों, नर्सों और वित्तीय सेवाओं में भी इस वीजा का उपयोग होता है।

अमेरिका के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के डॉक्टर काम करते हैं। ऐसे में शुल्क और जांच की सख्ती का प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग हो सकता है। कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति की लागत और प्रक्रिया दोनों में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिका पर भी पड़ सकता है असर

इस नीति के प्रभाव को लेकर अमेरिकी कंपनियों और विशेषज्ञों के बीच बहस जारी है। एक तरफ प्रशासन इसे अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार हितों से जोड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ कंपनियों के लिए कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता और नियुक्ति लागत को लेकर चिंताएं सामने आ रही हैं।

बड़ी कंपनियां ऐसी परिस्थितियों में कुछ काम दूसरे देशों के केंद्रों से कराने की दिशा में भी जा सकती हैं। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव शुल्क, कानूनी फैसलों और कंपनियों की आगे की रणनीति पर निर्भर करेगा।

बेबाक24 की राय

एच-1बी व्यवस्था में 1 लाख डॉलर शुल्क को एक साल और जारी रखने तथा जांच कड़ी करने से नए विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति महंगी और अधिक जांच वाली प्रक्रिया बन सकती है। भारतीय नागरिकों की एच-1बी में बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण भारत पर इसका प्रभाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि मौजूदा वीजा के नवीनीकरण और कुछ पहले से अमेरिका में मौजूद आवेदकों पर शुल्क लागू नहीं होने की व्यवस्था को भी ध्यान में रखना जरूरी है। आगे का असर कानूनी मामलों और अमेरिकी कंपनियों की नियुक्ति नीतियों में होने वाले बदलावों से अधिक स्पष्ट होगा।



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