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लखनऊ में जयंत का शक्ति प्रदर्शन, ब्राह्मणों पर बढ़ा दांव

by admin@bebak24.com on | 2026-08-30 12:34:28

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लखनऊ में जयंत का शक्ति प्रदर्शन, ब्राह्मणों पर बढ़ा दांव

लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राष्ट्रीय लोकदल ने अपना सामाजिक आधार बढ़ाने की कवायद तेज कर दी है। रविवार को लखनऊ में होने वाला रालोद का राष्ट्रीय सम्मेलन पार्टी की इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सम्मेलन के जरिये पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपने पारंपरिक जाट आधार के साथ ब्राह्मण और गुर्जर समाज को भी जोड़ने का संदेश देगी।

रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी की अगुवाई में होने वाले इस सम्मेलन में करीब 1500 ब्राह्मणों के शामिल होने की तैयारी है। पूर्वांचल के ब्राह्मण नेता बीके शुक्ला भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। जयंत चौधरी के मंच पर पहुंचने के दौरान 21 बटुक स्वस्तिवाचन करेंगे।

सपा से बढ़ी तल्खी के बीच सम्मेलन

लखनऊ में रालोद का यह बड़ा आयोजन ऐसे समय हो रहा है, जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज है। अखिलेश की ओर से रालोद को लेकर की गई ‘चवन्नी से रुपया’ वाली टिप्पणी के बाद दोनों दलों के रिश्तों में तल्खी बढ़ी है।

इसी बीच रालोद राजधानी में अपना शक्ति प्रदर्शन कर रही है। पार्टी का प्रयास है कि चुनाव से पहले संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के साथ नए सामाजिक समूहों के बीच भी अपनी स्वीकार्यता बढ़ाई जाए।

ब्राह्मणों के बाद गुर्जरों पर नजर

रालोद ने ब्राह्मण समाज के बाद गुर्जर मतदाताओं को भी साधने की तैयारी की है। 3 सितंबर को जयंत चौधरी सहारनपुर में गुर्जर सम्मेलन करेंगे। पार्टी का व्यापक सामाजिक समीकरण जाट, ब्राह्मण और गुर्जर मतदाताओं को एक साथ जोड़ने पर केंद्रित दिखाई दे रहा है।

अखिलेश भी ब्राह्मणों को साधने में जुटे

रालोद की रणनीति को सपा की हालिया सक्रियता के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने पूर्व केंद्रीय मंत्री जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित प्रबुद्ध सम्मेलन के जरिए ब्राह्मण समाज को संदेश देने की कोशिश की थी। उन्होंने अपने पीडीए की व्याख्या में ‘पीडी’ को ‘पंडित’ से जोड़ते हुए ब्राह्मणों की राजनीतिक भागीदारी पर जोर दिया।

ऐसे में रालोद का लखनऊ सम्मेलन सिर्फ संगठनात्मक बैठक नहीं, बल्कि 2027 के चुनाव से पहले बदलते सामाजिक समीकरणों के बीच अपनी राजनीतिक जगह मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

रालोद का बढ़ता दायरा कितना असरदार होगा?

रालोद का पारंपरिक प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट मतदाताओं के बीच रहा है। अब पार्टी ब्राह्मण और गुर्जर समाज को जोड़कर अपने प्रभाव का विस्तार मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, यह रणनीति चुनाव में कितनी प्रभावी होगी, इसका फैसला मतदाताओं के रुख और स्थानीय समीकरण करेंगे।

रालोद के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अनुपम मिश्रा का दावा है कि पार्टी 2027 में पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन करेगी। 2022 में रालोद ने सपा गठबंधन के तहत 33 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 8 सीटें जीती थीं। बाद के उपचुनाव में एक और सीट जीतने के बाद विधानसभा में उसकी संख्या 9 हो गई थी।



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