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आईएएस दिव्या मित्तल का इस्तीफा, बोलीं- पद छूटा, सपना नहीं

by admin@bebak24.com on | 2026-08-30 12:33:41

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आईएएस दिव्या मित्तल का इस्तीफा, बोलीं- पद छूटा, सपना नहीं

लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़

आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने करीब 13 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के बाद स्वैच्छिक इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की गई एक भावुक पोस्ट के जरिए दी। अपने संदेश में उन्होंने प्रशासनिक सेवा के दौरान मिले अनुभवों, आम लोगों से बने जुड़ाव और अपनी आगे की यात्रा को याद किया।

वर्ष 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल वर्तमान में राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थीं। इससे पहले वह देवरिया की जिलाधिकारी भी रह चुकी हैं। 6 मई को उन्हें देवरिया के जिलाधिकारी पद से हटाया गया था।

देश लौटकर चुनी प्रशासन की राह

दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में बताया कि साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने बड़े सपने देखे। उन्होंने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से शिक्षा हासिल की। इसके बाद लंदन में नौकरी भी की, लेकिन विदेश में रहते हुए उन्हें अपने देश से दूर होने का एहसास बना रहा।

इसी भावना ने उन्हें भारत लौटने और भारतीय प्रशासनिक सेवा में आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने लिखा कि देश से मिली शिक्षा, आत्मविश्वास और अवसरों का ऋण चुकाने की इच्छा उनके निर्णय के पीछे प्रमुख कारणों में रही।

देवरिया और मीरजापुर से मिली बड़ी सीख

दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक अनुभवों में देवरिया और मीरजापुर की सेवा को विशेष रूप से याद किया। उनके अनुसार, देवरिया ने उन्हें सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना केवल विकल्प नहीं, बल्कि कर्तव्य है। वहीं मीरजापुर ने उन्हें यह समझाया कि असंभव कोई अंतिम सत्य नहीं, बल्कि अक्सर केवल एक धारणा होती है।

उन्होंने मां विंध्यवासिनी के प्रति अपनी आस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्हें महसूस हुआ कि वास्तविक शक्ति किसी पद से नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास और ईश्वर की कृपा से मिलती है।

‘हर सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान है’

दिव्या मित्तल ने आम लोगों के जीवन में बदलाव को अपनी सेवा की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। जमीन का अधिकार मिलने के बाद किसी परिवार के चेहरे की खुशी, दिव्यांग व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन का अवसर और किसान के खेत तक पानी पहुंचना उनके लिए पद और पुरस्कारों से अधिक महत्वपूर्ण रहा।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक काम के दौरान उन्हें यह समझ आया कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति और उसकी उम्मीद जुड़ी होती है। इसलिए व्यवस्था का उद्देश्य केवल कागजी प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि लोगों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करना होना चाहिए।

‘लोगों से मैंने खुद ज्यादा पाया’

अपनी भावुक पोस्ट में दिव्या मित्तल ने लिखा कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि वह समाज को कुछ देने के लिए आई हैं, लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि लोगों से उन्होंने खुद कहीं अधिक पाया।

उन्होंने अपने साथ काम करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों के प्रति भी आभार जताया। उनके मुताबिक, कठिन परिस्थितियों में साथ खड़े रहने वाले इन लोगों ने उनकी प्रशासनिक यात्रा को मजबूत बनाया।

एक बुजुर्ग महिला का आशीर्वाद नहीं भूलीं

दिव्या मित्तल ने लहुरिया दह की पहाड़ी पर रहने वाली एक बुजुर्ग महिला की घटना भी साझा की। उन्होंने बताया कि गांव में पहली बार पानी पहुंचने पर महिला कुछ नहीं बोली, बल्कि कांपते हाथों से उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया।

यह स्मृति उनकी सेवा यात्रा की उन घटनाओं में शामिल रही, जिन्हें वह लंबे समय तक अपने साथ रखना चाहती हैं।

दिव्या मित्तल का इस्तीफा प्रशासनिक सेवा में उनके एक अध्याय का अंत जरूर है, लेकिन उनके संदेश से साफ है कि जनसेवा और देश के लिए देखे गए सपनों को उन्होंने पद से अलग नहीं माना है।



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