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जंगीपुर में सवाल पूछने पर दिव्यांग पत्रकार को धमकी, नोनहरा थाने में तहरीर; सत्ता की हनक के बीच फिर सुलग उठा 'डिजिटल पत्रकारिता' का सवाल

by on | 2026-08-29 21:01:23

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जंगीपुर में सवाल पूछने पर दिव्यांग पत्रकार को धमकी, नोनहरा थाने में तहरीर; सत्ता की हनक के बीच फिर सुलग उठा 'डिजिटल पत्रकारिता' का सवाल

गाजीपुर (बेबाक 24):

2012 के परिसीमन के बाद वजूद में आई जंगीपुर विधानसभा सीट पर एक ही परिवार का सियासी रसूख रहा है। पूर्व पंचायती राज मंत्री स्व. कैलाश यादव, उनके बाद स्व. किस्मतिया देवी और अब उनके पुत्र डॉ. वीरेंद्र यादव यहां की नुमाइंदगी कर रहे हैं। लेकिन सत्ता के इसी गलियारे में जब एक दिव्यांग यूट्यूबर पत्रकार ने जमीनी हकीकत पर सवाल दागा, तो जवाब विकास कार्यों से नहीं, बल्कि धमकियों और अपशब्दों से दिया गया।

क्या है पूरा विवाद?

जंगीपुर की बदहाल सड़कों और ठप पड़े विकास कार्यों पर जब पीड़ित पत्रकार ने विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव से जवाब मांगा, तो उसके बाद धमकियों का सिलसिला शुरू हो गया। आरोप है कि विधायक के समर्थकों ने व्हाट्सएप ग्रुप्स और कॉल पर पत्रकार को भद्दी गालियां दीं और अंजाम भुगतने की धमकी दी। पत्रकार का यह भी कहना है कि खुद विधायक ने भी संवेदनहीनता दिखाते हुए उसे “हजार-पांच सौ में बिकने वाला यूट्यूबर” कहकर नीचा दिखाया।

​धमकियों से बेखौफ पत्रकार ने अब  (नोनहरा) थाने में तहरीर देकर उन सभी नंबरों की सूची पुलिस को सौंप दी है। अब देखना यह है कि पुलिस खाकी का फर्ज निभाते हुए कार्रवाई करती है या राजनीतिक रसूख के आगे घुटने टेकती है।

पूर्वांचल में स्वतंत्र पत्रकारिता पर शिकंजा और कड़ा प्रतिरोध

सोशल मीडिया की बेबाक रिपोर्टिंग से अब सिर्फ स्थानीय नेता माफिया ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक महकमा भी असहज हो रहा है। पूर्वांचल में यह कोई पहली घटना नहीं है जब सवाल पूछने वाली आवाज को दबाने की कोशिश की गई हो:

मऊ का हरेंद्र राय मामला: मऊ के यूट्यूबर पत्रकार हरेंद्र राय पर एक के बाद एक मुकदमे लादकर जिलाबदर तक कर दिया गया।


भड़ास4मीडिया के यशवंत सिंह का संघर्ष: देश की निष्पक्ष डिजिटल पत्रकारिता का बड़ा नाम, 'भड़ास फॉर मीडिया' के संस्थापक संपादक यशवंत सिंह को भी जेल की सलाखों के पीछे भेजा गया था, जहां से उन्होंने चर्चित किताब 'जानेमन जेल' लिखी।


​नारद की 'माउथ मीडिया' से उठी मशाल

महर्षि नारद के दौर से लेकर आज तक, सच की आवाज उठाने वालों को अपमानित करने का इतिहास पुराना है, लेकिन कारवां कभी रुका नहीं। लोकल स्तर पर जब खबरें असर दिखाती हैं, तो थानेदारों से लेकर अफसरों तक तिलमिला जाते हैं और फर्जी आख्याएं बनाकर आलाधिकारियों को गुमराह करने का खेल शुरू हो जाता है।

​लेकिन सत्ता और प्रशासन यह भूल रहे हैं कि जिस मशाल की शुरुआत नारद की 'माउथ मीडिया' से हुई थी, वह आज सोशल मीडिया के रूप में हर गली-मोहल्ले में जल रही है। जंगीपुर के पत्रकारों और आम नागरिकों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है—क्योंकि लोकतंत्र में सवाल पूछना गुनाह नहीं, हक है!



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